कोरबा निगम में ठेकों का खेल? आयुक्त आशुतोष पांडेय पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के सीधे आरोप

पौधा खरीदी से बड़े निर्माण तक हिसाब खोलने की मांग; उमेश राठौर को कथित संरक्षण और निरीक्षणों में साथ रखने पर सवाल—मुख्य सचिव को संबोधित शिकायत में स्वतंत्र जांच की मांग
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क सार्वजनिक धन का भुगतान किस आधार पर हुआ? ठेके किस प्रक्रिया से मिले? एक ठेकेदार दूसरे ठेकेदारों के आधिकारिक निरीक्षण में किस अधिकार से शामिल हुआ? नगर पालिक निगम कोरबा के आयुक्त आशुतोष पांडेय के विरुद्ध तैयार शिकायत में इन्हीं सवालों के साथ भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और चुनिंदा पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचाने के सीधे आरोप लगाए गए हैं। मुख्य सचिव को संबोधित 28 अक्टूबर 2026 के अभ्यावेदन में पौधा खरीदी, निर्माण, भुगतान, भवन अनुमति और बालको–वेदांता संबंधी निर्णयों तक की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच मांगी गई है।
शिकायतकर्ता अब्दुल सुल्तान, संपादक—ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क एवं प्रदेश सचिव—भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ का आरोप है कि कुछ प्रकरणों में आयुक्त ने प्रशासनिक अधिकारों और प्रभाव का इस्तेमाल चुनिंदा पक्षों को लाभ पहुंचाने के लिए किया।
मांग स्पष्ट है—केवल सफाई नहीं, मूल रिकॉर्ड का परीक्षण हो; केवल अधीनस्थ कर्मचारियों से जवाब नहीं, स्वीकृति देने और भुगतान कराने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय हो।
पौधा खरीदी: कागज, खेप और भुगतान का हिसाब खुले
शिकायत में 3,070 पौधों और 220 फलदार पौधों की दो GeM बोलियों, पुराने कार्यादेश की खरीदी तथा कथित 650 पौधों की खेप का मिलान कराने की मांग है। सवाल है कि कितने पौधे स्वीकृत हुए, कितने पहुंचे, किस गुणवत्ता के थे, कहां लगाए गए और किस सत्यापन पर भुगतान हुआ? वाहन CG04 RB 0409 और “Umesh Sir” अंकित उपलब्ध पर्ची का उल्लेख करते हुए आपूर्ति की पूरी कड़ी जांचने को कहा गया है। पर्ची पर लिखे नाम की पहचान की पुष्टि भी मांगी गई है। यदि आदेश, आपूर्ति और भुगतान में अंतर मिलता है, तो उसे प्रमाणित करने वाले हस्ताक्षरों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए—शिकायत की मांग यही है। कम आपूर्ति, बढ़ी हुई दर, निम्न गुणवत्ता अथवा एक ही खेप के अलग-अलग समायोजन की आशंकाओं का अभिलेखीय परीक्षण मांगा गया है।
उमेश राठौर को ठेके: आयुक्त की भूमिका पर सीधा सवाल
शिकायत में उमेश राठौर को कांग्रेसी नेता का पुत्र एवं ठेकेदार बताते हुए आरोप लगाया गया है कि उन्हें छोटे से बड़े कामों के ठेके प्राप्त करने में आयुक्त पदीय प्रभाव से सहायता पहुंचाते हैं। उनसे और अभिलेखों से प्रमाणित संबद्ध फर्मों से जुड़े कार्यादेश, प्रतिस्पर्धी बोलियां, अतिरिक्त कार्य, लागत वृद्धि, समयवृद्धि और भुगतान जांचने की मांग है। किसे काम मिला, किसकी बोली खारिज हुई और निर्णय किसने लिया—इन सवालों का जवाब निविदा फाइलों से मांगा गया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।
दूसरे ठेकेदारों के निरीक्षण में मौजूदगी—हैसियत क्या थी?
