तत्काल जरूरत’ का बहाना, महीनेभर की प्रक्रिया! विभाग बताए—खरीद जरूरी थी या प्रतिस्पर्धा सीमित करना?

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बेडशीट टेंडर निरस्त होने की खबर से सवाल खत्म नहीं; ग्राम यात्रा ने सरकारी खरीदी की शर्तों को जनता के सामने रखकर माँगा हिसाब
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क सरकारी खरीदी में सुविधा विभाग की नहीं, सुरक्षा जनता के पैसे की होनी चाहिए। लेकिन कोरबा के आदिवासी विकास विभाग की बेडशीट निविदा पर सामने आई जानकारी एक सीधा सवाल खड़ा करती है—
जब प्रक्रिया के लिए पूरा महीना था, तो ‘तत्काल आवश्यकता’ बताकर प्रतिस्पर्धा सीमित करने की जरूरत क्या थी?
प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 4,100 बेडशीट के लिए ₹19,96,700 की अनुमानित लागत तय की गई। निविदा 25 अगस्त को जारी हुई और अंतिम तारीख 24 सितंबर रखी गई। Limited Tender चुनने का कारण तत्काल जरूरत बताया गया।
जरूरत इतनी तत्काल थी तो समय महीनेभर का क्यों?
और समय महीनेभर का था तो ज्यादा विक्रेताओं के लिए दरवाजा खोलने में परेशानी क्या थी?
‘तत्काल’ लिख देने से निर्णय का औचित्य पैदा नहीं हो जाता। उसका आधार फाइल में होना चाहिए। उसी रिपोर्ट में अनुमोदित अतिरिक्त शर्तों के भीतर Limited Tender की स्पष्ट स्वीकृति दिखाई नहीं देने की बात है। संभव है मंजूरी किसी अलग नोटशीट में हो— तो विभाग उसे सामने रखे
जनता से पारदर्शिता का भरोसा माँगने वाला विभाग अपनी मंजूरी के दस्तावेज दिखाने में संकोच क्यों करे?
अब साझा समाचार का दावा है कि पहले पाँचों प्रतिभागियों को अयोग्य घोषित किया गया और फिर पूरी बेडशीट निविदा निरस्त कर दी गई।
वाह! पहले प्रतिस्पर्धा का दायरा सीमित, फिर सभी प्रतिभागी बाहर और अंत में पूरी प्रक्रिया बंद—लेकिन कारणों का हिसाब कहाँ है?
यदि यह विवरण सही है, तो विभाग प्रत्येक प्रतिभागी की अयोग्यता का कारण बताए। मूल्यांकन समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करे। यह स्पष्ट करे कि समस्या प्रस्तुत दस्तावेजों में थी, निविदा की शर्तों में थी या कोई अन्य कारण था। निरस्तीकरण सुधार का कदम हो सकता है; उसे सवालों की कब्र नहीं बनाया जा सकता।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क ने 150 मेटल बेड की लगभग ₹8.25 लाख की अलग प्रस्तावित खरीदी में भी यही बुनियादी सवाल उठाया था—सामान्य बाजार में उपलब्ध सामग्री के लिए Limited Tender क्यों? कितने विक्रेताओं को अवसर मिला? निर्णय की लिखित वजह क्या थी? हमारी रिपोर्ट की उपलब्धि यही है कि खरीद की शर्तें जनता की निगाह में आईं और विभाग से उनका औचित्य पूछा गया।
बेडशीट निविदा का निरस्तीकरण केवल ग्राम यात्रा की खबर से हुआ, इसकी पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। लेकिन हमारी उठाई माँग स्पष्ट है—खरीद की प्रक्रिया पर सवाल आएँ तो जवाब दस्तावेजों में मिले, उपलब्धियों के शोर में नहीं।जो इस फैसले का श्रेय लेना चाहते हैं, वे अपने हस्तक्षेप का रिकॉर्ड रखें। विभाग भी निर्णय का रिकॉर्ड रखे। जनता को समझने दें कि किसने क्या उठाया और किस वजह से क्या बदला।
सरकारी पैसा किसी की निजी सुविधा का बजट नहीं है। शर्तें बनाने वाले, मंजूरी देने वाले और मूल्यांकन करने वाले—हर स्तर के फैसले का हिसाब होना चाहिए। टेंडर निरस्त होने की खबर आई है। अब विभाग की सफाई नहीं, कारणयुक्त जवाब और दस्तावेज आने चाहिए। ग्राम यात्रा की पड़ताल जारी है।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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