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जेल की सलाखों से ₹990 करोड़ के कारोबार तक—इंद्रमणि की रफ्तार थमी नहीं; तीवरता के भारी वाहन किस कोयला गलियारे में दौड़ रहे?

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सुनील कुमार अग्रवाल और अशोक कुमार धुलयानी के कारोबारी नेटवर्क की फोरेंसिक जांच की मांग—कंपनियां अलग, वाहन अलग; क्या कोयला कारोबार में कोई छिपा आर्थिक पुल भी है?

 

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गिरफ्तारी और करीब 22 माह की न्यायिक हिरासत के बाद भी इंद्रमणि समूह की आय में उछाल; दूसरी ओर तीवरता का नया लॉजिस्टिक्स विस्तार—DO, RFID, FASTag और बैंक ट्रेल खोलेंगे असली तस्वीर

 

कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क एक ओर छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित कोयला-लेवी प्रकरण में गिरफ्तार किए गए सुनील कुमार अग्रवाल और उनका इंद्रमणि समूह। दूसरी ओर कोयला beneficiation, trading, logistics तथा भारी वाहनों के कारोबार से जुड़ा अशोक कुमार धुलयानी का तीवरता समूह।

कंपनियां अलग। निदेशक अलग। कारोबारी पहचान अलग

लेकिन गेवरा–दीपका–कुसमुंडा के विशाल कोयला गलियारे में अब एक ऐसा सवाल उठ रहा है जिसे कंपनियों के चमकदार टर्नओवर, नए वाहनों की कतार और कॉरपोरेट वेबसाइटों की भाषा से दबाया नहीं जा सकता—

इन दोनों कारोबारी नेटवर्कों ने SECL की खदानों से कितना कोयला उठाया, कितने वाहनों पर वास्तविक आर्थिक नियंत्रण रखा और क्या इनके खरीदारों, ट्रांसपोर्टरों अथवा सहयोगी फर्मों के बीच कोई छिपी कारोबारी कड़ी मौजूद है?»

अभी उपलब्ध सार्वजनिक दस्तावेज दोनों को अलग कारोबारी समूह बताते हैं। किसी साझा स्वामित्व या अवैध साझेदारी का प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए दोनों को एक अवैध गठजोड़ घोषित करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा। लेकिन जब राष्ट्रीय संपत्ति से जुड़े कारोबार में सैकड़ों करोड़ रुपये, भारी वाहन, वाशरियां, निजी साइडिंग, अलग-अलग खरीदार और अनेक परिवहन इकाइयां सक्रिय हों, तब जांच केवल कंपनी के बोर्ड पर लिखे नाम तक सीमित नहीं रह सकती। जांच को यह देखना होगा कि पैसा किसका है, नियंत्रण किसका है और अंतिम लाभ किसकी तिजोरी तक पहुंचता है।

कोयला-लेवी प्रकरण में गिरफ्तारी—लगभग 22 माह हिरासत में रहे सुनील अग्रवाल।  सुनील कुमार अग्रवाल का नाम छत्तीसगढ़ के चर्चित कथित कोयला-लेवी तथा मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में सामने आया था। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें 13 अक्टूबर 2022 को गिरफ्तार किया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश में उनकी गिरफ्तारी की यह तारीख दर्ज है।

वे लगभग 22 महीने न्यायिक हिरासत में रहे। अगस्त 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें नियमित जमानत प्रदान की । यह स्पष्ट रहना चाहिए कि गिरफ्तारी दोषसिद्धि नहीं होती और जमानत भी दोषमुक्ति का प्रमाण नहीं होती। आरोपों का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय को करना है।

लेकिन इस कानूनी लड़ाई के समानांतर इंद्रमणि समूह की कारोबारी गाड़ी जिस रफ्तार से दौड़ती दिखाई देती है, वह जांच एजेंसियों और SECL प्रबंधन के सामने एक अलग प्रश्न खड़ा करती है—

«सलाखों के पीछे प्रमोटर था, लेकिन लगभग हजार करोड़ रुपये के कारोबार का पहिया किस नियंत्रण-कक्ष से घूमता रहा?»

 

कार्रवाई हुई, जेल हुई—फिर कारोबार ₹990 करोड़ के करीब कैसे पहुंचा?

