दस्तावेज़ों की कब्र से निकला BALCO का ‘सरकारी मकान विध्वंस कांड’!

पुलिसकर्मियों के लिए सरकारी धन से बने 24 क्वार्टर ध्वस्त; PWD ने मार्च 2023 में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने को लिखा—फिर किस दबाव में फाइल पर जम गई खामोशी?
आरोप—कूलिंग टावर के विस्तार की भूख में थाना परिसर से शांतिनगर तक उजाड़ा गया इलाका; अब सरकार उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार BALCO प्रबंधन और संरक्षण देने वालों की भूमिका खोले
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क अपराध की दीवार कितनी भी ऊंची क्यों न खड़ी कर दी जाए, सरकारी दस्तावेज़ उसकी नींव में दबा सच एक दिन बाहर निकाल ही देते हैं। बालको थाना परिसर के पीछे पुलिसकर्मियों के लिए सरकारी धन से बनाए गए 24 आई-टाइप पारिवारिक क्वार्टरों को कथित रूप से जमींदोज किए जाने का मामला अब ऐसे ही एक पुराने दस्तावेज़ के सहारे फिर जीवित हो उठा है। लोक निर्माण विभाग, कोरबा संभाग के तत्कालीन कार्यपालन अभियंता द्वारा 14 मार्च 2023 को पत्र क्रमांक 1841/शिल्प/2023 पुलिस अधीक्षक, जिला कोरबा को भेजा गया था। पत्र का विषय ही पूरे मामले की गंभीरता खोल देता है— “बालको प्रबंधन द्वारा पुलिस विभाग हेतु निर्मित 24 नग फैमिली क्वार्टर को नष्ट करने के संबंध में।”
इस सरकारी पत्र में केवल शिकायत नहीं की गई, बल्कि बालको प्रबंधन के कृत्य पर “आपराधिक प्रकरण दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई” करने का स्पष्ट अनुरोध किया गया था। उपलब्ध प्रति पर पुलिस कार्यालय की 17 मार्च 2023 की प्राप्ति संबंधी हस्तलिखित प्रविष्टि भी दिखाई देती है। यानी मामला संबंधित कार्यालय तक पहुंचा—अब सवाल यह है कि उसके बाद फाइल कहां और किसके इशारे पर दफन कर दी गई?
₹13.90 लाख के सरकारी निर्माण पर चला कथित विध्वंस का बुलडोजर
PWD के पत्र के अनुसार, बालको थाना के पीछे वर्ष 1991-92 में 24 आई-टाइप क्वार्टर बनाए गए थे। इनमें—
12 आवास भूतल पर;
12 आवास प्रथम तल पर;
कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 831.60 वर्गमीटर;
कुल निर्माण व्यय ₹13,90,354 दर्ज है।
इन भवनों को पुलिसकर्मियों के आवास के लिए सरकारी धन से बनाया गया था। पत्र में वर्ष 1989-90 की प्रशासकीय स्वीकृति तथा ₹12,24,000 की स्वीकृत राशि का भी उल्लेख है। दस्तावेज़ का सबसे विस्फोटक हिस्सा यह है कि PWD ने लिखा—बालको प्रबंधन द्वारा आवासीय परिसर को “पूर्णतः तोड़ दिया गया।” विभाग के अनुसार इस तोड़फोड़ के लिए लोक निर्माण विभाग अथवा पुलिस प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। पत्र ने इसे अपराध और प्रशासनिक/वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में माना।
सरकारी संपत्ति क्या BALCO की निजी जागीर थी?
यदि भवन सरकारी धन से बने थे, भूमि और आवास पुलिस विभाग के उपयोग में थे तथा विधिवत अनुमति नहीं ली गई थी, तो बालको प्रबंधन को उन्हें तोड़ने का अधिकार किस आदेश, हस्तांतरण पत्र अथवा वैधानिक स्वीकृति से मिला?
क्या BALCO प्रबंधन ने मान लिया था कि उसकी औद्योगिक जरूरतों के सामने सरकारी संपत्ति, पुलिस आवास और सार्वजनिक धन की कोई कीमत नहीं?
और यदि PWD ने स्वयं आपराधिक प्रकरण दर्ज करने को कहा था, तो तीन वर्षों से अधिक समय बाद भी जनता के सामने यह स्पष्ट क्यों नहीं है कि—
FIR दर्ज हुई या नहीं?
यदि दर्ज नहीं हुई तो प्रारंभिक जांच किस स्तर पर रोकी गई?
जिम्मेदार अधिकारियों और BALCO प्रबंधन से पूछताछ क्यों नहीं हुई?
नुकसान का मूल्यांकन और वसूली क्यों नहीं की गई?
