कोरबा DMF फाइल्स — एपिसोड 04

कागजों में ‘कार्य पूर्ण’… लेकिन जमीन पर जनता को मिला क्या?
करोड़ों खर्च कर बने Assets की उपयोगिता पर CAG ने उठाए सवाल—Art & Cultural Centre पड़ा निष्क्रिय, Biogas Power Plant भी नहीं चला
अब सिर्फ Completion Certificate नहीं चलेगा—Sanction से Payment और ‘कार्य पूर्ण’ से Ground Reality तक होगा मिलान
कोरबा। DMF के पैसे से कोई भवन बन गया, मशीन खरीद ली गई या किसी परियोजना का Completion Certificate जारी हो गया—क्या इतने भर से मान लिया जाए कि खनन प्रभावित जनता को उसका लाभ मिल गया? ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की खोजी श्रृंखला “कोरबा DMF फाइल्स” के चौथे एपिसोड में यही सबसे बड़ा सवाल है। क्योंकि CAG के दस्तावेज बताते हैं कि कोरबा में ऐसे assets भी मिले जिन पर सार्वजनिक धन खर्च हुआ, निर्माण/स्थापना हुई—लेकिन audit के समय उनकी वास्तविक उपयोगिता पर गंभीर सवाल थे।
पैसा खर्च… Asset तैयार… फिर भी उपयोग नहीं?
यही इस एपिसोड की कहानी है। ₹3.76 करोड़ का Art & Cultural Centre CAG के audit appendix में Korba के Art & Cultural Centre का मामला दर्ज है।
रिकॉर्ड के अनुसार इसकी administrative sanction लगभग— ₹3.76 करोड़ थी और करीब— ₹3.01 करोड़ का utilisation दर्ज हुआ। पर कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। CAG के अनुसार Centre पूरा होने के बाद Education Department को सौंपा गया था, लेकिन बाद में चोरी/vandalism की घटनाओं के कारण इसे वापस DMFT को सौंप दिया गया। Audit के समय यह asset idle पड़ा था।
यानी सवाल सिर्फ निर्माण का नहीं—
₹3 करोड़ से अधिक खर्च के बाद जनता को वास्तविक लाभ कितने दिन मिला?
भवन बना तो संचालन की योजना कहां थी?
यदि करोड़ों रुपये खर्च कर कोई Cultural Centre बनाया गया तो DPR बनाते समय ये सवाल भी तय होने चाहिए थे—
इसे चलाएगा कौन?
Security कौन देगा?
Annual maintenance कौन करेगा?
कार्यक्रम कौन आयोजित करेगा?
Recurring expenditure किस budget से आएगा?
अगर निर्माण के बाद संचालन की व्यवस्था ही कमजोर रही तो DMF expenditure की सफलता केवल “100% construction completed” लिख देने से साबित नहीं होती। ₹64 लाख का Biogas Power Plant—फिर भी नहीं चला। दूसरा मामला और दिलचस्प है। CAG appendix में Korba के Biogas Driven Power Generation Plant के लिए लगभग— ₹64 लाख की administrative sanction। और करीब—। ₹51.02 लाख utilisation। दर्ज है। लेकिन audit के समय plant technical difficulties के कारण non-operational पाया गया।
अब सवाल उठता है—
तकनीकी feasibility पहले जांची गई थी या नहीं?
Plant commissioning के बाद कितने दिन चला?
कितनी बिजली पैदा हुई?
किस agency/vendor ने plant लगाया?
Warranty/maintenance की जिम्मेदारी किसकी थी?
और सबसे महत्वपूर्ण—। बंद Plant को चालू कराने के लिए recovery या corrective action क्या हुआ?
‘कार्य पूर्ण’ और ‘उद्देश्य पूर्ण’ में बड़ा अंतर यही DMF audit की सबसे महत्वपूर्ण सीख है। सरकारी file में कोई project Completed हो सकता है। लेकिन forensic investigation में उसे तब तक सफल नहीं माना जा सकता जब तक चार बातें न मिलें—
Physical Completion
Functional Status
Actual Beneficiaries
Public Utility
इसीलिए अब हमारी जांच का formula होगा:
SANCTION → PAYMENT → COMPLETION → FUNCTIONALITY → PUBLIC BENEFIT
Multi-Level Parking भी उठाता है Planning पर सवाल। कोरबा का Multi-Level Parking project भी planning और utilisation की जांच का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस project के sanction, expenditure, बाद में utilisation और उसके इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग चरणों में सवाल सामने आए। 2026 तक स्थानीय स्तर पर Multi-Level Parking को operational/व्यवस्थित उपयोग में लाने के लिए प्रशासन, निगम और व्यापारियों के बीच चर्चा होने की रिपोर्ट सामने आई।
इसलिए इस project की पूरी फाइल में अब देखना होगा—
Original DPR में उद्देश्य क्या था?
कितनी राशि sanctioned थी?
कितना expenditure हुआ?
Original traffic/parking assessment क्या था?
बाद में utilisation बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?
यह किसी घोटाले का स्वतः प्रमाण नहीं। लेकिन planning efficiency की जांच जरूर मांगता है।
सबसे खतरनाक शब्द—“कार्य पूर्ण”
DMF records में किसी काम के सामने “पूर्ण” लिखा होना जांच का अंत नहीं होना चाहिए। बल्कि वहीं से दूसरा audit शुरू होना चाहिए। मान लीजिए ₹2 करोड़ की कोई सुविधा “पूर्ण” है।
तो पूछा जाएगा—
आज वह चालू है?