 

अक्टूबर 2025 की Infomerics रेटिंग रिपोर्ट के अनुसार इंद्रमणि समूह की संयुक्त परिचालन आय वित्त वर्ष 2023–24 में लगभग ₹915.98 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2024–25 में बढ़कर लगभग ₹989.97 करोड़ हो गई। रिपोर्ट में कथित मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण के न्यायालय में लंबित होने का उल्लेख करते हुए यह भी कहा गया कि समूह के संचालन पर कोई भौतिक प्रभाव नहीं पड़ा। समूह को coal trading, beneficiation, logistics और निजी railway siding जैसी गतिविधियों से जुड़ा बताया गया है। “Infomerics की अक्टूबर 2025 रिपोर्ट” (https://infomericstorage.blob.core.windows.net/uploads/pr_bhatia_energy_7oct25_59d86e1750.pdf)

किसी कंपनी का बढ़ना अपराध नहीं है। जमानत पर बाहर आए व्यक्ति का वैधानिक कारोबार करना भी अपराध नहीं है। लेकिन गंभीर जांच और लंबी न्यायिक हिरासत के बावजूद कारोबार का लगभग ₹990 करोड़ तक पहुंचना यह पूछने के लिए पर्याप्त है—

– गिरफ्तारी के दौरान समूह की कमान किसने संभाली?
– समूह की ओर से SECL से कोयला उठाव किसने नियंत्रित किया?
– पुराने खरीदार, transporter और vehicle contracts किसके निर्देश पर चलते रहे?
– क्या कोई अनुबंध दूसरी कंपनियों अथवा सहयोगी फर्मों के नाम स्थानांतरित हुआ?
– क्या समूह से जुड़े वाहनों का स्वामित्व, वित्तपोषण अथवा संचालन दूसरे व्यक्तियों के नाम दर्ज किया गया?
– समूह की वास्तविक beneficial ownership और related-party transactions की जांच किस एजेंसी ने की?
– क्या पुराने नेटवर्क की कारोबारी नसें गिरफ्तारी के बाद भी जस की तस सक्रिय रहीं?

«क्या कानून ने व्यक्ति को पकड़ा, लेकिन उसके चारों ओर फैले आर्थिक जाल की नसों तक पहुंचने से पहले जांच की धार कुंद पड़ गई?»

₹917 करोड़ की आय और ₹70 करोड़ लाभ—आर्थिक ताकत की पुरानी नींव जून 2025 की Infomerics रिपोर्ट में इंद्रमणि मिनरल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की वित्त वर्ष 2022–23 की परिचालन आय लगभग ₹917.49 करोड़ और कर-पश्चात लाभ करीब ₹70.14 करोड़ दर्ज है। कंपनी का कारोबार coal trading, beneficiation और logistics support से जुड़ा बताया गया है। “Infomerics की जून 2025 रिपोर्ट” (https://infomericstorage.blob.core.windows.net/uploads/Pr_Indermani_Mineral_3june25_5531fb9b25.pdf)

इतने बड़े आर्थिक आकार के सामने यह जांच जरूरी है कि समूह का परिवहन ढांचा केवल उन्हीं वाहनों तक सीमित है जो सीधे कंपनी के नाम दर्ज हैं अथवा अन्य व्यक्तियों और छोटी फर्मों के नाम वाले वाहन भी किसी दीर्घकालिक अनुबंध, वित्तपोषण अथवा केंद्रीय नियंत्रण के अधीन चलते हैं।

RC पर लिखा नाम पूरी कहानी नहीं बताता। असली आर्थिक स्वामी इन अभिलेखों से सामने आएगा

– वाहन की EMI किस खाते से जमा हुई;
– FASTag recharge कौन करता है;
– diesel card किस कंपनी का है;
– GPS का master login किस कार्यालय में है;
– चालक का वेतन किस खाते से आता है;
– insurance और fitness का खर्च कौन उठाता है;
– freight payment किसके बैंक खाते में पहुंचता है;
– वाहन लगातार किस खरीदार के DO पर चलता है।

«कोयले की दुनिया में ट्रक का मालिक वह नहीं भी हो सकता, जिसका नाम RC पर चमक रहा हो; असली मालिक वह हो सकता है जो उसकी किस्त, डीजल, दिशा और कमाई—चारों नियंत्रित करता हो।»

अब दूसरी धुरी—अशोक कुमार धुलयानी का तीवरता समूह

स्थानीय चर्चाओं में कई बार “अशोक तीवरता” कहा जाने वाला नाम कॉरपोरेट रिकॉर्ड में अशोक कुमार धुलयानी के रूप में मिलता है। “तीवरता” व्यक्ति का उपनाम नहीं, बल्कि उनसे संबंधित कारोबारी समूह और कंपनी का नाम है।  अशोक कुमार धुलयानी Tiwarta Coal Beneficiation Limited के निदेशक बताए गए हैं। कंपनी के सार्वजनिक विवरण में चंद्रमा देवी, राजकुमार धुलयानी और रवि धुलयानी के नाम भी निदेशकों के रूप में सामने आते हैं।

