कोरबा कोल माइंस की कोयला पटरी पर कथित ‘रैक रिश्वत’—कार्रवाई होगी या काली कमाई फिर फाइलों में दफन?

हर रैक पर ₹3,500 से ₹7,500 तक कथित वसूली का आरोप; पैसा नहीं दिया तो खराब गुणवत्ता का कोयला—साइडिंग प्रभारी से जीएम तक किसकी जेब हुई गर्म?
गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, मानिकपुर और जुनाडीह की हर रैक का हिसाब खोलिए; आरोप सही मिले तो निलंबन, संपत्ति जांच, एफआईआर और गिरफ्तारी कब?
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क कोयला राष्ट्र का। खदानें सरकारी। रेलवे साइडिंग सरकारी। मशीन, कांटा, कैमरा, गुणवत्ता प्रयोगशाला और अधिकारी भी सरकारी।
फिर प्रत्येक रैक पर कथित निजी कीमत किसने लगा दी?
कोरबा की खदानों से सामने आए आरोप यदि जांच में सही पाए गए तो यह सामान्य लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी संसाधन और औद्योगिक उत्पादन की नसों पर बैठा एक संगठित कथित वसूली तंत्र होगा। सूत्रों का आरोप है कि रैक लोडिंग के दौरान साइडिंग प्रभारी के नाम ₹2,000 से ₹5,000 और तकनीकी निरीक्षक के नाम ₹1,500 से ₹2,500 तक कथित रकम मांगी जाती है। दावा है कि भुगतान से इनकार करने पर खराब गुणवत्ता, पत्थर-मिश्रित अथवा निर्धारित ग्रेड से कमजोर कोयला लोड कर नुकसान पहुंचाने का दबाव बनाया जाता है।
आरोप अभी प्रमाणित नहीं हैं। मगर यदि शिकायत स्पष्ट है, रकम स्पष्ट है, साइडिंग स्पष्ट हैं और जांच योग्य रिकॉर्ड मौजूद हैं—तो कार्रवाई अब तक अस्पष्ट क्यों है?
पैसे दो तो अच्छा कोयला, इनकार करो तो रैक में ‘काला बदला’?
यदि गुणवत्ता वास्तव में कथित भुगतान के आधार पर बदली जा रही है, तो कोयला जांच और तकनीकी निरीक्षण की पूरी व्यवस्था सवालों के कटघरे में है।
क्या कोयले का ग्रेड प्रयोगशाला तय करती है या कथित रिश्वत?
क्या रैक नियमों से लोड होती है या साइडिंग पर खड़ी अदृश्य “वसूली पर्ची” से?
क्या तकनीकी निरीक्षक गुणवत्ता की निगरानी कर रहे हैं या गुणवत्ता को डर और दबाव का हथियार बनाया गया है?
यदि पैसा नहीं देने पर खराब कोयला लोड किया गया, तो संबंधित अधिकारी पर केवल स्थानांतरण नहीं—भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के पहलुओं से जांच होनी चाहिए।
साइडिंग प्रभारी से जीएम तक कथित हिस्सेदारी—छोटी मछली पकड़कर मगरमच्छ बचाने की तैयारी तो नहीं?
सूत्रों का सबसे विस्फोटक आरोप है कि कथित वसूली की रकम साइडिंग स्तर पर नहीं रुकती, बल्कि उसका हिस्सा ऊपर तक पहुंचता है। यह आरोप सही है या झूठा—निर्णय फोन, बैंक और संपत्ति के रिकॉर्ड करेंगे। यदि जांच केवल किसी मजदूर, ऑपरेटर या कनिष्ठ कर्मचारी तक सीमित रखी गई तो वह कार्रवाई नहीं, कथित बड़े चेहरों को बचाने की प्रशासनिक ढाल मानी जाएगी।
जांच को यह पता लगाना होगा—
रकम किसने मांगी?
