राज्य समाचार

बड़ी खबर | बिलासपुर में जांच की दस्तक, कोरबा के कथित ‘गब्बर टैक्स’ का हिसाब कब?

Spread the love

 

शाहबाज खान के ठिकाने पर ACB/EOW की दबिश की खबर; ग्राम यात्रा की पूर्व रिपोर्टों में उठे खुर्शीद, संतोष सिन्हा सहित अन्य नामों और तीवरता ग्रुप से जुड़े अलग मामलों की दस्तावेजी जांच की मांग

 

WhatsApp Group
Telegram Channel Join Now

 

बिलासपुर/कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क  कोयला कारोबार में आर्थिक अनियमितताओं की जांच हो रही है, तो कोरबा के कोयलांचल से उठती कथित वसूली की शिकायतों का सच भी सामने आना चाहिए। किस मद में पैसा मांगा गया? किसने लिया? किसके संरक्षण का दावा किया गया? इन सवालों का जवाब अब रिकॉर्ड से चाहिए।

बिलासपुर के उसलापुर स्थित अलका एवेन्यू में कोयला कारोबारी शाहबाज खान के आवास पर ACB/EOW की टीम की दबिश की खबर सामने आई है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर की प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की। बरामदगी और संबंधित व्यक्ति की भूमिका पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी अपेक्षित है।  आर्थिक मामलों में दस्तावेज और पैसों के लेन-देन की जांच करने की एजेंसी की सक्रियता सराहनीय है। निष्पक्ष जांच ही स्पष्ट कर सकती है कि शिकायत कहां सही है, किसकी भूमिका बनती है और किस आरोप में तथ्य नहीं हैं।

खुर्शीद और संतोष सिन्हा के नाम वाली पूर्व शिकायतों का सच भी सामने आए

 

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क ने पूर्व रिपोर्टों में गेवरा–दीपका–कुसमुंडा क्षेत्र में कोयला उठाव और लोडिंग से जुड़ी कथित वसूली के प्रश्न उठाए थे। उन आरोपों में एन. खुर्शीद और संतोष सिन्हा के नाम प्रमुखता से आए थे। अन्य संदर्भों में मारुति शंकर और संतोष राठौर के नाम भी उठाए गए थे।  इन नामों का पूर्व रिपोर्टिंग में उल्लेख होना अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रत्येक व्यक्ति का पक्ष जरूरी है। लेकिन ठोस विवरण वाली शिकायतों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करना भी आवश्यक है।

ग्राम यात्रा का सवाल है—जिन शिकायतों में रकम, प्रक्रिया और संबंधित व्यक्तियों का उल्लेख किया गया, उन पर क्या जांच हुई? कोई अभिलेख मंगाया गया? कोई निष्कर्ष निकला?

 

 

₹12–₹50 और ₹150–₹450 प्रति टन: अधिकृत शुल्क है तो आदेश दिखाएं

 

पूर्व रिपोर्टिंग में प्राप्त आरोपों के अनुसार, ‘एलाओ’ और अन्य मदों के नाम पर ₹12 से ₹50 प्रति टन, जबकि अच्छे कोयले के लिए ₹150 से ₹450 प्रति टन तक कथित अतिरिक्त रकम मांगने के सवाल उठे हैं।  इन दरों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। फिर भी जांच का प्रश्न सीधा है—यदि ऐसा भुगतान मांगा गया, तो उसका अधिकृत आधार क्या था? रसीद किसने दी? पैसा किसे मिला?   नियम के तहत शुल्क है तो आदेश सामने आए। निजी वसूली है तो प्रमाण के आधार पर जिम्मेदारी तय हो। कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं को अस्पष्ट जवाब नहीं, साफ व्यवस्था चाहिए।

 

‘ऊपर से आदेश’ का दावा—जांच में उसकी भी परख हो

पूर्व आरोपों में संरक्षण और “ऊपर से व्यवस्था” होने जैसे कथन भी उठे हैं। ऐसे कथन किसी वरिष्ठ अधिकारी को स्वतः दोषी नहीं बनाते। जांच में यह परखा जाना चाहिए कि ये वास्तविक निर्देश थे, किसी व्यक्ति का दबाव बनाने का तरीका था या निराधार दावा।   डीओ, लोडिंग रिकॉर्ड, तौल कांटे का मूल डेटा, गेट एंट्री और उपलब्ध भुगतान विवरण का मिलान हो। शिकायतकर्ता तारीख, वाहन नंबर, रकम और संबंधित व्यक्ति का विवरण दें। जांच उसी आधार पर आगे बढ़े।

तीवरता ग्रुप से जुड़े प्रश्न भी अपनी जगह कायम

 

ग्राम यात्रा की पूर्व खबरों में तीवरता ग्रुप से जुड़े कथित लेन-देन और कारोबार पर भी सवाल उठाए गए हैं। इनमें कुसमुंडा के कोरबा सर्विस स्टेशन से जुड़ा कथित सौदा तथा लिम्हा, बेलतरा स्थित तीवरता कोल बेनिफिसिएशन लिमिटेड की वॉशरी के पानी, पर्यावरणीय अनुमतियों और अनुपालन संबंधी प्रश्न शामिल रहे हैं।   इन अलग मामलों के अपने दस्तावेज और संबंधित विभाग हैं। पेट्रोल पंप के मामले में सामने आए PESO के पत्र और SECL के नोटिस को कोल लेवी की जांच का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी तरह वॉशरी संबंधी प्रश्नों से अवैध वसूली में संलिप्तता सिद्ध नहीं होती।   लेकिन संबंधित पक्षों से दस्तावेजी जवाब और सक्षम विभागों से जांच की स्थिति मांगना पूरी तरह आवश्यक है। अनुमति है तो प्रस्तुत हो। शिकायत गलत है तो रिकॉर्ड से स्पष्ट हो। उल्लंघन मिले तो उसके अनुरूप कार्रवाई हो।

 

आज की दबिश से संबंध की पुष्टि नहीं—मौजूदा आरोपों की जांच की मांग

उपलब्ध जानकारी में खुर्शीद, संतोष सिन्हा, अन्य उल्लिखित व्यक्तियों अथवा तीवरता ग्रुप का बिलासपुर की आज की कार्रवाई से प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है। उन्हें उस छापेमारी का आरोपी बताना उचित नहीं होगा।  ग्राम यात्रा की मांग वर्तमान शिकायतों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित पड़ताल की है। जांच एजेंसियों की सक्रियता का स्वागत करते हुए यही अपेक्षा है कि प्रमाण मिलने पर किसी प्रभाव या पद के कारण कार्रवाई न रुके।

कोयला उठाव में कथित निजी वसूली के आरोपों का जवाब चाहिए। नामों पर शोर से आगे बढ़कर रिकॉर्ड खुलें, संबंधित पक्षों के उत्तर आएं और जिम्मेदारी प्रमाण से तय हो—यही जांच की असली कसौटी है।

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button