राज्य समाचार

कोरबा में अजब-गजब! ‘प्लॉट नंबर 0’ पर 10 मंजिला महल! खसरा गायब, टैक्स विवादित, अनुमति खत्म—फिर किसके आदेश पर चल रहा BALCO का निर्माण?

Spread the love

वनभूमि पर सुप्रीम कोर्ट की छाया, निगम के ₹32.69 करोड़ दांव पर और अनुमति-पत्र में विकास-अनुज्ञा तक लापता—क्या अधिकारियों ने कानून पढ़कर मंजूरी दी या कंपनी का नाम देखकर फाइल आगे बढ़ा दी?

 

कोयला क्षेत्र में जमीन की स्थिरता जाँचे बिना हाईराइज को हरी झंडी तो नहीं? अनुमति देने वाले अधिकारियों से पूछा जाए—खसरा, EC, Fire NOC, No Dues और पुनर्वैधीकरण आदेश कहां हैं?

 

WhatsApp Group
Telegram Channel Join Now

कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क आम नागरिक मकान का नक्शा लेकर नगर निगम जाए तो खसरा, बी-1, चौहद्दी, डायवर्सन, टैक्स रसीद और जमीन के एक-एक इंच का हिसाब मांगा जाता है। लेकिन BALCO–Vedanta की पदिमार स्थित कथित G-9 आवासीय परियोजना की फाइल में एक अनोखा प्रशासनिक चमत्कार दिखाई देता है— खसरा क्रमांक खाली, भूखंड की पहचान “Plot No. 0”, विकास-अनुज्ञा का क्रमांक और दिनांक रिक्त—फिर भी 10 मंजिला और 66,181.95 वर्गमीटर निर्माण को नगर निगम की मंजूरी! अब सवाल किसी टंकण की गलती का नहीं है। सवाल यह है कि इतनी गंभीर कमियों वाले अनुमति-पत्र पर हस्ताक्षर करने से पहले अधिकारियों ने वास्तविक दस्तावेज देखे भी थे या नहीं।

क्या यह अनुमति अपने आप में अवैध थी?

उपलब्ध अनुमति-पत्र की कमियों से यह अनुमति स्वतः अंतिम रूप से “अवैध सिद्ध” नहीं हो जाती, क्योंकि संभव है कि कुछ मूल दस्तावेज ऑनलाइन प्रिंट में प्रदर्शित न हुए हों लेकिन फाइल में संलग्न हों। परंतु यदि अनुमति जारी करने से पहले निम्न अनिवार्य स्वीकृतियाँ वास्तव में उपलब्ध नहीं थीं, तो अनुमति आरंभ से ही नियमविरुद्ध, अधिकार-क्षेत्र से बाहर अथवा निरस्तीकरण योग्य हो सकती है—

वैध एवं खसरा-विशिष्ट भूमि स्वामित्व;

नगर तथा ग्राम निवेश की विकास-अनुज्ञा;

66,181.95 वर्गमीटर परियोजना की पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति;

उच्च-वृद्धि भवन के लिए Pre-Construction Fire NOC;

संरचनात्मक स्थिरता एवं भूकंपरोधी डिजाइन प्रमाणपत्र;

वनभूमि नहीं होने अथवा आवश्यक केंद्रीय वन स्वीकृति का प्रमाण;

अदालत के प्रतिबंधित क्षेत्र से परियोजना बाहर होने का प्रमाण;

निर्धारित भवन अनुमति शुल्क का पूर्ण भुगतान;

लागू होने पर AAI/NOCAS ऊंचाई अनुमति;

भूखंड तक निर्धारित चौड़ाई की वैधानिक पहुँच सड़क।

इसलिए अब नगर निगम को केवल यह कहने से काम नहीं चलेगा कि “अनुमति ऑनलाइन जारी हुई है।” निगम को बताना होगा कि अनुमति जारी करते समय फाइल में कौन-कौन से अनिवार्य प्रमाण मौजूद थे।  खसरा नहीं तो अधिकारियों ने किस जमीन की जाँच की? अनुमति-पत्र में निर्माण स्थल का खसरा क्रमांक खाली है और स्थान के विवरण में “Plot No. 0, At Village Padimar” लिखा है।

यही कमी पूरे मामले को गंभीर बनाती है। बिना खसरे के यह कैसे जाँचा गया कि—

जमीन BALCO के वैध स्वामित्व या पट्टे में है;
जमीन शासकीय नहीं है;
भूमि वनभूमि अथवा “बड़े झाड़ का जंगल” नहीं है;
भूमि किसी न्यायालयीन विवाद में नहीं है;
स्वीकृत लेआउट उसी भूमि का है;
FAR और सेटबैक सही भूखंड पर निकाले गए;

परियोजना सुप्रीम कोर्ट/CEC जाँच वाली भूमि से बाहर है?