समूह स्वयं को इन गतिविधियों से जोड़ता है

– coal beneficiation;
– coal handling एवं trading;
– logistics और liaisoning;
– भारी मशीनरी तथा वाहन सेवाएं;
– washery संचालन।

समूह की वेबसाइट में लिम्हा–बेलतरा क्षेत्र में लगभग 0.96 MTPA wet washery का उल्लेख मिलता है। मई 2024 में Tiwarta Coal and Logistics Limited नाम से एक अलग कंपनी बनाए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक कॉरपोरेट रिकॉर्ड में मिलती है। “तीवरता समूह की वेबसाइट” (https://tcbl.in/), “कॉरपोरेट विवरण” (https://www.zaubacorp.com/TIWARTA-COAL-BENEFICIATION-LIMITED-U10300CT2015PLC001845)

नई logistics company, washery और भारी वाहनों का विस्तार अपने-आप किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि इस विस्तारित कारोबारी ढांचे का SECL की गेवरा, दीपका और कुसमुंडा खदानों से वास्तविक संबंध कितना है?

तीवरता के भारी वाहन आखिर किसके DO का कोयला ढो रहे हैं?

तीवरता समूह को 30 भारी tip trailers दिए जाने का सार्वजनिक व्यावसायिक उल्लेख समूह के logistics विस्तार की ओर संकेत करता है।

अब समूह से सीधा जवाब मांगा जाना चाहिए

– 30 नए tip trailers किन work orders में लगाए गए?
– इनके registration number क्या हैं?
– वाहन किन SECL खदानों में RFID registered हैं?
– किस buyer के DO पर कोयला उठाते हैं?
– माल सीधे अंतिम उद्योग पहुंचता है या पहले washery, depot अथवा siding जाता है?
– इन वाहनों का GPS control room कहां है?
– इनके FASTag, diesel और freight payments किस खाते से संचालित होते हैं?
– गेवरा–दीपका–कुसमुंडा से समूह ने पिछले तीन वर्षों में कितना परिवहन किया?

«नई कंपनी, नए ट्रेलर और नई कारोबारी रफ्तार—लेकिन कोयले का स्रोत, खरीदार और अंतिम मंजिल सार्वजनिक रिकॉर्ड में धुंधली क्यों रहे?»

यदि सभी वाहन वैध work orders और अधिकृत DO के अनुसार चल रहे हैं, तो RFID, GPS और weighbridge records समूह को निर्दोष सिद्ध कर देंगे। यदि वाहन किसी अन्य buyer के नाम पर निकलने वाले कोयले को लगातार एक ही निजी केंद्र तक पहुंचाते मिले, तो जांच को नामों की परत के नीचे उतरना होगा।

इंद्रमणि बनाम तीवरता—प्रतिद्वंद्वी, कारोबारी सहयोगी या पूरी तरह अलग रास्ते?

अभी तक उपलब्ध दस्तावेजों से इंद्रमणि और तीवरता समूह के बीच कोई अवैध साझेदारी सिद्ध नहीं होती। दोनों के निदेशक अलग हैं और प्रत्यक्ष साझा स्वामित्व का प्रमाण उपलब्ध नहीं है। लेकिन जांच का उद्देश्य आरोप गढ़ना नहीं, संदेह का वैज्ञानिक परीक्षण करना होना चाहिए।

दोनों समूहों की वास्तविक कारोबारी दूरी इन दस्तावेजों से तय होगी

– खरीद और बिक्री ledger;
– GST e-invoice तथा e-way bill;
– transporter ID;
– vehicle-wise DO history;
– مشترक अथवा बार-बार दोहराए गए वाहन;
– driver और mobile-number mapping;
– FASTag issuing account;
– GPS master login;
– diesel-card billing;
– unsecured loans और advances;
– एक-दूसरे को किए गए freight अथवा material payments;
– washery inward–outward registers;
– संबंधित खरीदारों की beneficial ownership;
– EMD और security deposit का वित्तीय स्रोत।

यदि दोनों समूहों के बीच कोई संबंध नहीं है, तो स्वतंत्र forensic audit उस दूरी पर सरकारी मुहर लगा देगा। लेकिन यदि कंपनियों के बोर्ड अलग होने के बावजूद वाहन, भुगतान, खरीदार, कर्मचारी, GPS अथवा माल की अंतिम मंजिल एक ही आर्थिक केंद्र से जुड़ी मिली, तो कोयले की धूल में दबा नियंत्रण-कक्ष स्वयं सामने आ जाएगा।

जेल के दौरान इंद्रमणि का नियंत्रण किसके पास और उसी अवधि में तीवरता का विस्तार कितना?

