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नगर निगम कोरबा में “टैंकर का टेंडर” या शर्तों का जहरीला जाल?

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MSME को लाभ नहीं, फिर MSME प्रमाणपत्र अनिवार्य क्यों? सर्विस सेंटर पर दो नियम, PBG ली नहीं जाएगी—लेकिन उसी को जब्त करने की धमकी!

 

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पांच टैंकरों की खरीद में तकनीकी मापदंड अधूरे; “NABL रिपोर्ट” किस चीज की चाहिए, निगम को खुद पता है या केवल बोलीदाता छांटने का पासवर्ड है?

 

कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर पालिक निगम कोरबा की GeM निविदा संख्या GEM/2026/B/7873318 को बारीकी से पढ़ने पर ऐसा लगता है मानो पांच पानी टैंकर खरीदने के लिए नियम नहीं बनाए गए, बल्कि पात्रता का ऐसा कांटेदार जाल बुना गया जिसमें सामान्य प्रतिस्पर्धी फंस जाए और कोई “शर्तों का जानकार” आराम से रास्ता निकाल ले!

निगम को 3,000 लीटर क्षमता के सिर्फ पांच कृषि ट्रेलर आधारित पानी टैंकर चाहिए। लेकिन टेंडर के पन्नों में शर्तों का ऐसा विरोधाभासी तमाशा खड़ा है कि टैंकर में पानी भरने से पहले पारदर्शिता ही छलनी दिखाई देती है।

पहला डंक—MSE लाभ “नहीं”, फिर MSME प्रमाणपत्र जरूरी क्यों?

मुख्य Bid Details में साफ लिखा है:

MSE Relaxation—No

MSE Purchase Preference—No

Startup Relaxation—No

लेकिन Buyer Added Clause 13 अचानक आदेश देता है:   “Valid MSME Certificate/NSIC Certificate must be submitted.”

 

सवाल सीधा है—जब MSME को न अनुभव में छूट देनी है, न टर्नओवर में राहत और न खरीद में वरीयता, तब MSME/NSIC प्रमाणपत्र को प्रत्येक बोलीदाता की अनिवार्य पात्रता बनाने का औचित्य क्या है?

क्या पानी टैंकर की मजबूती MSME प्रमाणपत्र से तय होगी? या यह प्रमाणपत्र प्रतिस्पर्धा के दरवाजे पर लगाया गया ऐसा ताला है जिसकी चाबी किसी चुनिंदा फर्म के पास पहले से थी?

यदि यह शर्त केवल EMD छूट चाहने वाले MSE के लिए थी तो इसे सभी बोलीदाताओं की अनिवार्य पात्रता में क्यों डाला गया? और यदि सभी के लिए थी तो गैर-MSME लेकिन सक्षम निर्माता को बाहर करने का आधार किस सक्षम अधिकारी ने स्वीकृत किया?

दूसरा डंक—सर्विस सेंटर पर निगम की दो जुबान!

Clause 13 कहती है कि बोली खुलने की तारीख को ही बोलीदाता के पास छत्तीसगढ़ में कार्यशील सर्विस सेंटर होना चाहिए।

लेकिन ठीक अगली Clause 14 कहती है कि यदि सर्विस सेंटर पहले से मौजूद नहीं है तो सफल विक्रेता अनुबंध मिलने के 30 दिनों के भीतर उसे स्थापित कर सकता है।

अब तकनीकी समिति बताए:

पहले से सर्विस सेंटर नहीं रखने वाला पात्र है या अपात्र?
किस बोलीदाता पर Clause 13 लगाई गई?
किसे Clause 14 की 30 दिन वाली राहत मिली?
क्या एक ही टेंडर में दो अलग दरवाजे इसलिए रखे गए कि मनपसंद फर्म को सुविधाजनक रास्ते से भीतर लाया जा सके?

यह साधारण टंकण त्रुटि नहीं मानी जा सकती, क्योंकि इसी आधार पर किसी फर्म को तकनीकी बोली से बाहर या भीतर किया जा सकता है।

तीसरा डंक—PBG ली ही नहीं, फिर जब्त किसे करेंगे?