जमीन का नंबर गायब, लेकिन दस मंजिल की मंजूरी तैयार—क्या यह लापरवाही थी या किसी को लाभ पहुंचाने की प्रशासनिक जल्दी?

अनुमति देने वाले भवन अधिकारी, जाँच करने वाले अभियंता, संबंधित वास्तुविद् और अंतिम स्वीकृति देने वाले सक्षम अधिकारी से इस संबंध में व्यक्तिगत जवाब लिया जाना चाहिए।

वनभूमि पर सुप्रीम कोर्ट की रोक—फिर निगम ने खसरा-वार रिपोर्ट क्यों नहीं मांगी?

सार्वजनिक रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की Central Empowered Committee ने BALCO से जुड़े लगभग 148 एकड़ क्षेत्र में कथित अतिक्रमण एवं वृक्ष कटाई का विषय उठाया, जिसमें लगभग 97 एकड़ वनभूमि बताए जाने की जानकारी सामने आई। संबंधित क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट की रोक के उल्लंघन का आरोप भी रिपोर्ट किया गया है। अंतिम दोष निर्धारण अदालत का विषय है, लेकिन विवाद का अस्तित्व छिपाया नहीं जा सकता। CEC संबंधी विवरण  यदि पदिमार परियोजना उस विवादित भूमि से अलग है तो नगर निगम और BALCO को निम्न प्रमाण सार्वजनिक करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए—

परियोजना के सभी खसरा नंबर;

राजस्व एवं वन नक्शे;

बी-1 और पी-II;

संयुक्त सीमांकन प्रतिवेदन;

वन विभाग का प्रमाण;

CEC क्षेत्र और परियोजना का GIS overlay;

वृक्ष कटाई अनुमति;

आवश्यक होने पर केंद्रीय Forest Clearance।

वनभूमि का गैर-वन उपयोग केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता। नगर निगम की भवन अनुमति केंद्रीय वन स्वीकृति अथवा सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को निष्प्रभावी नहीं कर सकती। वन कानून की धारा 

यदि भूमि साफ है तो खसरा छिपा क्यों है? और यदि खसरा विवादित है तो अनुमति दी किसने?
₹32.69 करोड़ का टैक्स विवाद—फिर कंपनी को भवन अनुमति की मेहरबानी कैसे?

नगर निगम ने BALCO के विरुद्ध 10 अक्टूबर 2024 को ₹32,69,77,202 की संपत्ति कर मांग जारी की और 12 फरवरी 2025 को दोबारा भुगतान आदेश दिया। इसके बाद की समयरेखा अधिकारियों को सीधे कटघरे में खड़ा करती है—घटना दिनांक

निगम की ₹32.69 करोड़ कर-मांग 10 अक्टूबर 2024
पुनः भुगतान आदेश 12 फरवरी 2025
भवन अनुमति आवेदन 12 मार्च 2025
हाईकोर्ट का प्रारंभिक निर्देश 23 अप्रैल 2025
10 मंजिला भवन अनुमति 3 मई 2025
BALCO का स्व-मूल्यांकन अस्वीकार 6 जून 2025
WPT 61/2025 सुनवाई हेतु स्वीकार 3 जुलाई 2025

हाईकोर्ट ने BALCO का पूरा टैक्स समाप्त नहीं किया। जुलाई 2025 के आदेश में कंपनी को स्वीकार्य/निर्विवाद देय राशि जमा करने को कहा गया तथा विवादित मांग पर दमनात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण दिया गया। WPT 61/2025 आदेश

इसलिए अनुमति देने वाले अधिकारी बताएं—

3 मई 2025 को BALCO का टैक्स खाता क्या था?
कितनी राशि निर्विवाद रूप से देय थी?
क्या वह अनुमति से पहले जमा हुई?
क्या कर शाखा ने No Dues Certificate दिया?
क्या निगम के अधिवक्ता से विधिक अभिमत लिया गया?
क्या निगम के किसी पूर्व निर्णय में बकाया रहने तक अनुमति रोकने की शर्त थी?
अनुमति फाइल में ₹32.69 करोड़ की मांग का उल्लेख क्यों नहीं दिखाई देता?
आम आदमी पर कुछ हजार रुपये बाकी हों तो नक्शा अटक जाता है; BALCO पर करोड़ों की मांग रहते हुए 10 मंजिला अनुमति निकल गई—इसे प्रशासनिक समानता कहा जाए या कॉरपोरेट सुविधा?
₹9,97,544 का हिसाब कौन देगा?