कितने लोग इस्तेमाल करते हैं?
Maintenance कौन कर रहा है?
बिजली-पानी उपलब्ध है?
Staff sanctioned है?
Asset खराब तो नहीं पड़ा?
क्योंकि जनता को बंद भवन से लाभ नहीं मिलता। और अब मिला ‘निर्माण कोरबा’—8,593 कार्यों का बड़ा दरवाजा हमारी खोज में जिला प्रशासन का निर्माण कोरबा public progress database महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में सामने आया है। इसमें हजारों projects की progress information उपलब्ध दिखाई देती है और हमारी जांच के समय public progress universe में लगभग—8,593 WORKS दिख रहे थे। अब यही database ground audit का बड़ा आधार बन सकता है। लेकिन यहां सावधानी जरूरी है—ये सभी 8,593 काम DMF के ही हैं, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता।
अगला काम है—
इनमें DMF-funded projects को अलग पहचानना।
₹1 करोड़ से ऊपर के हर ‘पूर्ण’ DMF Asset का Physical Audit हो
ग्राम यात्रा की जांच में अब एक सीधा प्रस्ताव सामने है। 2024 से अब तक ₹1 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रत्येक completed DMF asset की सूची सार्वजनिक की जाए।
फिर हर project के सामने लगाया जाए—
Sanction Amount
Final Expenditure
Contractor
Completion Date
Geo-tagged Photo
Present Status
Functional/Non-functional
Beneficiaries per day/month।
यहीं से पता चलेगा कि करोड़ों के निर्माण वास्तव में जनता के लिए काम कर रहे हैं या केवल asset register बढ़ा रहे हैं। Geo-tagged फोटो भी पुरानी हो सकती है—Current Verification जरूरी। किसी portal पर completion की geo-tagged photograph होना महत्वपूर्ण evidence है। लेकिन वह केवल यह साबित कर सकती है कि किसी तारीख पर structure मौजूद था। इससे यह स्वतः साबित नहीं होता कि वह आज भी functional है। इसलिए ground verification में वर्तमान तारीख की photograph/video और स्थानीय beneficiary statement भी लिया जाना चाहिए।
Vendor की जिम्मेदारी Completion तक या Performance तक?
Biogas Plant जैसे मामले में यह सवाल और महत्वपूर्ण है। यदि equipment/vendor contract में warranty, operation या maintenance condition थी और plant निर्धारित अवधि में बंद हो गया तो—
Performance Guarantee invoke हुई?
Security Deposit वापस कर दिया गया?
Vendor को notice गया?
Penalty लगी?
Repair किसके खर्च पर हुआ?
इन सवालों का जवाब procurement file में होना चाहिए। DMF की सफलता खर्च प्रतिशत से नहीं मापी जा सकती। यदि ₹100 करोड़ में ₹95 करोड़ खर्च हो गए तो accounting language में utilisation 95% होगा। लेकिन यदि उससे बने assets बंद पड़े हों तो वास्तविक सामाजिक लाभ अलग हो सकता है।
इसलिए DMF की असली performance केवल—
“कितना पैसा खर्च हुआ?” से नहीं मापी जानी चाहिए।
बल्कि—। “पैसा खर्च होने के बाद कितने वर्षों तक जनता को लाभ मिला?”
इससे मापी जानी चाहिए।
अब Gram Yatra का ‘Ground Reality Test’। आगे हमारी जांच में बड़े completed DMF projects को चार categories में रखने की कोशिश होगी:
कार्य पूर्ण और चालू — वास्तविक लाभ कितना?
कार्य पूर्ण लेकिन आंशिक उपयोग — कारण क्या?
कार्य पूर्ण लेकिन बंद/Idle — जिम्मेदारी किसकी?
कागज में पूर्ण लेकिन जमीन पर अधूरा — यदि ऐसा कोई मामला प्रमाणित होता है तो वह सबसे गंभीर category होगी। अभी किसी project को चौथी category में बिना physical/documentary evidence नहीं रखा जा रहा।
₹3.01 करोड़ Cultural Centre और ₹51.02 लाख Biogas Plant सिर्फ दो उदाहरण हैं
यही इस एपिसोड का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है। इन दो मामलों से पूरे Korba DMF को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन CAG के ये उदाहरण इतना जरूर साबित करते हैं कि—
Completion Certificate अकेला पर्याप्त नहीं है।
DMF के हजारों projects में अब Post-Completion Performance Audit की जरूरत है।
क्योंकि खनन प्रभावित जनता को कागज का “पूर्ण” नहीं—। चलता हुआ अस्पताल, साफ पानी, उपयोगी सड़क, चालू मशीन और काम करता Asset चाहिए। अगले एपिसोड में सबसे बड़ा सवाल—₹529.24 करोड़!
1,498 नए DMF काम स्वीकृत—लेकिन पूरी Master List कहां है?
₹519.11 करोड़ की प्राप्ति, ₹529.24 करोड़ की Administrative Sanction
काम किस गांव में? कितने का?
किस agency को? Contractor कौन?
Payment कितना?
1,498 काम हैं तो जनता के सामने 1,498 लाइनें क्यों न हों?
पढ़िए—“कोरबा DMF फाइल्स : एपिसोड 05”
सिर्फ ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क पर।
नोट: इस रिपोर्ट में उल्लिखित Art & Cultural Centre और Biogas Power Plant की स्थिति संबंधित CAG audit period की finding पर आधारित है। वर्तमान स्थिति बदल चुकी हो सकती है; इसलिए मौजूदा functional status का अलग physical verification आवश्यक है।
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