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शिक्षा के मंदिरों पर कमर्शियल टैक्स का बोझ क्यों?

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भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, किराये के भवनों में संचालित स्कूलों को राहत देने की मांग

 

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बिलासपुर।  बिलासपुर में किराये के भवनों में संचालित निजी विद्यालयों पर लगाए जा रहे कमर्शियल टैक्स को लेकर अब विरोध तेज हो गया है। भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ, जिला बिलासपुर ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नाम कलेक्टर संजय अग्रवाल को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि शिक्षा के उद्देश्य से संचालित विद्यालयों से कमर्शियल टैक्स की वसूली तत्काल बंद की जाए।

 

 

ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार अनेक जनहितकारी योजनाएं चला रही है। स्कूली बच्चों को निःशुल्क पुस्तकें, गणवेश, जूते तथा शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत 25 प्रतिशत बच्चों को निःशुल्क  प्रवेश जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। ऐसे समय में निजी विद्यालयों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना शिक्षा व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जा सकता।

 

 

भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक एवं पूर्व पार्षद राजेश मिश्रा ने कहा कि शहर के अनेक विद्यालय किराये के मकानों में विभिन्न समितियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। पहले इन भवनों पर आवासीय (रेसीडेंशियल) टैक्स लिया जाता था, लेकिन अब नगर निगम बिलासपुर द्वारा इन्हें कमर्शियल श्रेणी में रखकर व्यावसायिक कर वसूला जा रहा है, जिससे विद्यालयों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ गया है।

 

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विद्यालयों को मान्यता शुल्क, शिक्षकों का वेतन, कर्मचारियों के मानदेय, रखरखाव तथा अन्य प्रशासनिक खर्च पहले से ही वहन करने पड़ते हैं। ऐसे में कमर्शियल टैक्स का बोझ शिक्षा संस्थानों के संचालन को और कठिन बना सकता है।

 

भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि शिक्षा के मंदिरों को व्यावसायिक प्रतिष्ठान मानकर लगाए जा रहे कमर्शियल टैक्स को तत्काल समाप्त किया जाए, ताकि विद्यालयों को राहत मिल सके और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।

ज्ञापन सौंपने वालों  में राजेश मिश्रा (जिला संयोजक, भाजपा शिक्षा प्रकोष्ठ), विद्यानंद साहू (जिला सहसंयोजक), वेदांत शुक्ला (सहसंयोजक) तथा भूषण प्रसाद पांडे (कोषाध्यक्ष) शामिल रहे।

उठी प्रमुख मांगें

 

किराये के भवनों में संचालित विद्यालयों से कमर्शियल टैक्स की वसूली तत्काल बंद की जाए।

शिक्षा संस्थानों को आवासीय श्रेणी के अनुरूप कर राहत प्रदान की जाए।

शिक्षा को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की नीति के अनुरूप विद्यालयों पर अनावश्यक कर भार समाप्त किया जाए।

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