बी. साईराम साहब, उत्पादन पर शाबाशी—पेट्रोल पंप की शिकायत पर जवाब कब?

कुसमुंडा GM–CGM के कथित संरक्षण पर चेयरमैन से स्पष्ट रुख की मांग; देबजानी मजूमदार और अशोक तीवरता समूह से जुड़े बताए जा रहे पंप की फाइल स्वतंत्र जांच के लिए खोलिए
कोरबा/कुसमुंडा। चेयरमैन साहब, खदान का उत्पादन देख लिया, कर्मचारियों का हौसला भी बढ़ा दिया। अब उस शिकायत की फाइल भी देखिए, जिसमें आपकी ही कंपनी की जमीन, पेट्रोल पंप के संचालन और स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। उत्पादन बढ़ाने के निर्देश जितने स्पष्ट हैं, सार्वजनिक संपत्ति की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी उतने ही स्पष्ट कब होंगे? कोल इंडिया चेयरमैन बी. साईराम के सामने सवाल केवल कोयले की मांग पूरी करने का नहीं है। सवाल यह भी है कि SECL की संपत्ति से जुड़े विवाद में कंपनी के अपने पत्रों का क्या हुआ और कथित संरक्षण की शिकायतों पर किस स्तर पर जांच हुई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रकरण आपको भी प्रेषित किया गया है। यदि शिकायत प्राप्त हुई है, तो उस पर क्या संज्ञान लिया गया?
उसे किस अधिकारी को भेजा गया?
कोई रिपोर्ट मांगी गई?
कोई समयसीमा तय हुई?
इन सवालों का उत्तर सार्वजनिक कीजिए।
चेयरमैन साहब, आपकी जानकारी में क्या रखा गया?
दौरे के दौरान अधिकारियों ने उत्पादन की उपलब्धियां प्रस्तुत की होंगी। लेकिन क्या कुसमुंडा स्थित मेसर्स कोरबा सर्विस स्टेशन का विवाद भी आपके सामने रखा गया? क्या भूमि खाली करने से जुड़े पत्र दिखाए गए? क्या बताया गया कि वर्तमान संचालन किस भूमि-अधिकार और किन अनुमतियों पर आधारित है? यदि मामला आपके सामने रखा गया, तो निर्देश क्या दिए गए? यदि नहीं रखा गया, तो गंभीर शिकायत को समीक्षा से बाहर रखने की जिम्मेदारी किसकी है? समीक्षा बैठक का अर्थ केवल उपलब्धियों का प्रदर्शन नहीं हो सकता। जिन फाइलों पर असुविधाजनक सवाल हैं, उनकी समीक्षा भी नेतृत्व की परीक्षा है।
SECL के पत्र सिर्फ कागज थे या पालन के लिए जारी हुए थे?
ग्राम यात्रा की पूर्व प्रकाशित रिपोर्ट में उद्धृत 3 सितंबर 2024 और 27 जनवरी 2025 के पत्रों में नया अनुबंध देने से इनकार, भूमि और भवन खाली करने के निर्देश तथा कब्जा नहीं सौंपे जाने का उल्लेख बताया गया है। इन पत्रों के बाद की पूरी निर्णय प्रक्रिया सामने आनी चाहिए। किसने कार्रवाई प्रस्तावित की? किसने कानूनी राय मांगी? किस स्तर पर फाइल लंबित हुई? वर्तमान न्यायिक स्थिति के अनुसार कौन-सी कार्रवाई संभव है? जिस संस्थान ने जमीन खाली करने का निर्देश दिया, उसी संस्थान को अब अपने निर्देश का हिसाब देना चाहिए। पत्र की सख्ती और उसके अनुपालन की स्थिति में अंतर क्यों है—यह सवाल टाला नहीं जा सकता।
GM–CGM को आपका संरक्षण है? स्पष्ट रुख दीजिए
