वक्फ संपत्ति की वसूली बनाम मंच की तस्वीर: सलीम राज और हाजी अखलाख खान की नजदीकी पर उठे सवाल

36 लाख की वसूली के आदेश का दावा, फिर भी आरोपी बताए जा रहे पूर्व इंतजामिया सदर के साथ मंच साझा करने पर सवाल
रायपुर/कोरबा (लुतरा शरीफ) । वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, आय की निगरानी और अनियमितताओं पर कार्रवाई की जिम्मेदारी निभाने वाले वक्फ बोर्ड को लेकर एक तस्वीर ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर में छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सलीम राज के साथ लूतरा शरीफ इंतजामिया कमेटी के पूर्व सदर हाजी अखलाख खान नजर आ रहे हैं। उनके साथ मंच पर एक कव्वाल भी दिखाई दे रहे हैं।
राजनीतिक रूप से दोनों की अलग-अलग विचारधाराओं से नजदीकी की चर्चा के बीच एक ही मंच पर नजर आना इसलिए भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि हाजी अखलाख खान के कार्यकाल से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ अभिकरण के न्यायिक आदेश का हवाला दिया जा रहा है।
समाज के बीच से ही सवाल उठा है कि 36 लाख के गबन और वसूली का आदेश—फिर कार्रवाई कहां?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लूतरा शरीफ इंतजामिया कमेटी के पूर्व सदर हाजी अखलाख खान से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ अभिकरण द्वारा लगभग 36 लाख रुपये की राशि के गबन/वसूली से संबंधित आदेश पारित किए जाने का दावा किया जाता है।
यदि ऐसा आदेश प्रभावी है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि वक्फ संपत्ति की राशि की वास्तविक वसूली के लिए अब तक क्या कार्रवाई हुई?
क्या संबंधित व्यक्ति से राशि वसूल की गई?
यदि नहीं, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी या संस्था कौन है?
चेयरमैन के साथ मंच साझा करने पर उठे सवाल
विवाद का केंद्र केवल तस्वीर नहीं है। सवाल यह है कि जिस व्यक्ति से वक्फ की कथित राशि की वसूली का मामला जुड़ा बताया जा रहा है, उसके साथ वर्तमान वक्फ बोर्ड चेयरमैन का सार्वजनिक मंच साझा करना क्या उचित प्रशासनिक संदेश देता है?
तस्वीर सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या वक्फ बोर्ड पुराने वित्तीय मामलों में कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है या राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के बीच ऐसे मामलों की धार कमजोर पड़ रही है?
शिकायतें हुईं तो कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं?
बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर संबंधित स्तर पर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं। ऐसे में वक्फ बोर्ड से यह सवाल पूछा जाना स्वाभाविक है कि शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई और कथित वसूली आदेश का वर्तमान स्टेटस क्या है?
वक्फ संपत्ति किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि वक्फ उद्देश्य के लिए समर्पित संपत्ति होती है। इसलिए उससे जुड़ी रकम की वसूली और संपत्ति की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।
मूल जिम्मेदारियों से हटकर बयानबाजी का आरोप
सलीम राज के कुछ सार्वजनिक बयानों को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि वक्फ बोर्ड चेयरमैन को अपनी प्राथमिकता वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा, अवैध कब्जों पर कार्रवाई, आय की निगरानी, लंबित मामलों और वित्तीय वसूली पर रखनी चाहिए।
वहीं, राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बयानबाजी को लेकर सवाल उठाने वाले लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या ये विषय चेयरमैन के संवैधानिक और प्रशासनिक दायरे में आते हैं?
तस्वीर कई सवाल छोड़ गई…
एक तस्वीर अपने आप में किसी मिलीभगत का प्रमाण नहीं होती। लेकिन जब तस्वीर के पीछे वक्फ संपत्ति, वित्तीय वसूली का कथित आदेश और पूर्व इंतजामिया पदाधिकारी से जुड़ा विवाद मौजूद हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब निगाहें छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड पर हैं—
क्या ₹36 लाख से जुड़े कथित वसूली आदेश पर वास्तविक कार्रवाई हुई?
अगर हुई तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
अगर नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
और क्या चेयरमैन सलीम राज इस मामले में निष्पक्ष जांच एवं वसूली सुनिश्चित करेंगे?
इन सवालों का जवाब तस्वीर से नहीं, बल्कि वक्फ बोर्ड की कार्रवाई और आधिकारिक रिकॉर्ड से मिलना चाहिए।
Live Cricket Info