दस्तावेज़ के ePBG विवरण में स्पष्ट लिखा है: > ePBG Required—No

लेकिन Warranty Clause में धमकी दी गई है कि मरम्मत में देरी होने पर जुर्माना Performance Security/PBG से काटा जाएगा और PBG जब्त की जा सकती है।

जब निगम ने PBG लेने से ही इनकार कर दिया तो खराब टैंकर मिलने पर किस काल्पनिक गारंटी को जब्त किया जाएगा?

क्या यह ऐसी कागजी तलवार है जिसकी मूठ भी नहीं और धार भी नहीं? विक्रेता को भुगतान हो जाने के बाद दोषपूर्ण टैंकर निकला तो निगम के हितों की वित्तीय सुरक्षा किस रकम से होगी?

“NABL रिपोर्ट” या तकनीकी छंटनी का गुप्त पासवर्ड?

Clause 13 में महज दो शब्द लिख दिए गए—“NABL Test Report”।

पर रिपोर्ट किसकी?

MS शीट की?

तैयार टैंकर की?

वेल्डिंग की?

पानी की?

पेंट की?

एक्सल की?

लीकेज टेस्ट की?

रिपोर्ट किस IS मानक पर होनी चाहिए, कितनी पुरानी स्वीकार होगी और क्या उसी 3,000 लीटर मॉडल की होनी चाहिए—टेंडर मौन है। ऐसी अधूरी शर्त तकनीकी योग्यता नहीं तय करती; यह मूल्यांकन समिति को किसी की रिपोर्ट स्वीकार करने और किसी की खारिज करने की खुली छूट दे सकती है।

टैंकर का डिजाइन गायब—ठेका मिलने के बाद तय होगा आकार!

टेंडर में मूलतः केवल यह बताया गया: क्षमता 3,000 लीटर Mild Steel शीट 4 मिमी या अधिक ट्रेलर 5 टन या अधिक 2 अथवा 4 पहिए

लेकिन महत्वपूर्ण तकनीकी बातें गायब हैं:

बफल प्लेट कितनी होंगी?
अंदर एंटी-करोजन कोटिंग होगी या नहीं?
लीकेज और हाइड्रो टेस्ट का मानक क्या होगा?
एक्सल, टायर और ब्रेक की क्षमता क्या होगी?
आउटलेट वाल्व और पाइप का आकार क्या होगा?
वेल्डिंग किस मानक की होगी?
मैनहोल, सुरक्षा लॉक और रिफ्लेक्टर कैसे होंगे?
टैंकर की कुल वारंटी कितनी होगी?

हैरानी यह कि सफल विक्रेता अनुबंध मिलने के बाद डिजाइन ड्रॉइंग देगा और निगम बाद में उसमें संशोधन बताएगा। यानी कीमत पहले लगाओ, वस्तु का पूरा स्वरूप बाद में तय होगा! सवाल है—क्या सभी बोलीदाताओं ने एक ही डिजाइन और गुणवत्ता के आधार पर कीमत दी, या किसी को पहले से पता था कि अंतिम ड्रॉइंग कैसी मंजूर होगी?  Buyer’s Lab बनेगी अंतिम अदालत—लेकिन लैब का पता नहीं दस्तावेज़ कहता है कि सामग्री की जांच Buyer’s Lab में होगी और उसी का परिणाम स्वीकृति का एकमात्र आधार होगा।

पर टेंडर नहीं बताता:

यह लैब कहां है?
क्या लैब मान्यता प्राप्त है?
नमूना कौन लेगा?
परीक्षण की पद्धति क्या होगी?
विक्रेता को संयुक्त सैंपलिंग का अधिकार मिलेगा?
विवाद होने पर स्वतंत्र लैब से पुनः परीक्षण होगा?