इस जांच का सबसे महत्वपूर्ण कालखंड अक्टूबर 2022 से अगस्त 2024 के बीच का है—जब सुनील कुमार अग्रवाल न्यायिक हिरासत में थे।

इस अवधि का month-wise audit किया जाना चाहिए

– इंद्रमणि समूह ने कितना कोयला खरीदा और बेचा;
– SECL से कितनी मात्रा उठाई;
– कौन-कौन से buyers और transporters सक्रिय रहे;
– प्रमुख भुगतान किसने अधिकृत किए;
– किन व्यक्तियों के DSC और login से tender अथवा lifting प्रक्रिया संचालित हुई;
– कितने नए वाहन जोड़े या हटाए गए;
– कितने contracts दूसरी इकाइयों को दिए गए;
– तीवरता समूह अथवा उससे संबंधित कंपनियों का उसी अवधि में कितना विस्तार हुआ;
– क्या दोनों समूहों के बीच कोई invoice, freight payment, advance अथवा coal movement दर्ज हुआ?

«जब कारोबारी साम्राज्य का घोषित चेहरा जेल में था, तब लगभग हजार करोड़ की मशीनरी किसकी उंगलियों से चल रही थी—यही जांच का असली केंद्र होना चाहिए।»

SECL पांच वर्षों का buyer–vehicle forensic audit कराए SECL केवल कंपनीवार उठाव की कुल मात्रा जारी करके जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकता। जांच खरीदार से वाहन और वाहन से अंतिम गंतव्य तक होनी चाहिए।

इंद्रमणि और तीवरता समूह तथा उनसे संबंधित कंपनियों के लिए पांच वर्षों का audit किया जाए:

1. buyer-wise DO और quantity;
2. DO creation तथा modification history;
3. vehicle-wise RFID entry;
4. GPS route और geofence violation;
5. FASTag plaza history;
6. source weighbridge का raw data;
7. destination weighment;
8. washery inward–outward register;
9. GST invoice और e-way bill;
10. freight तथा diesel payment;
11. vehicle financier और EMI account;
12. director, shareholder और beneficial-owner mapping;
13. related-party transactions;
14. shared mobile, e-mail और IP address;
15. अंतिम उपभोक्ता तथा वास्तविक माल-प्राप्तकर्ता।

जांच की घोषणा से पहले immutable backup लिया जाए, क्योंकि digital records में परिवर्तन या retention period समाप्त होने से महत्वपूर्ण निशान नष्ट हो सकते हैं।

सुनील कुमार अग्रवाल से सीधे सवाल

1. न्यायिक हिरासत के लगभग 22 महीनों में इंद्रमणि समूह का दैनिक संचालन किसने संभाला?
2. उस अवधि में SECL से समूह अथवा संबंधित buyers ने कितना कोयला उठाया?
3. समूह के स्वामित्व, वित्तपोषण या स्थायी नियंत्रण में कुल कितने वाहन हैं?
4. क्या दूसरे व्यक्तियों के नाम registered वाहन इंद्रमणि के लिए स्थायी रूप से चलते हैं?
5. क्या अशोक कुमार धुलयानी या तीवरता समूह के साथ कोई coal purchase, sale, transport, washery अथवा financial transaction हुआ?
6. क्या समूह buyer-wise, vehicle-wise और bank-trail audit के लिए सहमत है?
7. गिरफ्तारी के बाद कौन-से contracts, vehicles अथवा operational rights दूसरी entities को हस्तांतरित किए गए?
8. लगभग ₹990 करोड़ की संयुक्त आय में SECL-origin coal का हिस्सा कितना है?

अशोक कुमार धुलयानी से सीधे सवाल

1. तीवरता समूह के अपने और contract पर चलने वाले वाहनों की कुल संख्या क्या है?
2. 30 नए tip trailers किन contracts और खदानों में लगाए गए?
3. गेवरा, दीपका तथा कुसमुंडा से पिछले तीन वर्षों में समूह ने कितना कोयला परिवहन किया?
4. समूह की washery में किन buyers और कंपनियों का कोयला आया?
5. क्या इंद्रमणि समूह अथवा उससे संबंधित buyers के लिए परिवहन, beneficiation या logistics सेवा दी गई?
6. क्या समूह अपने vehicles के RFID, GPS, FASTag और freight-payment records स्वतंत्र जांच के लिए उपलब्ध कराएगा?
7. Tiwarta Coal and Logistics Limited बनाने की कारोबारी आवश्यकता क्या थी?
8. दोनों कंपनियों के बीच assets, vehicles, employees और contracts का विभाजन किस प्रकार है?

