स्कूल का पूर्व प्रिंसिपल निकला चोर गिरोह का सदस्य! कृषि अधिकारी बनकर करते थे रेकी, 10 वारदातों का खुलासा

बिलासपुर। फाश किया है, जिसके सदस्य गांवों में पहचान छिपाकर सूने मकानों को निशाना बनाते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य कभी कृषि अधिकारी बनकर सर्वे करने पहुंचते, तो कभी आम लोगों की तरह गांवों में घूमकर घरों की रेकी करते थे। मौका मिलते ही ताला तोड़कर जेवर और नकदी लेकर फरार हो जाते थे। कोटा थाना पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बिलासपुर और कोरबा जिले की 10 चोरी की वारदातों का खुलासा करते हुए करीब 20 लाख रुपये का सामान बरामद करने का दावा किया है।
कृषि अधिकारी बनकर करते थे सूने मकानों की रेकी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह के मुताबिक, आरोपी ग्रामीणों के बीच सामान्य लोगों की तरह घूमते थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो। पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य कृषि अधिकारी बनकर सर्वे करने की बात कहते और इस बहाने गांवों में लोगों की गतिविधियों पर नजर रखते थे।
खेती-किसानी के काम से ग्रामीणों के घर से बाहर जाने पर आरोपी सूने मकानों को निशाना बनाते थे। ताला लगा मिलने पर उसे तोड़कर घर में प्रवेश करते और अलमारी या पेटी में रखे आभूषण तथा नकदी लेकर फरार हो जाते थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह दिन के समय ग्रामीण और बाहरी इलाकों में बने मकानों में चोरी करता था। वारदात के दौरान सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए आरोपी चेहरे ढकने और हेलमेट पहनने का भी प्रयास करते थे।
पूर्व प्रिंसिपल समेत तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विनोद कुमार वासुदेव (33), भूपेंद्र सिंह राठौर उर्फ गुरुजी (43) और राज प्रजापति उर्फ लल्लू (19) के रूप में की है। तीनों कोरबा जिले के मानिकपुर क्षेत्र के डिपरापारा के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, विनोद कुमार वासुदेव गिरोह का कथित मास्टरमाइंड है। वह स्नातक है और कारोबारी पहचान बनाए रखने के लिए जूते की दुकान चलाता था। दूसरा आरोपी भूपेंद्र सिंह राठौर स्नातकोत्तर है और पहले स्कूल में प्रिंसिपल रह चुका है। पुलिस के अनुसार, नौकरी से निकाले जाने के बाद वह चोरी की वारदातों में शामिल हो गया। तीसरा आरोपी राज प्रजापति है। पुलिस अब आरोपियों से जुड़े अन्य मामलों और नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही है।
चोरी की रकम से खरीदी क्रेटा कार और बुलेट
पुलिस की जांच में चोरी की रकम से वाहन खरीदने की बात भी सामने आई है। एएसपी मधुलिका सिंह के मुताबिक, विनोद ने कथित तौर पर चोरी के पैसों से क्रेटा कार खरीदी और उसकी किस्तें भी उसी रकम से चुकाईं। वहीं, राज प्रजापति ने अपने चाचा के नाम पर बुलेट खरीदी थी।
पुलिस ने दोनों वाहनों के साथ एक बाइक, सोने-चांदी के आभूषण और 1.30 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। जब्ती में गुल्लक में रखे 1,250 रुपये के सिक्के भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, बरामद सामान की कुल कीमत करीब 20 लाख रुपये आंकी गई है।
CCTV फुटेज से खुला राज, 10 चोरी के मामलों का खुलासा
बिलासपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में दिनदहाड़े हुई चोरी की घटनाओं की जांच के दौरान पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों से सुराग मिले। इसके बाद कोटा पुलिस और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने चोरी की वारदातों में शामिल होने की बात स्वीकार की।
पुलिस ने कुल 10 मामलों का खुलासा किया है। इनमें बिलासपुर जिले के नौ और कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र का एक मामला शामिल है। चोरी की घटनाएं कोटा, रतनपुर, बिल्हा, पचपेड़ी और बेलगहना चौकी सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में हुई थीं। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले भी जांजगीर जिले में दिनदहाड़े चोरी के मामलों में जेल जा चुके हैं। उनके खिलाफ वर्ष 2022-23 के दौरान दर्ज 19 प्रकरणों का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। फिलहाल पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।
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