 

अनुमति-पत्र में दर्ज राशियाँ हैं— शुल्क का मद राशि

भवन अनुज्ञा शुल्क ₹56,77,512
अन्य शुल्क ₹26,53,560
विकास शुल्क ₹24,44,510
कुल योग ₹1,07,75,582
प्रदर्शित रसीद ₹97,78,038
प्रथम दृष्टया अंतर ₹9,97,544

यह अंतर केवल “कंप्यूटर की त्रुटि” कहकर नहीं टाला जा सकता। निगम को अलग रसीद, छूट आदेश, समायोजन पत्र अथवा संशोधित शुल्क गणना प्रस्तुत करनी होगी।  उच्च-वृद्धि शुल्क की एक रसीद 28 फरवरी 2025 की दिखाई गई है, जबकि आवेदन 12 मार्च 2025 का है। इसलिए यह भी स्पष्ट किया जाए कि आवेदन से पहले शुल्क किस मांग-पत्र और किस परियोजना कोड पर लिया गया था।

दस लाख रुपये का अंतर और आवेदन से पहले भुगतान—क्या अनुमति की पटकथा आवेदन से पहले लिखी जा चुकी थी?

विकास-अनुज्ञा खाली—तो भवन अनुमति किस वैधानिक आधार पर निकली?

अनुमति-पत्र में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की विकास-अनुज्ञा का क्रमांक और दिनांक खाली है। छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश कानून के अंतर्गत नियोजन क्षेत्र में विकास करने के लिए लिखित विकास-अनुज्ञा आवश्यक है। इसलिए अधिकारियों को मूल प्रमाण दिखाना होगा कि—

विकास-अनुज्ञा वास्तव में जारी हुई थी;

वह इन्हीं खसरों की थी;

उसमें 10 मंजिल स्वीकृत थीं;

66,181.95 वर्गमीटर का निर्माण अनुमोदित था;

भूमि उपयोग आवासीय था;

उसकी वैधता 3 मई 2025 को समाप्त नहीं हुई थी।

जिस विकास-अनुज्ञा का नंबर और तारीख तक अनुमति-पत्र में नहीं, उसी के आधार पर 10 मंजिला इमारत मंजूर कर देना क्या सामान्य प्रक्रिया है?

10 मंजिला भवन के लिए विशेष अनुमति अनिवार्य है?

हां—10 मंजिला भवन सामान्य आवासीय मकान की श्रेणी में नहीं आता। उसकी वास्तविक ऊंचाई के आधार पर वह उच्च-वृद्धि भवन के विशेष सुरक्षा प्रावधानों के अधीन आएगा। छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियमों के नियम 83 के अंतर्गत उच्च-वृद्धि भवन में अग्नि सुरक्षा संबंधी विशेष प्रावधान लागू होते हैं। राज्य अग्निशमन विभाग का पोर्टल भी Pre-Construction तथा Post-Construction NOC, Fire Audit और NOC Renewal की पृथक व्यवस्था बताता है। छत्तीसगढ़ Fire NOC पोर्टल

कम से कम ये दस्तावेज जाँचने होंगे—

1. Pre-Construction Fire NOC;

2. स्वीकृत fire-fighting plan;

3. Post-Construction Fire Certificate—उपयोग से पहले;

4. आवश्यक चौड़ाई की पहुँच सड़क;

5. भवन के चारों ओर फायर टेंडर आवागमन;

6. फायर लिफ्ट और आपातकालीन सीढ़ियाँ;

7. भूमिगत एवं छत जल टैंक;

8. हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर और अलार्म व्यवस्था;

9. refuge area, यदि ऊंचाई के अनुसार लागू हो;

10. स्वतंत्र संरचनात्मक अभियंता का प्रमाणपत्र;

11. soil test एवं foundation design;

12. भूकंपरोधी संरचनात्मक गणना;

13. आवश्यक होने पर AAI/NOCAS ऊंचाई अनुमति;