बिना स्पष्ट प्रक्रिया के “हमारी लैब का परिणाम अंतिम” कहना पारदर्शी परीक्षण कम और एकतरफा फैसला अधिक दिखाई देता है। 70 प्रतिशत का आधा टैंकर कहां से आएगा? कुल मात्रा पांच टैंकर है और Past Performance 70 प्रतिशत मांगी गई है। पांच का 70 प्रतिशत 3.5 टैंकर होता है।  अब बोलीदाता तीन टैंकर की आपूर्ति दिखाए तो पात्र होगा या चार दिखाना अनिवार्य है? दस्तावेज़ इसका जवाब नहीं देता। मगर यही आधा-अधूरा गणित तकनीकी मूल्यांकन में किसी को बाहर करने का पूरा हथियार बन सकता है।

टैंकर का उपयोग और बजट—दोनों पर पर्दा

निविदा यह नहीं बताती कि पांच टैंकर:

पेयजल वितरण के लिए हैं;

उद्यान और पौधों की सिंचाई के लिए;

सड़क धुलाई के लिए;

या किसी अन्य योजना के लिए।

यह भी सामने नहीं है कि निगम के पास पहले से कितने टैंकर हैं, कितने चालू हैं, कितने कबाड़ हैं और पांच नए टैंकरों की जरूरत किस अधिकारी के सर्वे तथा मांगपत्र से पैदा हुई। सबसे बड़ा सवाल—इनकी अनुमानित लागत, बाजार दर परीक्षण और बजट मद क्या है? पांच टैंकर, एक ही विक्रेता और Reverse Auction भी बंद Bid splitting लागू नहीं है। पूरा आदेश एक ही विक्रेता को जाएगा। Reverse Auction भी चालू नहीं की गई। इसका अर्थ है कि प्रारंभिक वित्तीय बोली के बाद प्रतिस्पर्धी दर घटाने का अतिरिक्त चरण उपलब्ध नहीं होगा।  Reverse Auction न होना अपने आप अनियमितता नहीं है, लेकिन जब पात्रता की शर्तें पहले से विरोधाभासी और संकुचित हों तो यह निर्णय भी जांच के घेरे में आना स्वाभाविक है।

ग्राम यात्रा की जांच में उठे निर्णायक सवाल

नगर निगम सार्वजनिक करे:

1. निविदा की सक्षम अधिकारी से स्वीकृत मूल मांग और आवश्यकता पत्र।

2. अनुमानित लागत तथा बाजार सर्वे।

3. MSME/NSIC प्रमाणपत्र अनिवार्य करने का लिखित औचित्य।

4. निविदा तैयार करने और ATC जोड़ने वाले अधिकारियों के नाम।

5. सभी भाग लेने वाले विक्रेताओं की सूची।

6. तकनीकी रूप से सफल और असफल फर्मों का तुलनात्मक विवरण।

7. प्रत्येक असफल फर्म को बाहर करने का कारण।

8. NABL रिपोर्ट के लिए निर्धारित उत्पाद और परीक्षण मानक।

9. सर्विस सेंटर वाली दोनों विरोधाभासी शर्तों में किसे लागू किया गया।

10. PBG नहीं लेने का सक्षम अधिकारी द्वारा अनुमोदित कारण।

11. स्वीकृत डिजाइन ड्रॉइंग और निरीक्षण रिपोर्ट।

12. अनुबंध, आपूर्ति आदेश, CRAC तथा भुगतान विवरण।

13. प्राप्त Representation और निगम द्वारा दिए गए उत्तर।

14. पांच टैंकरों का वर्तमान स्थान, पंजीयन और उपयोग का रिकॉर्ड।

 

निष्कर्ष

इस निविदा के पन्नों से फिलहाल रिश्वत का प्रमाण नहीं निकलता, लेकिन नियमों की ऐसी खिचड़ी अवश्य निकलती है जिसमें पारदर्शिता का स्वाद गायब और मनमानी की गंध तेज है। MSME का लाभ शून्य, मगर प्रमाणपत्र अनिवार्य। सर्विस सेंटर पर दो विपरीत आदेश। PBG शून्य, मगर जब्ती की धमकी। NABL रिपोर्ट जरूरी, मगर जांच किसकी—पता नहीं। टैंकर खरीदना तय, मगर पूरा डिजाइन अनुबंध के बाद!  नगर निगम कोरबा को जवाब देना होगा—यह टेंडर सार्वजनिक प्रतिस्पर्धा के लिए था या शर्तों की भूलभुलैया में किसी “पहले से रास्ता जानने वाले” विक्रेता के स्वागत की तैयारी?

दस्तावेज़ी रिकॉर्ड मिलते ही ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस टैंकर टेंडर की अगली परत—फर्म, दर, तकनीकी पात्रता और भुगतान—सार्वजनिक करेगा।

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