VEDANTA के हिसाब-किताब पर ₹51 करोड़ का सवाल!

SESL Steel के ITC पर GST विभाग की बड़ी आपत्ति—₹51.23 करोड़ का मामला, तीन वित्तीय वर्षों के आयात रिकॉर्ड जांच के घेरे में
₹6.73 करोड़ IGST और करीब ₹44.50 करोड़ Compensation Cess से जुड़ा विवाद; कंपनी कानूनी विकल्पों पर कर रही विचार
विशेष खोजी बिजनेस रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली/रांची। खनन और मेटल सेक्टर के दिग्गज Vedanta समूह से जुड़ी कंपनी एक बार फिर बड़े टैक्स विवाद को लेकर सुर्खियों में है।
Vedanta Iron & Steel Limited की सहायक कंपनी ESL Steel Limited को करीब ₹51.23 करोड़ के कथित अतिरिक्त Input Tax Credit (ITC) को लेकर केंद्रीय GST एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग, रांची से intimation मिला है।
मामला छोटा नहीं है।
विभागीय आपत्ति वित्त वर्ष 2020-21 से 2022-23 के बीच आयातित वस्तुओं पर लिए और इस्तेमाल किए गए ITC से संबंधित बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कुल विवादित रकम ₹51,23,19,275 है।
₹51,23,19,275 — आखिर विभाग ने किस हिसाब पर उठाई उंगली?
सामने आई जानकारी के अनुसार रकम में लगभग—
₹6.73 करोड़ — IGST
और
₹44.50 करोड़ — Compensation Cess
शामिल है।
यानी सवाल महज किसी छोटी अकाउंटिंग त्रुटि का नहीं, बल्कि तीन वित्तीय वर्षों के आयात और उस पर लिए गए करोड़ों रुपये के Input Tax Credit से जुड़ा है।
टैक्स अथॉरिटी का आरोप है कि कंपनी ने आयात के संबंध में उपलब्ध सीमा से अधिक ITC लिया और उसका उपयोग किया। हालांकि इस आरोप पर अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है और कंपनी को अपना पक्ष रखने का पूरा कानूनी अधिकार है।
DRC-01A ने बढ़ाई हलचल
मामला Form GST DRC-01A में जारी intimation से सामने आया है और इसे CGST Act के प्रावधानों के तहत कथित excess availment/utilisation of ITC से जोड़ा गया है।
यहीं बड़ा सवाल खड़ा होता है—
आयात दस्तावेजों में उपलब्ध ITC कितना था और कंपनी ने वास्तव में कितना ITC लिया?
₹51.23 करोड़ का अंतर विभाग की जांच में आखिर कैसे सामने आया?
क्या यह दस्तावेजों/रिटर्न के मिलान का विवाद है या टैक्स अथॉरिटी के पास कोई और आधार है?
इनका निर्णायक उत्तर कंपनी के जवाब और आगे की GST कार्यवाही से मिलेगा।
एक तरफ ₹515 करोड़ EBITDA की घोषणा, दूसरी तरफ ₹51 करोड़ की टैक्स आपत्ति इस घटनाक्रम का एक दिलचस्प वित्तीय पहलू भी है।
Vedanta Iron & Steel ने 29 जुलाई 2026 को जारी अपने Q1 FY27 परिणामों में ₹3,662 करोड़ का राजस्व, ₹515 करोड़ EBITDA और ₹121 करोड़ PAT घोषित किया था। कंपनी के अनुसार EBITDA साल-दर-साल 54% बढ़ा था।
और अब कुछ ही दिनों बाद उसकी सहायक ESL Steel के ITC को लेकर ₹51.23 करोड़ की विभागीय आपत्ति सामने आई है।
यानी निवेशकों के सामने तस्वीर के दो पहलू हैं—
एक ओर मजबूत कारोबारी नतीजे और दूसरी ओर टैक्स अनुपालन से जुड़ा करोड़ों रुपये का विवाद।
कंपनी का पक्ष भी महत्वपूर्ण—“Material Impact” की आशंका नहीं
कंपनी इस मामले का परीक्षण कर रही है और उपलब्ध कानूनी विकल्पों के अनुसार आगे कदम उठाने की बात कही गई है।
साथ ही कंपनी का आकलन है कि इस घटनाक्रम से उसकी वित्तीय, परिचालन अथवा अन्य गतिविधियों पर कोई material impact नहीं पड़ेगा।
इसलिए ₹51.23 करोड़ को अभी “सिद्ध टैक्स चोरी” या अंतिम देनदारी. कहना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
लेकिन सवाल फिर भी बना हुआ है—
अगर हिसाब सही है तो ₹51.23 करोड़ की आपत्ति आई क्यों?
और यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कर विभाग की आपत्ति को कंपनी अपने दस्तावेजों से गलत साबित कर देती है तो मामला अलग होगा। लेकिन यदि आगे की adjudication में विभाग का दावा कायम रहता है, तब इसके वित्तीय और कानूनी परिणामों का वास्तविक स्वरूप सामने आएगा।
एक के बाद एक Regulatory सवाल
ESL Steel के संबंध में हाल के दिनों में एक और regulatory development सामने आया है। उपलब्ध बाजार सूचना में ROC Ranchi द्वारा FY 2018-19 से संबंधित statutory disclosure के कथित उल्लंघन पर Show Cause Noticeका भी उल्लेख है।
अब उसके बाद करोड़ों के ITC को लेकर GST विभाग की आपत्ति ने कंपनी के regulatory compliance को फिर चर्चा में ला दिया है।
हालांकि दोनों मामले अलग-अलग कानून, अवधि और तथ्यों से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें एक ही उल्लंघन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अब ग्राम यात्रा के 5 सीधे सवाल
पहला— FY 2020-21 से 2022-23 के आयात रिकॉर्ड में ऐसा क्या मिला कि विभाग ने ₹51.23 करोड़ के ITC पर आपत्ति खड़ी की?
दूसरा—₹44.50 करोड़ के आसपास Compensation Cess वाला हिस्सा इतना बड़ा क्यों है?
तीसरा— कंपनी विभाग के सामने कौन-से दस्तावेज रखकर अपने ITC को वैध साबित करेगी?
चौथा— क्या मामला प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त होगा या आगे औपचारिक adjudication तक पहुंचेगा?
पांचवां— अंततः ₹51.23 करोड़ में से कितनी राशि, यदि कोई हो, वास्तविक देनदारी के रूप में कायम होती है?
₹51 करोड़ का सवाल अभी खुला है!
फिलहाल मामला आरोप और जवाब के बीच है।
न कंपनी को दोषी घोषित किया जा सकता है, न ₹51.23 करोड़ की विभागीय आपत्ति को नजरअंदाज किया जा सकता है।
अब असली कहानी कंपनी के जवाब और GST विभाग की अगली कार्रवाई से निकलेगी।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
VEDANTA की फाइलों पर नजर जारी…
अगली कड़ी—₹51.23 करोड़ के ITC विवाद की जड़ में क्या? आयात, IGST और Compensation Cess के पूरे गणित की पड़ताल।
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