14. पर्यावरणीय स्वीकृति।

इन पूर्व-अनुमतियों के बिना नगर निगम की सामान्य भवन अनुज्ञा पर्याप्त नहीं है कोरबा कोयला क्षेत्र है—क्या खनन विभाग की विशेष अनुमति जरूरी थी? केवल “कोरबा जिला कोयला क्षेत्र है” इस आधार पर हर भवन के लिए अलग DGMS अथवा CMPDI अनुमति अनिवार्य होने का कोई सार्वभौमिक नियम सामने नहीं आया। इसलिए बिना स्थल-जाँच यह कहना सही नहीं होगा कि प्रत्येक कोरबा भवन के लिए खनन NOC जरूरी है।

लेकिन यदि पदिमार परियोजना—

किसी स्वीकृत कोल ब्लॉक/माइनिंग लीज में आती है;  Coal Bearing Areas Act के अंतर्गत अधिग्रहीत भूमि पर है;  चालू या बंद भूमिगत खदान के प्रभाव क्षेत्र में है;  पुराने mine workings, galleries अथवा subsidence zone के ऊपर है; किसी mine safety barrier अथवा प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर है;

तो खनन अधिकारधारी संस्था, SECL/संबंधित विभाग तथा सक्षम तकनीकी संस्था से भूमि स्थिरता और mine-subsidence संबंधी प्रमाण अत्यंत आवश्यक हो सकता है। कोरबा कोलफील्ड में भूमिगत खनन से सतही विकृति और धंसान पर वैज्ञानिक अध्ययन भी किए गए हैं। इसलिए 10 मंजिला और 66 हजार वर्गमीटर की परियोजना में केवल सामान्य soil test पर्याप्त था या विस्तृत geotechnical/mine-workings investigation आवश्यक थी—यह तकनीकी रूप से जाँचा जाना चाहिए।

निगम से पूछा जाना चाहिए—

परियोजना के नीचे कोई पुरानी भूमिगत खदान या gallery है?

क्या SECL/खनिज विभाग से भूमि की स्थिति पूछी गई?

क्या mine lease map और परियोजना नक्शे का मिलान हुआ?

क्या subsidence-risk assessment कराया गया?

क्या geotechnical report में पुराने mine workings का अध्ययन है?

क्या foundation design को स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था से peer review कराया गया?

कोयले की धरती पर 10 मंजिला इमारत खड़ी हो रही है—नीचे की जमीन कितनी सुरक्षित है, इसका प्रमाण फाइल में है या सुरक्षा भी कंपनी के शपथपत्र पर छोड़ दी गई?

यह प्रश्न केवल नियम का नहीं, सैकड़ों परिवारों की भविष्य की सुरक्षा का है। पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना निर्माण शुरू हुआ तो मामला गंभीर  परियोजना का क्षेत्रफल 66,181.95 वर्गमीटर है। EIA Notification, 2006 की Entry 8(a) के अंतर्गत 20,000 से 1,50,000 वर्गमीटर वाली भवन परियोजनाओं के लिए पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति लागू होती है। आधिकारिक EIA अधिसूचना अनुमति-पत्र में EC का नंबर और दिनांक नहीं है। इसलिए BALCO और निगम को प्रमाणित करना होगा कि निर्माण या साइट तैयारी से पहले वैध EC मिल चुकी थी। यदि EC बाद में ली गई, केवल आवेदन किया गया था, अथवा किसी दूसरी BALCO परियोजना की EC को आधार बनाया गया, तो वह अनुपालन नहीं माना जा सकता।

मूल अनुमति समाप्त—क्या पुनः अनुमति मिली?

3 मई 2025 की भवन अनुमति में निर्माण स्वीकृति की अवधि एक वर्ष लिखी है। इसकी मूल अवधि लगभग 2/3 मई 2026 को समाप्त हो गई।  उपलब्ध सार्वजनिक दस्तावेजों में पदिमार की इस अनुमति का कोई स्पष्ट पुनर्वैधीकरण आदेश अभी सामने नहीं आया है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि नवीनीकरण निश्चित रूप से हुआ है।  लेकिन यह भी नहीं माना जा सकता कि बिना आदेश के अनुमति अपने-आप आगे बढ़ गई। BALCO और नगर निगम को सार्वजनिक करना चाहिए—