किसने एकत्र की?
भुगतान नकद हुआ या डिजिटल?
किस अधिकारी अथवा मध्यस्थ तक पहुंचा?
बदले में किस रैक को बेहतर गुणवत्ता या प्राथमिकता मिली?
किन अधिकारियों की संपत्ति और खर्च उनकी ज्ञात आय से मेल नहीं खाते?
शिकायतों के बाद किसने फाइल दबाई?
और किसके संरक्षण में व्यवस्था चलती रही?
काली कमाई की सीढ़ी नीचे से ऊपर जाती है तो कार्रवाई भी ऊपर से नीचे तक होनी चाहिए। जुनाडीह की पटरी पर सबसे ज्यादा ‘खेल’ का आरोप सूत्रों ने गेवरा क्षेत्र की जुनाडीह साइडिंग में कथित मनमानी और वसूली को सबसे गंभीर बताया है। SECL बताए कि पिछले तीन वर्षों में जुनाडीह से कितने रैक निकले, कितनी गुणवत्ता शिकायतें आईं और कितने अधिकारियों पर कार्रवाई हुई।
यदि शिकायतें शून्य हैं तो क्या व्यवस्था वास्तव में बेदाग थी—या शिकायत करने वाले उद्योगों और कर्मचारियों को परिणाम भुगतने का डर था?
जुनाडीह सहित प्रत्येक साइडिंग का रैकवार मिलान होना चाहिए— लोडिंग ग्रेड → खदान नमूना → वैगन वजन → गंतव्य नमूना → अंतिम GCV इन पांच रिकॉर्ड में अंतर मिला तो कोयले की कालिख सीधे जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यालय तक पहुंचेगी। ₹90 लाख प्रतिमाह का अनुमान—सच्चाई FOIS बताएगा सूत्रों ने कोरबा क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 100 रैक निकलने और औसतन ₹3,000 प्रति रैक कथित रकम के आधार पर ₹90 लाख प्रतिमाह का अनुमान प्रस्तुत किया है।
यह आधिकारिक आंकड़ा अथवा प्रमाणित वसूली नहीं, बल्कि सूत्रीय गणना है। इसे रेलवे के FOIS और SECL के वास्तविक डिस्पैच रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना आवश्यक है। लेकिन यहां गणना में एक दूसरा गंभीर प्रश्न भी है। सूत्रों द्वारा बताई गई दोनों कथित रकम जोड़ने पर प्रति रैक संभावित दायरा ₹3,500 से ₹7,500 बनता है। यदि किसी जांच अवधि में रैक की वास्तविक संख्या और कथित भुगतान सिद्ध होता है तो रकम सूत्रों के ₹90 लाख वाले अनुमान से अलग भी निकल सकती है।
इसीलिए हवा में अंक उछालने के बजाय हर रैक और हर भुगतान का फोरेंसिक मिलान जरूरी है। RKTC, DB Power, RKM और SKS के रैक भी जांच के दायरे में आएं
सूत्रीय सूचना में RKTC, DB Power, RKM और SKS से जुड़े रैक का उल्लेख किया गया है। केवल नाम आना किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन जांच में इनसे संबंधित रैक की संख्या, घोषित ग्रेड, स्रोत साइडिंग, गंतव्य पर प्राप्त GCV और गुणवत्ता शिकायतों का मिलान होना चाहिए।
संबंधित कंपनियों से पूछा जाए—
क्या उनसे अथवा उनके प्रतिनिधियों से कोई अनधिकृत राशि मांगी गई?
क्या भुगतान से इनकार के बाद गुणवत्ता या लोडिंग प्रभावित हुई?
क्या उन्होंने SECL को लिखित शिकायत दी?
यदि शिकायत नहीं की तो क्यों?
उनके रैक में स्रोत और गंतव्य की गुणवत्ता कितनी अलग मिली?