कुसमुंडा के GM–CGM स्तर पर पंप संचालक को संरक्षण मिलने के आरोप उठाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र जांच से होनी है। चेयरमैन द्वारा संरक्षण दिए जाने का प्रमाण उपलब्ध नहीं है। फिर भी नेतृत्व से यह सीधा प्रश्न बनता है:क्या स्थानीय अधिकारियों के निर्णयों और अब तक की कार्रवाई से आप सहमत हैं? यदि हां, तो उसका दस्तावेजी आधार बताइए। यदि नहीं, तो स्वतंत्र जांच और जवाबदेही तय करने के निर्देश जारी कीजिए। किसी अधिकारी को पद के कारण आरोप से छूट नहीं मिल सकती। उसी तरह आरोप लग जाने से उसे दोषी भी नहीं माना जा सकता। इस स्थिति का रास्ता स्पष्ट है—रिकॉर्ड की जांच, संबंधित पक्षों का उत्तर और कारण सहित निर्णय। चेयरमैन साहब, आपका स्पष्ट निर्देश ही बताएगा कि शिकायत की जांच होगी या वह एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भेजे जाने तक सीमित रहेगी।
देबजानी मजूमदार और अशोक तीवरता समूह: भूमिका का दस्तावेजी उत्तर चाहिए
प्रकरण में देबजानी मजूमदार की भूमिका तथा अशोक तीवरता समूह द्वारा वर्तमान संचालन किए जाने का दावा सामने रखा गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। वर्तमान अधिकृत डीलर कौन है? वास्तविक संचालन किसके हाथ में है? कोई हस्तांतरण, पुनर्गठन या संचालन परिवर्तन हुआ है तो स्वीकृति किसने दी? भूमि उपयोग का अधिकार किसके नाम है? व्यावसायिक प्रभाव वैध दस्तावेज का विकल्प नहीं है। कारोबारी की पहुंच कितनी भी बड़ी हो, सार्वजनिक कंपनी की जमीन से जुड़े सवालों का उत्तर अभिलेखों से ही देना होगा। संबंधित पक्ष अपना दस्तावेजी जवाब दें। SECL भी स्पष्ट करे कि उसके रिकॉर्ड में अधिकृत पक्ष कौन है और वर्तमान व्यवस्था को उसने किस आधार पर स्वीकार किया है।
अदालत का नाम लेकर अस्पष्टता मत बनाए रखिए
पूर्व रिपोर्ट में मार्च 2025 के अंतरिम आदेश का उल्लेख था। उससे आज की न्यायिक स्थिति तय नहीं होती। नवीनतम प्रभावी आदेश और उसकी सीमा स्पष्ट करना आवश्यक है। यदि किसी कार्रवाई पर न्यायिक रोक है, तो उसका विवरण सामने रखिए। यदि कार्रवाई संभव है, तो बताइए कि अगला विधिसम्मत कदम क्या होगा और कब होगा। न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए भी प्रबंधन को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अस्पष्ट उत्तर जनता के सवालों का समाधान नहीं है।
बी. साईराम साहब, अब निर्देश और परिणाम दिखाइए
इस मामले में स्थानीय निर्णय प्रक्रिया से स्वतंत्र जांच कराई जाए। मूल अनुबंध, भूमि अभिलेख, संबंधित पत्र, संचालन परिवर्तन के दस्तावेज और अधिकारियों की नोटशीट सुरक्षित कर परीक्षण किया जाए। जांच की समयसीमा निर्धारित हो और निष्कर्ष के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित हो। उत्पादन लक्ष्य चूकने पर स्पष्टीकरण मांगा जाता है। सार्वजनिक संपत्ति की शिकायत पर भी जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण क्यों न मांगा जाए? श्रमिकों की मेहनत से SECL की प्रतिष्ठा बनती है। उस प्रतिष्ठा की रक्षा अधिकारियों के पारदर्शी निर्णयों से होगी। शिकायत की जांच कराना उसी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
चेयरमैन साहब, अब सवाल आपके निर्णय का है—कुसमुंडा पेट्रोल पंप की फाइल खुलेगी कब, कथित संरक्षण की जांच होगी कब और जिम्मेदारी तय होगी कब? भूमि-अधिकार, संचालन और संरक्षण से जुड़े आरोप जांच के विषय हैं। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क संबंधित पक्षों का दस्तावेज सहित उत्तर प्रकाशित करेगा।
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