भवन ध्वस्त करने की अनुमति, स्वामित्व हस्तांतरण अथवा भूमि उपयोग परिवर्तन का आदेश कहां है?
यह चुप्पी सामान्य प्रशासनिक सुस्ती नहीं दिखाई देती; यह उस प्रभावशाली तंत्र की दुर्गंध पैदा करती है जिसमें सरकारी संपत्ति मिट जाती है, विभाग आपराधिक कार्रवाई मांगता है और फिर कार्रवाई का अता-पता ही नहीं रहता। कूलिंग टावर के लिए उजाड़ा गया पूरा इलाका? स्थानीय स्तर पर गंभीर आरोप है कि बालको-वेदांता के औद्योगिक विस्तार और कूलिंग टावर निर्माण के लिए थाना परिसर से लगे इन सरकारी भवनों के साथ शांतिनगर क्षेत्र को भी हटाया गया। उपलब्ध PWD पत्र 24 पुलिस क्वार्टरों के ध्वस्तीकरण की पुष्टि करता है, लेकिन कूलिंग टावर तथा शांतिनगर विस्थापन से उसका प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने वाले भूमि-अभिलेख, नक्शे, स्वीकृतियां और परियोजना दस्तावेज़ अभी सार्वजनिक किए जाने आवश्यक हैं।
इसीलिए सरकार को जांच में निम्न रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित करने चाहिए—
1. 24 क्वार्टरों की भूमि का मूल खसरा, नक्शा और स्वामित्व रिकॉर्ड।
2. निर्माण की प्रशासकीय, वित्तीय और तकनीकी स्वीकृतियां।
3. पुलिस विभाग को भवन सौंपे जाने तथा कब्जे से संबंधित दस्तावेज़।
4. भवनों को अनुपयोगी अथवा अपलेखित घोषित करने की कोई कार्रवाई।
5. ध्वस्तीकरण की अनुमति, निविदा, पंचनामा और मलबा निस्तारण रिकॉर्ड।
6. BALCO के कूलिंग टावर की स्वीकृत साइट-प्लान और भूमि हस्तांतरण दस्तावेज़।
7. शांतिनगर के निवासियों का सर्वे, पुनर्वास और मुआवजा रिकॉर्ड।
8. PWD के 14 मार्च 2023 के पत्र पर पुलिस द्वारा की गई संपूर्ण कार्रवाई।
9. संबंधित समय के BALCO अधिकारियों तथा जिम्मेदार शासकीय अधिकारियों की भूमिका।
दस्तावेज़ झूठ नहीं बोलते—फाइल दबाने वालों के चेहरे उजागर हों यह प्रश्न केवल तीन दशक पुराने ₹13.90 लाख के निर्माण का नहीं है। सार्वजनिक संपत्ति को बिना अनुमति नष्ट किया गया हो तो उसके वर्तमान पुनर्निर्माण मूल्य, सरकारी नुकसान, अधिकार के दुरुपयोग और संभावित मिलीभगत की अलग-अलग जवाबदेही तय होनी चाहिए। सरकार को अब इस मामले में गृह विभाग, राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग और पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करनी चाहिए। मूल अभिलेख जब्त कर स्थल का राजस्व नक्शे तथा BALCO परियोजना लेआउट से मिलान कराया जाए। दस्तावेज़ नष्ट करने या फाइल दबाने की आशंका हो तो रिकॉर्ड तत्काल सीलबंद किए जाएं।
जांच में यदि बिना अधिकार सरकारी भवन तोड़ना, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, रिकॉर्ड दबाना अथवा अधिकारियों की मिलीभगत प्रमाणित होती है, तो तत्कालीन जिम्मेदार BALCO-वेदांता प्रबंधन, संबंधित ठेकेदारों और संरक्षण देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नामजद FIR, नुकसान की वसूली तथा विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ग्राम यात्रा का सीधा सवाल
सरकारी धन से बने पुलिस आवास मिट गए, PWD ने अपराध दर्ज करने को लिख दिया, पत्र पुलिस तक पहुंच भी गया—फिर कानून की कलम किस प्रभावशाली दरवाजे पर जाकर रुक गई?
BALCO प्रबंधन के पास वैध ध्वस्तीकरण अनुमति, भूमि हस्तांतरण अथवा सरकारी स्वीकृति है तो वह सार्वजनिक करे। पुलिस बताए कि पत्र क्रमांक 1841 पर क्या कार्रवाई हुई। सरकार बताए कि सरकारी संपत्ति की रक्षा करने वाली व्यवस्था उस समय सो रही थी—या किसी औद्योगिक दबाव के सामने जानबूझकर आंखें बंद कर ली गई थीं?
अपराध दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं। फाइल बंद की जा सकती है, दस्तावेज़ की गवाही नहीं।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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