बालको में युवाओं का रोजगार का ‘रोना’… धनंजय मिश्रा कॉरपोरेट अफसर का ‘मैं हूं डॉन’!!!!

युवा सड़क पर, आंदोलन मैदान में—और जिम्मेदार धनंजय मिश्रा अफसर पार्टी में? आखिर किसे दिखाया जा रहा है ‘डॉन’ वाला अंदाज!
भाजपा कार्यकर्ता सवाल पूछ रहे, NSUI आंदोलन कर रही, अधिवक्ता संघ भी मैदान में—फिर भी प्रबंधन तक जनता की आवाज पहुंच क्यों नहीं रही?
तीखा राजनीतिक-सामाजिक कटाक्ष | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा। बालको की धरती पर इन दिनों दो तस्वीरें एक साथ दिखाई दे रही हैं।
एक तस्वीर में स्थानीय युवा रोजगार के लिए आवाज उठा रहे हैं। सड़क, प्रदूषण और मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हैं। अलग-अलग संगठनों के लोग प्रबंधन की नीतियों के विरोध में मैदान में उतर रहे हैं।
और दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो/दृश्य को लेकर चर्चा है, जिसमें बालको-वेदांता प्रबंधन के धनंजय मिश्रा Chief Corporate Affairs and Administration एक आयोजन में “मैं हूं डॉन…” गीत गाते/उसका आनंद लेते दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
अब जनता कटाक्ष करे तो गलत क्या है—
युवाओं—तुम रोजगार मांगते रहो…
धनंजय मिश्रा साहब अभी ‘डॉन’ बनने में व्यस्त हैं!”
यह सवाल किसी व्यक्ति के गाना गाने या पार्टी करने पर नहीं है।
सवाल समय का है।
सवाल पद का है।
सवाल संवेदनशीलता का है।
धनंजय मिश्रा
जिस अधिकारी के पदनाम में ही “Corporate Affairs and Administration” जुड़ा हो, उसी संस्थान के खिलाफ स्थानीय मुद्दों को लेकर लगातार आवाज उठे और सार्वजनिक तस्वीर दूसरी कहानी कहती दिखाई दे—तो सवाल उठेंगे।
आखिर ‘डॉन’ वाला अंदाज किसके लिए?
जिला प्रशासन के लिए?
ज़िले के जनप्रतिनिधियों के लिए?
छत्तीसगढ़ सरकार के लिए?
बालको के बेरोजगार युवाओं के लिए?
आंदोलन कर रहे राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए?
अधिवक्ताओं के लिए?
स्थानीय जनता के लिए?
या फिर यह सिर्फ एक निजी कार्यक्रम में गाया गया गीत था, जिसका आंदोलनों से कोई संबंध ही नहीं?
यदि अंतिम बात सही है तो प्रबंधन सामने आकर संदर्भ स्पष्ट करे।
लेकिन तब भी एक बड़ा सवाल अपनी जगह रहेगा—
जिन युवाओं के भविष्य का सवाल दरवाजे पर खड़ा है, उनसे संवाद करने वाला कौन है?
युवा CV लेकर घूमे… और कॉरपोरेट तंत्र पार्टी करे?
स्थानीय युवाओं का मुद्दा भावनात्मक भाषणों से हल नहीं होगा।
प्रबंधन आंकड़े सार्वजनिक करे।
बालको और उससे जुड़ी ठेका कंपनियों में कुल कितने कर्मचारी कार्यरत हैं?
उनमें कोरबा जिले के कितने युवा हैं?
पिछले तीन वर्षों में कितने स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला?
कितने आउटसोर्सिंग और ठेका रोजगार में हैं?
कितने दूसरे जिलों अथवा राज्यों से हैं?
भर्ती का आधार और प्रक्रिया क्या है?
यही आंकड़े बताएंगे कि स्थानीय रोजगार के आरोपों में कितना दम है।
क्योंकि ‘मैं हूं डॉन’ तीन मिनट का गीत हो सकता है—लेकिन बेरोजगारी किसी परिवार के लिए वर्षों की लड़ाई है।
एक तरफ आंदोलन, दूसरी तरफ जश्न—बीच में जनता पूछ रही है: हमारी सुनने वाला कौन?
बालको-वेदांता जैसी बड़ी औद्योगिक संस्था से केवल उत्पादन और मुनाफे की अपेक्षा नहीं होती। जिस जमीन, संसाधन और सामाजिक परिवेश में उद्योग संचालित होता है, वहां के लोगों से संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है। और Corporate Affairs की असली परीक्षा भी यहीं होती है।
जनता नाराज हो तो उसके बीच जाइए।
युवा रोजगार मांगें तो आंकड़े रखिए।
प्रदूषण का आरोप हो तो रिपोर्ट सार्वजनिक कीजिए।
सड़क खराब हो तो समाधान बताइए।
लेकिन यदि इन सवालों के बीच जनता को पार्टी और “मैं हूं डॉन” वाला दृश्य दिखाई देगा तो कटाक्ष भी उतना ही धारदार होगा—
बालको में जनता परेशान…
युवा बेरोजगार…
सड़क पर आंदोलन…
और साहब—मैं हूं Don!”
वेदांता समुह के अनील अग्रवाल चेयरमैन को ये दिख नहीं रहा या ये खुद ही अपने अधिकारों को Don बना रहे??
अब बालको प्रबंधन को तय करना है कि उसकी पहचान संवाद करने वाले कॉरपोरेट संस्थान की बनेगी या जनता के सवालों से बेपरवाह व्यवस्था की।
क्योंकि कोरबा अब केवल यह नहीं पूछ रहा कि वीडियो में कौन-सा गाना बज रहा था।
कोरबा पूछ रहा है—स्थानीय युवाओं के रोजगार का हिसाब कहां है?
और जिस दिन ठेका कंपनियों के नाम, काम, मैनपावर और स्थानीय रोजगार के आंकड़े सार्वजनिक होंगे, उसी दिन पता चलेगा कि असली कहानी पार्टी की महफिल में है या रोजगार की फाइलों में।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क संबंधित अधिकारी एवं बालको-वेदांता प्रबंधन का पक्ष आमंत्रित करता है। वीडियो के संदर्भ और जनहित के मुद्दों पर उनका जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
अगली कड़ी—
“बालको की ठेका कंपनियों में आखिर किसका राज?
स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार—नाम, काम और आंकड़ों के साथ होगी पड़ताल!”
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