बालको की भवन अनुज्ञा में ‘गणित’ भी हुआ मैनेज?

तीन शुल्कों का जोड़ ₹1.07 करोड़, रसीद केवल ₹97.78 लाख की—बीच के ₹9.97 लाख किस खाते में हुए गायब?
नगर निगम बताए—पूर्व भुगतान का समायोजन, टाइपिंग की कलाकारी या बालको पर मेहरबानी?
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा बालको को जारी एक भवन निर्माण अनुमति में ऐसा गणित सामने आया है, जिसे देखकर कैलकुलेटर भी शायद निगम से लिखित स्पष्टीकरण मांग बैठे!
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क के पास उपलब्ध अनुमति –पत्र के अनुसार भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड—बालको को ग्राम पाड़ीमार में 10 तल और 66,181.95 वर्गमीटर निर्माण के लिए अनुमति दी गई। लेकिन इसी अनुमति-पत्र में दर्ज शुल्क और भुगतान की रसीद के आंकड़े आपस में मेल नहीं खा रहे।
दस्तावेज में तीन प्रमुख शुल्क इस प्रकार दर्ज हैं—
भवन अनुज्ञा शुल्क — ₹56,77,512
अन्य शुल्क — ₹26,53,560
विकास शुल्क — ₹24,44,510
इन तीनों का कुल योग होता है— ₹1,07,75,582
लेकिन इसी विवरण के बाद रसीद क्रमांक 87296, दिनांक 16 अप्रैल 2025 के सामने जमा राशि केवल— ₹97,78,038
अब सामान्य गणित कहता है— ₹1,07,75,582 − ₹97,78,038 = ₹9,97,544
अर्थात अनुमति-पत्र में लिखी शुल्क-मदों और उसके सामने दर्ज रसीद के बीच ₹9 लाख 97 हजार 544 रुपये का अंतर दिखाई देता है।
बालको के लिए निगम का कैलकुलेटर अलग चलता है क्या?
आम नागरिक मकान का नक्शा पास कराने जाए तो छोटी-सी कमी पर उसकी फाइल एक मेज से दूसरी मेज तक तीर्थयात्रा करती रहती है। लेकिन मामला बालको का हो तो करोड़ों की भवन अनुज्ञा में लगभग दस लाख रुपये का अंतर भी शायद “गोलाई” का मामला समझ लिया जाता है! सवाल यह नहीं कि रकम बड़ी कंपनी के लिए छोटी है।
सवाल यह है कि नगर निगम के राजस्व में एक रुपये की कमी भी किस नियम, आदेश और अधिकारी के हस्ताक्षर से हुई?
दस्तावेज में दूसरी रसीद ने गणित को और उलझाया इसी अनुमति-पत्र में एक अन्य स्थान पर ₹3,39,075 की शुल्क-मद के साथ रसीद क्रमांक 84033, दिनांक 28 फरवरी 2025 और राशि ₹6,26,400 भी दर्ज दिखाई देती है।
अब निगम को स्पष्ट करना होगा कि यह ₹6,26,400—
तीन मुख्य शुल्कों से अलग भुगतान था;
उन्हीं शुल्कों का अग्रिम भुगतान था;
किसी अन्य उपकर या मद की राशि थी;
अथवा बाद वाली रसीद में इसका समायोजन किया गया?
यदि ₹6,26,400 को मुख्य शुल्कों का पूर्व भुगतान माना जाए, तब भी अंतर ₹3,71,144 रह जाता है। इसलिए दोनों परिस्थितियों में दस्तावेज स्पष्टीकरण मांगता है।
₹3.39 लाख की मद, लेकिन रसीद ₹6.26 लाख की!
अनुमति-पत्र में ₹3,39,075 की राशि लिखी है, जबकि उससे जुड़ी दिखाई देने वाली रसीद ₹6,26,400 की है। दोनों के बीच भी ₹2,87,325 का अंतर है। अर्थात यह भवन अनुज्ञा कम और गणित की पहेली ज्यादा दिखाई देती है—
कहीं शुल्क अधिक, कहीं रसीद कम और कहीं मद कुछ दूसरी—आखिर निगम के खाते में सही रकम कितनी पहुंची?
क्या निगम ने बालको को कोई छूट दी?
यदि किसी सक्षम अधिकारी ने वैधानिक छूट दी है तो आदेश सार्वजनिक किया जाए। यदि पूर्व भुगतान का समायोजन हुआ है तो समायोजन पत्र और चालान सामने रखा जाए।
यदि अनुमति-पत्र में टाइपिंग की गलती है तो संशोधित अनुमति क्यों जारी नहीं की गई?
और यदि वास्तव में कम शुल्क लिया गया है तो जिम्मेदार अधिकारी कौन है तथा राशि की वसूली कब होगी?
बालको कोई फुटपाथ पर खड़ा अस्थायी ठेला नहीं, बल्कि देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों में शामिल प्रतिष्ठान है। इसलिए उसके 10 तल और 66 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले निर्माण की अनुमति में शुल्क का हिसाब धुंधला होना साधारण लिपिकीय भूल बताकर नहीं टाला जा सकता।
अनुमति एक वर्ष की—नवीनीकरण का रिकॉर्ड कहां?
अनुमति-पत्र में स्पष्ट शर्त दर्ज है कि निर्माण कार्य की स्वीकृति एक वर्ष तक विधिमान्य रहेगी। अवधि समाप्त होने से पहले पुनः विधिमान्यकरण कराना आवश्यक होगा। अनुमति 3 मई 2025 को जारी हुई थी। इसलिए निगम को यह भी बताना चाहिए—
अनुमति के बाद निर्माण कब प्रारंभ हुआ?
स्वीकृत नक्शे के अनुसार कितना निर्माण हुआ?
क्या अवधि के भीतर पुनर्विधिमान्यकरण कराया गया?
अग्निशमन, संरचनात्मक सुरक्षा और अन्य अनिवार्य स्वीकृतियां उपलब्ध हैं?
वर्तमान में निर्माण जिस अनुमति पर चल रहा है, उसकी वैधता क्या है?
जवाब फाइल में नहीं—सार्वजनिक मंच पर चाहिए नगर निगम को अब आवेदन संख्या AJYA-KMC-2025-0001, प्रकरण क्रमांक 2637 की निम्न जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए—
1. मूल शुल्क-गणना पत्र
2. दोनों रसीदों की प्रमाणित प्रतियां
3. बैंक ट्रांजैक्शन और राजस्व लेजर
4. मदवार शुल्क की लागू दरें
5. छूट अथवा समायोजन का आदेश
6. अनुमति की वर्तमान वैधता एवं नवीनीकरण
7. संबंधित नोटशीट पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों के नाम
₹9.97 लाख का अंतर—गलती, समायोजन या मेहरबानी?
अभी उपलब्ध एक पृष्ठ के आधार पर इसे अंतिम रूप से राजस्व नुकसान घोषित करना उचित नहीं होगा। लेकिन दस्तावेज में दर्ज आंकड़ों के बीच दिखाई देता ₹9,97,544 का अंतर वास्तविक और स्पष्टीकरण योग्य है।
कोरबा की जनता जानना चाहती है—
क्या निगम का गणित केवल आम आदमी के मकान पर सख्त और बालको की बहुमंजिला इमारत पर नरम पड़ जाता है?
बालको का भवन दस मंजिल ऊंचा—पर शुल्क का हिसाब इतना नीचे क्यों?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क निगम और बालको प्रबंधन का पक्ष आमंत्रित करता है। दस्तावेज और प्रमाण सहित जवाब प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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