ग्राम यात्रा की मुहिम का अहम पड़ाव: संपादक अब्दुल सुल्तान की शिकायत पर PESO का पत्र

जमीन SECL की, करोड़ों के कथित सौदे का अधिकार किसका? कुसमुंडा पेट्रोल पंप मामले में अब कलेक्टर से कार्रवाई का अनुरोध
संदिग्ध 99 वर्षीय लीज, कथित ₹2.5 करोड़ का हस्तांतरण और भूमि अधिकार पर सवाल; PESO ने शिकायत पर उचित कार्रवाई कर सूचित करने को कहा—SECL का दूसरा नोटिस भी सामने
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क जमीन पर अधिकार का सवाल अनसुलझा हो, तो करोड़ों के कथित सौदे का आधार क्या है? लीज समाप्त होने का उल्लेख निरीक्षण रिपोर्ट में हो, तो पेट्रोल पंप का संचालन किस दस्तावेज के भरोसे जारी रहा? कुसमुंडा स्थित मेसर्स कोरबा सर्विस स्टेशन मामले में सामने आए सरकारी पत्रों ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क के संपादक अब्दुल सुल्तान की शिकायत पर भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन—PESO ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, कोरबा को पत्र भेजा है। पत्र में शिकायत पर उचित कार्रवाई करने और PESO कार्यालय को सूचित करने का अनुरोध किया गया है। दूसरी ओर, एसईसीएल कुसमुंडा के संपदा अधिकारी का दूसरा कारण बताओ नोटिस भी सामने है। अब संबंधित विभाग बताएं—दस्तावेजों की जांच कहां तक पहुंची और कार्रवाई का अगला कदम क्या है?
PESO के पत्र में शिकायत दर्ज—अब जवाबदेही कलेक्टर कार्यालय तक
उप मुख्य विस्फोटक नियंत्रक कार्यालय, रायपुर के 12 अक्टूबर 2026 के पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि 22 सितंबर 2026 को अब्दुल सुल्तान का शिकायत पत्र प्राप्त हुआ था। उसकी प्रति संलग्न करते हुए कलेक्टर को उचित कार्रवाई के लिए लिखा गया है। यह ग्राम यात्रा की दस्तावेजी मुहिम का महत्वपूर्ण पड़ाव है। शिकायत अब आधिकारिक पत्राचार का हिस्सा है। लेकिन पत्र भेजे जाने के बाद क्या जांच हुई, कौन-से अभिलेख मंगाए गए और क्या निष्कर्ष निकला—इसकी जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
99 साल की संदिग्ध लीज और कथित ₹2.5 करोड़ का हस्तांतरण—सच किस फाइल में है?
PESO के पत्र की विषयवस्तु में वैध भूमि अधिकार, जिला प्राधिकारी के लाइसेंस, डीलरशिप पुनर्गठन और अग्नि सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों का उल्लेख है। इसके साथ कथित ₹2.5 करोड़ के निजी हस्तांतरण, संदिग्ध 99 वर्षीय लीज दस्तावेज और एसईसीएल की भूमि पर कथित अनधिकृत कब्जे की शिकायत का संदर्भ दर्ज है। प्रोप्राइटर अथवा पूर्व प्रोप्राइटर के रूप में बताई गईं देबजानी मजुमदार सहित संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग भी पत्र की विषयवस्तु में शामिल है। ये आरोप अभी जांच के विषय हैं। लेकिन इनका जवाब साफ होना चाहिए—लीज का मूल दस्तावेज कहां है? उसे किसने जारी किया? कथित हस्तांतरण में किस अधिकार का सौदा हुआ और किस प्राधिकारी ने अनुमति दी? तीवरता ग्रुप से कथित सौदा: कारोबार बिका या जमीन पर अधिकार का दावा भी? पूर्व रिपोर्टिंग में मजुमदार से जुड़े पेट्रोल पंप का तीवरता ग्रुप को कथित रूप से बेचे जाने का मामला उठाया गया था। अब संबंधित पक्षों को स्पष्ट करना चाहिए कि कथित लेन-देन में वास्तव में क्या शामिल था। क्या केवल कारोबार और उपकरणों का हस्तांतरण हुआ? क्या डीलरशिप से जुड़े हित शामिल थे? या एसईसीएल की जमीन पर अधिकार का दावा भी सौदे का हिस्सा बनाया गया? इन सवालों का उत्तर समझौते और स्वीकृति के दस्तावेज देंगे। उपलब्ध PESO पत्र कथित खरीदार की पहचान, तीवरता ग्रुप की भूमिका अथवा सौदे की वैधता पर कोई निष्कर्ष नहीं देता।
SECL का दूसरा नोटिस—बेदखली पर जवाब मांगा, सुनवाई के बाद क्या हुआ?
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, एसईसीएल के संपदा अधिकारी ने 13 अक्टूबर को पहला और 22 अक्टूबर 2026 को दूसरा नोटिस जारी किया था। दूसरे नोटिस में संबंधित परिसर से बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए, इस पर जवाब मांगा गया था। संबंधित पक्ष को 28 अक्टूबर, सुबह 11 बजे अपना पक्ष और प्रमाण प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया। अनुपस्थित रहने पर एकपक्षीय निपटारे की चेतावनी भी दी गई थी। सुनवाई की तारीख बीत चुकी है। अब प्रबंधन बताए—जवाब आया या नहीं? वैध अधिकार का कौन-सा प्रमाण प्रस्तुत हुआ? कोई आदेश पारित हुआ या प्रकरण अभी लंबित है?
जनता को अगली तारीख नहीं, कार्रवाई की स्पष्ट स्थिति चाहिए
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क ने सार्वजनिक जमीन और कथित खरीद-बिक्री पर सवाल उठाए। संपादक की शिकायत पर PESO का पत्र सामने आया और एसईसीएल ने भी नोटिस की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। हालांकि, उपलब्ध पत्र समाचार प्रकाशन और कार्रवाई के बीच सीधा संबंध नहीं बताते। अब जवाब कागजों के साथ चाहिए। अधिकार वैध है तो उसका प्रमाण सामने आए। शिकायत में दम है तो जांच का निष्कर्ष और उसके अनुरूप कार्रवाई सामने आए। सार्वजनिक संपत्ति के सवाल को अस्पष्ट जवाबों के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता।
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