ओमान से लाई सीबीआई टीम, अब खुल सकेंगे राज:महादेव सट्टा; सरगना सौरभ चंद्राकर भारत लाया गया, आज रायपुर में पेशी

रायपुर – महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट के खिलाफ जारी जांच में केंद्रीय एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले के मुख्य प्रमोटर और सरगना सौरभ चंद्राकर को सीबीआई ओमान से प्रत्यर्पित कराकर भारत ले आई है। रविवार को औपचारिक गिरफ्तारी के बाद सोमवार सुबह उसे रायपुर स्थित विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
सीबीआई के दो मामलों में सौरभ के खिलाफ पहले ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। वहीं, मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी अपनी अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) के आधार पर अदालत से उसकी हिरासत मांग सकता है। मूल रूप से भिलाई निवासी सौरभ के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था, जिसके आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। इसके बाद विदेश मंत्रालय, सीबीआई और ईडी के समन्वय से प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी की गई। सीबीआई के मुताबिक, सट्टेबाजी से होने वाली अवैध कमाई को दूसरे लोगों के नाम पर खोले गए बैंक खातों के जरिए कई स्तरों पर स्थानांतरित किया जाता था। इसके बाद हवाला के माध्यम से रकम विदेश भेजी जाती थी। आरोप है कि इस कमाई का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत तथा संरक्षण राशि के रूप में दिया जाता था, ताकि नेटवर्क बिना किसी बाधा के चलता रहे।
508 करोड़ के कथित भुगतान का मामला
महादेव एप मामले में राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। ईडी ने भिलाई निवासी असीम दास को गिरफ्तार किया था। तब एप से जुड़े शुभम सोनी के कथित बयान और ईमेल से चुनाव के समय एक सियासी दल से जुड़े लोगों को 508 करोड़ रुपए पहुंचाने का आरोप सामने आया था। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम न्यायिक निर्धारण नहीं हुआ है। जांच एजेंसियों ने कुछ पुलिस अधिकारियों और बिचौलियों पर हर महीने संरक्षण राशि लेने के भी आरोप लगाए हैं। सौरभ के प्रत्यर्पित होने के बाद इस मामले से जुड़े राज उजागर हो सकते हैं।
भिलाई के जूस सेंटर से दुबई तक फैला सट्टे का कारोबार, 94,400 करोड़ के नेटवर्क की जांच
भिलाई में जूस सेंटर चलाने वाले सौरभ चंद्राकर ने अपने सहयोगी रवि उप्पल के साथ मिलकर महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क खड़ा किया। करीब एक दशक में इसका कथित कारोबार 94,400 करोड़ तक पहुंचने का दावा है। नेटवर्क बाद में दुबई से संचालित होने लगा। देश के कई राज्यों में पैनल और शाखाएं खोली गईं, जबकि विदेश से पूरे कारोबार की निगरानी की जाती थी। मामले में अब तक विभिन्न जांच एजेंसियों ने 116 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें पुलिसकर्मियों, कारोबारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच हुई है। महादेव सट्टेबाजी मामले की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की थी। इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग और ईओडब्ल्यू ने संबंधित अपराधों की जांच शुरू की। अब सीबीआई भी मामले की जांच कर रही है। सीबीआई ने 11 चार्जशीट, ईडी ने 6 अभियोजन शिकायतें और ईओडब्ल्यू ने 3 चार्जशीट दाखिल की हैं। विभिन्न मामलों में सौरभ समेत 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। शेष|पेज 11
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