यदि कंपनियां पीड़ित हैं तो उन्हें प्रमाण देना चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो रिकॉर्ड उनका नाम साफ कर देगा। वीडियो गतिविधि दिखाते हैं, रिश्वत नहीं—असली जहर रिकॉर्ड में छिपा है प्राप्त वीडियो में रेलवे वैगनों में कोयले की लोडिंग और मशीनों से कोयले की हैंडलिंग दिखाई देती है। ये दृश्य संबंधित परिचालन गतिविधियां दिखाते हैं, लेकिन अपने आप रिश्वत अथवा गुणवत्ता में हेरफेर प्रमाणित नहीं करते।
कथित खेल का सच इन रिकॉर्ड से निकलेगा—
FOIS और रैक प्लेसमेंट रिकॉर्ड;
CCTV का मूल फुटेज;
साइडिंग लॉगबुक;
खदान एवं गंतव्य की गुणवत्ता रिपोर्ट;
नमूना सील और प्रयोगशाला रजिस्टर;
अधिकारियों एवं मध्यस्थों के कॉल रिकॉर्ड;
संदिग्ध बैंक, यूपीआई और नकद लेन-देन;
संपत्ति घोषणाएं;
तथा शिकायतों पर की गई विभागीय कार्रवाई।
क्या कार्रवाई हो सकती है?
यदि प्रारंभिक जांच में आरोपों के समर्थन में सामग्री मिलती है तो सक्षम प्रबंधन और एजेंसियां कानून एवं सेवा नियमों के अनुसार ये कदम उठा सकती हैं—
1. संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील पदों से तत्काल अलग करना।
2. विभागीय सतर्कता जांच और स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट।
3. CCTV, मोबाइल, लॉगबुक और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त एवं सुरक्षित करना।
4. रैकवार गुणवत्ता और गंतव्य GCV का फोरेंसिक मिलान।
5. संदिग्ध लेन-देन तथा आय से अधिक संपत्ति की जांच।
6. भ्रष्टाचार या आपराधिक षड्यंत्र के प्रथमदृष्टया संकेत मिलने पर एफआईआर।
7. रिश्वत लेते पकड़े जाने अथवा पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर निलंबन और गिरफ्तारी।
8. कंपनियों को हुए नुकसान तथा घटिया कोयले की आर्थिक वसूली।
9. मिलीभगत सिद्ध होने पर ठेकेदार अथवा संबंधित फर्म को प्रतिबंधित करना।
10. वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका मिलने पर मामला CVC, CBI अथवा अन्य सक्षम एजेंसी को भेजना।
किसी की गिरफ्तारी केवल समाचार की मांग पर नहीं हो सकती। उसके लिए प्राथमिकी, साक्ष्य और विधिसम्मत जांच आवश्यक होगी। लेकिन साक्ष्य सामने होने के बाद फाइल दबाना भी जवाबदेही से बचने का रास्ता नहीं बन सकता।
SECL मुख्यालय से सीधे सवाल
क्या गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, मानिकपुर और जुनाडीह की अचानक संयुक्त जांच होगी?
क्या आरोपित अवधि के CCTV एवं डिजिटल लॉग तत्काल सुरक्षित किए गए?
क्या साइडिंग प्रभारी और तकनीकी निरीक्षकों को जांच पूरी होने तक हटाया जाएगा?
क्या गंतव्य संयंत्रों से स्वतंत्र गुणवत्ता रिपोर्ट मंगाई जाएगी?
क्या संबंधित अधिकारियों की संपत्ति और बैंक लेन-देन की जांच होगी?
क्या शिकायतकर्ताओं को संरक्षण मिलेगा?
यदि हर रैक का हिसाब साफ है तो स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट से डर किस बात का है?