कारोबार अपराध नहीं—लेकिन हजार करोड़ के कारोबार को जांच से छूट भी नहीं। इंद्रमणि समूह का लगभग ₹990 करोड़ का कारोबार किसी अपराध का प्रमाण नहीं। तीवरता समूह की washery, नई logistics company अथवा भारी वाहन खरीदना भी अपराध नहीं।

लेकिन सवाल तब जहरीला हो जाता है जब एक तरफ गंभीर कोयला-लेवी प्रकरण, गिरफ्तारी और करीब 22 महीने की न्यायिक हिरासत दिखाई देती है और दूसरी तरफ कारोबार की आर्थिक धमनियां पहले से अधिक ताकतवर नजर आती हैं। दूसरी ओर तीवरता समूह का फैलता beneficiation और logistics ढांचा पूछता है कि उसके वाहनों, खरीदारों और कोयले की वास्तविक यात्रा कितनी पारदर्शी है।

«सफेद बैलेंस शीट अपने-आप कोयले की काली जमीन पर उठने वाले सवालों को साफ नहीं कर देती।»

«कंपनी का बोर्ड अलग हो सकता है, ट्रक की RC अलग हो सकती है और खरीदार का GST नंबर अलग हो सकता है—लेकिन यदि EMI, FASTag, GPS, डीजल और मालभाड़े का अंतिम नियंत्रण एक निकला, तो अलग-अलग नामों का पूरा किला कागजी मुखौटा साबित हो सकता है।»

ग्राम यात्रा की मांग

केंद्रीय कोयला मंत्रालय, Coal India, SECL Vigilance, CVC, प्रवर्तन निदेशालय और आयकर विभाग संयुक्त रूप से दोनों कारोबारी समूहों की वैधानिक सीमाओं के भीतर निम्न बिंदुओं पर जांच करें—

– SECL-origin coal की कुल मात्रा;
– buyer और vehicle mapping;
– वास्तविक beneficial ownership;
– वाहनों का वित्तपोषण;
– washery तथा depot movement;
– समूहों के बीच प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष transactions;
– गिरफ्तारी अवधि में इंद्रमणि समूह का operational control;
– तीवरता समूह के logistics expansion का वास्तविक contract base।

यदि कारोबार पूर्णतः वैधानिक है तो audit दोनों समूहों की प्रतिष्ठा पर उठते संदेह समाप्त करेगा।  लेकिन यदि अलग नामों, छोटी फर्मों और वाहन मालिकों की परतों के नीचे भुगतान और नियंत्रण का एक ही केंद्र मिला, तो यह केवल व्यापार का विस्तार नहीं होगा—यह राष्ट्रीय कोयले के चारों ओर खड़े उस कथित समानांतर आर्थिक साम्राज्य का नक्शा होगा, जिसकी दीवारें कंपनियों के नाम से और नींव सरकारी खदानों से बनी हैं।

जल्द बड़ा खुलासा

इंद्रमणि और तीवरता से जुड़े वाहन किसके नाम—EMI कौन भरता है, GPS कौन नियंत्रित करता है और मालभाड़ा किस खाते में पहुंचता है?

चेहरे दो हैं। समूह दो हैं। कंपनियों के बोर्ड भी अलग हैं।  अब जांच यह बताए कि इनके कारोबारी रास्ते वास्तव में अलग हैं—या कोयले की काली सुरंग में कहीं जाकर एक-दूसरे से मिलते हैं।

पड़ताल जारी है…

 

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

 

कानूनी एवं संपादकीय टिप्पणी

समाचार में उल्लिखित छिपे वाहन नियंत्रण, साझा आर्थिक हित तथा दोनों समूहों के संभावित कारोबारी संबंध जांच योग्य प्रश्न हैं; इन्हें प्रमाणित अपराध अथवा अवैध साझेदारी के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। सुनील कुमार अग्रवाल के विरुद्ध आरोप विचाराधीन हैं और जमानत को दोषमुक्ति अथवा दोषसिद्धि नहीं माना गया है। इंद्रमणि समूह का कारोबार, तीवरता समूह का विस्तार तथा दोनों के बीच सामान्य वैधानिक कारोबारी व्यवहार अपने-आप अपराध का प्रमाण नहीं है। संबंधित पक्षों का दस्तावेजी उत्तर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा तथा प्रमाणित तथ्यात्मक त्रुटि का तत्काल सुधार किया जाएगा।

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