पुनर्वैधीकरण आवेदन की तारीख;
आवेदन संख्या;
पुनर्वैधीकरण शुल्क;
स्थल निरीक्षण रिपोर्ट;
वर्तमान निर्माण की प्रगति;
अनुमोदन आदेश का क्रमांक एवं दिनांक;
नवीनीकरण की नई अवधि;
EC और Fire NOC की उस समय की वैधता;

अवधि समाप्त होने के बाद किए गए निर्माण का विवरण। 2024 में रिसदा के लिए जारी अलग अनुमति, पदिमार की इस परियोजना का नवीनीकरण नहीं है।  यदि पुनर्वैधीकरण आदेश नहीं है तो अवधि समाप्त होने के बाद निर्माण किस अधिकारी की मौन अनुमति पर चल रहा है अब अनुमति देने वाले अधिकारी जवाब देंइस प्रकरण में केवल BALCO से प्रश्न करना पर्याप्त नहीं है। अनुमति तैयार करने, दस्तावेज  सत्यापित करने, तकनीकी परीक्षण करने और अंतिम स्वीकृति देने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित होनी चाहिए।

उनसे पूछा जाए—

1. बिना प्रदर्शित खसरा नंबर के भूमि सत्यापन कैसे हुआ?

2. “Plot No. 0” को वैध भूखंड पहचान किसने माना?

3. विकास-अनुज्ञा का नंबर और तारीख क्यों खाली छोड़ी गई?

4. ₹9,97,544 के अंतर के बावजूद अनुमति कैसे जारी हुई?

5. ₹32.69 करोड़ कर मांग के बीच No Dues किसने दिया?

6. पर्यावरणीय स्वीकृति किसने सत्यापित की?

7. Pre-Construction Fire NOC फाइल में है या नहीं?

8. वन और राजस्व विभाग से खसरा-वार प्रमाण लिया गया या नहीं?

9. सुप्रीम कोर्ट/CEC विवादित भूमि से गैर-अतिव्यापन किस अधिकारी ने प्रमाणित किया?

10. कोयला खनन एवं संभावित धंसान जोखिम की तकनीकी जाँच हुई या नहीं?

11. अनुमति समाप्त होने के बाद निर्माण निरीक्षण किसने किया?

12. पुनर्वैधीकरण हुआ तो आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं है?

13. BPMS में दस्तावेज अपलोड, जाँच और स्वीकृति किस-किस अधिकारी की लॉग-इन आईडी से हुई?

यह सिर्फ BALCO की परियोजना नहीं—यह नगर निगम की प्रशासनिक ईमानदारी और तकनीकी क्षमता की अग्निपरीक्षा है। ग्राम यात्रा की मांग—जाँच तक निर्माण पर अंतरिम रोक लगे ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क जनहित में मांग करता है कि— नगर निगम, राजस्व, वन, पर्यावरण, नगर तथा ग्राम निवेश, अग्निशमन और खनिज विभाग की संयुक्त समिति बनाई जाए;

परियोजना स्थल का तत्काल सीमांकन कराया जाए; खसरा-वार राजस्व एवं वन अभिलेख सार्वजनिक किए जाएँ; CEC/सुप्रीम कोर्ट विवादित क्षेत्र से GIS मिलान हो; EC, Fire NOC, विकास-अनुज्ञा और संरचनात्मक प्रमाणपत्र सार्वजनिक हों; खनन क्षेत्र, पुराने mine workings और subsidence risk की विशेषज्ञ जाँच हो; ₹9,97,544 शुल्क-अंतर का विशेष लेखा परीक्षण कराया जाए; अनुमति की तारीख पर BALCO की कर-बकाया और No Dues स्थिति सार्वजनिक हो; BPMS की डिजिटल फाइल एवं audit trail सुरक्षित किया जाए; वैध पुनर्वैधीकरण आदेश सामने आने तक निर्माण की वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जाए; आवश्यक स्वीकृतियाँ अनुपस्थित मिलने पर अनुमति निलंबित/निरस्त हो;

गलत दस्तावेज अथवा अनुचित लाभ की पुष्टि होने पर आवेदक के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो। खसरा खाली, विकास-अनुज्ञा खाली, टैक्स पर विवाद, फीस में अंतर और अनुमति की अवधि समाप्त—फिर भी निर्माण जारी!

कोरबा पूछ रहा है—यह 10 मंजिला आवासीय परियोजना है या नियमों की कब्र पर खड़ी होने वाली प्रशासनिक इमारत?

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button