शिकायतकर्ता का दावा है कि आयुक्त अन्य ठेकेदारों के कार्यों के निरीक्षण में भी उमेश राठौर को साथ लेकर जाते हैं। संबंधित फोटो एवं वीडियो सुरक्षित होने की बात कही गई है। यदि यह दावा सत्यापित होता है, तो जांच का प्रमुख प्रश्न होगा कि श्री राठौर किस आदेश या नियुक्ति के आधार पर वहां मौजूद थे। क्या उन्हें दूसरे ठेकेदारों की माप, गुणवत्ता, बिल और गैर-सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध हुई? क्या उन्होंने निर्देश दिए? क्या निरीक्षण के बाद भुगतान या आपत्तियों पर कोई प्रभाव पड़ा? सरकारी निरीक्षण में निजी ठेकेदार की भूमिका का उत्तर मौखिक परिचय से नहीं, अधिकृत आदेश और वास्तविक आचरण के परीक्षण से मांगा गया है।
HIG-30: आपत्तियां कैसे निपटीं, अनुमति किस आधार पर मिली?
HIG-30, पंडित रविशंकर शुक्ल नगर, प्रस्ताव क्रमांक 2863 की भवन अनुमति और नियमितीकरण प्रक्रिया पर भी पद के दुरुपयोग का आरोप है। नक्शे, एफएआर, पार्किंग, ऊंचाई, तकनीकी आपत्तियां, उनके निस्तारण की नोटशीट, सक्षम आदेश और शुल्क की गणना को वास्तविक निर्माण से मिलाने की मांग की गई है। संबंधित हाईकोर्ट आदेश के अनुपालन की जांच भी मांगी गई है।
सभागार से एफडीआर तक—पूरे कार्यकाल का वित्तीय परीक्षण मांगा
जवाहरलाल नेहरू सभागार के फर्नीचर, ध्वनि, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, विद्युत और लैंडस्केपिंग कार्यों में स्वीकृत सामग्री, वास्तविक उपलब्धता तथा भुगतान जांचने की मांग है। एफडीआर, अमानत राशि, बैंक शेष और ब्याज के साथ सड़क, डिवाइडर, सीवरेज, LED एवं रखरखाव का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लाने को कहा गया है। कार्य छोटे हिस्सों में बांटने, अधूरे काम पर भुगतान, दोहरे भुगतान और वारंटी वाले कामों पर दोबारा खर्च की आशंकाओं का परीक्षण मांगा गया है। DMF, बरबसपुर राख भराव और प्रतिमा स्थापना संबंधी खर्च भी शिकायत में शामिल हैं।
बालको–वेदांता संबंधी फैसलों की भी जांच हो
शिकायत में बालको–वेदांता संबंधी भवन अनुमति, नियमितीकरण, ध्वस्तीकरण, FTP/पॉटलाइन चिमनी पत्राचार, कर, बकाया, छूट और नोटिस की विशेष समीक्षा मांगी गई है। प्रश्न उठाया गया है कि किसी निर्णय में आवश्यक प्रक्रिया की अनदेखी, अधिकारक्षेत्र से बाहर कार्रवाई या अनुचित वित्तीय राहत तो नहीं दी गई। इसका निर्धारण निगम और अन्य सक्षम विभागों के रिकॉर्ड से कराने की मांग है।
जांच के निर्देशों का क्या हुआ?
अभ्यावेदन में नगरीय प्रशासन विभाग के 28 सितंबर 2026 के पत्र तथा संभागायुक्त कार्यालय के पौधा खरीदी और HIG-30 संबंधी ज्ञापनों का उल्लेख है। मांग है कि स्पष्ट किया जाए—जांच किसे सौंपी गई, कौन-से रिकॉर्ड देखे गए और क्या प्रतिवेदन दिया गया? कार्रवाई लंबित होने पर कारण और जिम्मेदारी भी बताई जाए।
रिकॉर्ड सुरक्षित हों, हर आरोप का लिखित फैसला आए
शिकायत में ई-फाइल, नोटशीट, GeM लॉग, माप पुस्तिका, बैंक रिकॉर्ड, पत्राचार और उपलब्ध CCTV तत्काल सुरक्षित करने की मांग है। साथ ही स्वतंत्र जांच दल, आयुक्त की निर्णयवार भूमिका का परीक्षण और अपराध के तत्व मिलने पर सक्षम जांच एजेंसी को मामला भेजने का अनुरोध किया गया है। सार्वजनिक धन की हानि सिद्ध होने पर वसूली तथा विभागीय कार्रवाई की मांग भी है।
शिकायत का केंद्रीय सवाल है: जिन फैसलों से लाभ मिला और जिन हस्ताक्षरों से भुगतान हुआ, उनकी स्वतंत्र जांच कब होगी?
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