कार्रवाई या लीपापोती—अब दोनों का रिकॉर्ड बनेगा
कोरबा की धरती राष्ट्र को ऊर्जा देती है। लेकिन आरोप है कि इसी धरती की कोख से निकलने वाले प्रत्येक रैक पर कुछ लोगों ने कथित कमाई का अदृश्य मीटर लगा दिया है।
जांच हुई तो हर रैक बोलेगी।
कांटा पर्ची बोलेगी।
गुणवत्ता रिपोर्ट बोलेगी।
CCTV बोलेगा।
फोन और बैंक खाते बोलेंगे।
और यदि जांच नहीं हुई तो प्रशासन की चुप्पी स्वयं पूछेगी—क्या काली कमाई की जड़ें इतनी ऊंची कुर्सियों तक पहुंच चुकी हैं कि कार्रवाई करने वाले हाथ भी बंध गए?
अब किसी कनिष्ठ कर्मचारी को हटाकर प्रकरण दफन नहीं होना चाहिए। रकम ऊपर तक गई है तो जांच भी ऊपर तक जाए। संरक्षण मिला है तो संरक्षणदाता का नाम खुले। भ्रष्टाचार सिद्ध हो तो पद, प्रभाव और पहचान देखे बिना एफआईआर, निलंबन, संपत्ति जांच और गिरफ्तारी हो। कोयला काला हो सकता है, लेकिन उसका हिसाब काली तिजोरियों में बंद नहीं रहने दिया जा सकता।
जल्द खुलेगा रैक लोडिंग के ‘काले खेल’ का राज!
साइडिंग प्रभारी से लेकर कथित संरक्षणदाताओं तक—हर जिम्मेदार ओहदेदार की पहचान और भूमिका का होगा दस्तावेजी खुलासा
किसने रकम मांगी, किसने वसूली, किसने हिस्सा पहुंचाया और किसने संरक्षण दिया? कॉल रिकॉर्ड, CCTV, FOIS डेटा, गुणवत्ता रिपोर्ट, बैंक लेन-देन और संपत्तियों के दस्तावेजों के साथ ग्राम यात्रा खोलेगा कथित सिंडिकेट की परत-दर-परत कहानी।
अगले खुलासे में
गेवरा, दीपका, कुसमुंडा, मानिकपुर और जुनाडीह के जिम्मेदार अधिकारियों की पदवार पहचान।
साइडिंग प्रभारी, तकनीकी निरीक्षक और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका।
किन रैक में गुणवत्ता बिगड़ी और किन्हें मिला कथित लाभ?
कथित वसूली की रकम किस सीढ़ी से ऊपर पहुंची?
कौन-से ठेकेदार, मध्यस्थ और कारोबारी रहे संपर्क में?
किस अधिकारी की संपत्ति और खर्च पर उठ रहे सवाल?
शिकायतें मिलने के बाद किसने कार्रवाई रोकी?
कथित सिंडिकेट को संरक्षण देने वाली प्रभावशाली कुर्सियां कौन-सी हैं?
नाम भी खुलेंगे, ओहदे भी सामने आएंगे—और संरक्षणदाताओं से भी पूछा जाएगा हिसाब!
यह व्यक्तिगत हमला नहीं, सार्वजनिक संपत्ति और कोयला गुणवत्ता से जुड़े आरोपों की दस्तावेजी पड़ताल है। प्रमाण मिलने पर ही किसी व्यक्ति की भूमिका प्रकाशित की जाएगी तथा संबंधित पक्ष को जवाब देने का पूरा अवसर मिलेगा।
पड़ताल जारी है… जल्द बड़ा खुलासा
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
संपादकीय टिप्पणी: प्रति रैक कथित भुगतान, खराब गुणवत्ता की लोडिंग, रकम उच्च अधिकारियों तक पहुंचने और रैक संख्या संबंधी विवरण सूत्रों से प्राप्त जांच योग्य आरोप हैं। स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि शेष है। संबंधित सभी अधिकारियों और कंपनियों का पक्ष आमंत्रित है; किसी को दोषी घोषित नहीं किया गया है।
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