बालको की धूल कोरबा के हिस्से, रोजगार बाहर वालों के नाम क्यों?

स्थानीय शिक्षित युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप, वेदांता-बालको की भर्ती नीति पर उठे गंभीर सवाल
“पहले स्थानीय योग्य युवा, विशेष कौशल न मिलने पर ही बाहरी भर्ती”—ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की जनहितैषी मुहिम
विशेष रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा। जिस धरती की कोख से खनिज निकाला जा रहा है, जिस शहर के लोग वर्षों से औद्योगिक प्रदूषण, धूल, भारी वाहनों के दबाव, सड़क दुर्घटनाओं, जल संकट और पर्यावरणीय प्रभावों को झेल रहे हैं, क्या उसी शहर के योग्य, शिक्षित और प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के लिए दर-दर भटकना चाहिए?
कोरबा में वेदांता समूह की कंपनी बालको की भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थानीय युवाओं और आम नागरिकों के बीच असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। युवाओं का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त योग्यता और प्रशिक्षण रखने वाले अभ्यर्थी उपलब्ध होने के बावजूद अनेक पदों पर बाहरी उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जा रही है।
यदि ये आरोप सही हैं तो यह केवल रोजगार का विषय नहीं, बल्कि कोरबा के हजारों युवाओं के भविष्य, सामाजिक न्याय और औद्योगिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर सवाल है।
कोरबा प्रदूषण झेले, रोजगार बाहरी ले जाएं—क्या यही औद्योगिक न्याय है?
बालको की औद्योगिक गतिविधियों से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों का कहना है कि उद्योग के कारण उत्पन्न धूल, प्रदूषण, ट्रैफिक दबाव और अन्य परेशानियां स्थानीय जनता झेलती है।
इसके बावजूद जब रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, तो स्थानीय युवाओं को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिलने की शिकायतें सामने आती हैं।
जनता पूछ रही है—
क्या कोरबा के लोग केवल उद्योगों का प्रदूषण, दुर्घटनाओं का खतरा और संसाधनों पर बढ़ता दबाव झेलने के लिए हैं?
क्या उनके बच्चों का उद्योगों में सम्मानजनक रोजगार पर कोई नैतिक और सामाजिक अधिकार नहीं है?
क्या स्थानीय योग्य युवाओं को दरकिनार कर बाहरी भर्ती करना न्यायसंगत है?
योग्यता के नाम पर मनमानी नहीं, पारदर्शिता जरूरी
स्थानीय रोजगार की मांग का अर्थ यह नहीं है कि अयोग्य व्यक्ति को केवल स्थानीय होने के आधार पर नियुक्त कर दिया जाए। मांग यह है कि समान योग्यता, अनुभव और दक्षता होने की स्थिति में स्थानीय युवाओं को पहली प्राथमिकता दी जाए।
कंपनी को स्पष्ट करना चाहिए कि—
भर्ती के लिए पदों का सार्वजनिक विज्ञापन कहां जारी किया जाता है?
कितने स्थानीय और कितने बाहरी अभ्यर्थियों ने आवेदन किया?
चयनित अभ्यर्थियों में स्थानीय युवाओं का प्रतिशत कितना है?
क्या भर्ती प्रक्रिया में किसी निजी एजेंसी या ठेकेदार की भूमिका है?
क्या स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण और कौशल विकास की कोई ठोस व्यवस्था बनाई गई है?
क्या कंपनी के पास सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्थानीय रोजगार नीति है?
पारदर्शिता के अभाव में भर्ती प्रक्रिया पर पक्षपात, सिफारिश, ठेकेदारी हस्तक्षेप और भेदभाव जैसे आरोप लगना स्वाभाविक है । इसलिए कंपनी को भर्ती संबंधी आंकड़े सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विशेष पदों के लिए स्थानीय उम्मीदवार नहीं, तभी हो बाहरी भर्ती
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की स्पष्ट जनहितैषी मांग है कि बालको-वेदांता में सामान्य, तकनीकी, प्रशासनिक और संविदा आधारित पदों पर स्थानीय योग्य युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
जिन विशिष्ट पदों के लिए कोरबा या छत्तीसगढ़ में आवश्यक विशेषज्ञता उपलब्ध न हो, केवल उन्हीं पदों पर बाहरी भर्ती की जाए। साथ ही कंपनी स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर भविष्य की आवश्यकता के अनुरूप तैयार करे।
कंपनी यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि स्थानीय युवाओं में कौशल की कमी है। एक बड़े उद्योग की सामाजिक जिम्मेदारी केवल नियुक्ति करना नहीं, बल्कि अपने आसपास के युवाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार योग्य बनाना भी है।
संविदा और ठेका श्रमिकों की भर्ती भी जांच के दायरे में आए
स्थानीय युवाओं की सबसे अधिक शिकायतें अक्सर ठेका कंपनियों के माध्यम से होने वाली भर्ती को लेकर सामने आती हैं। आरोप लगते रहे हैं कि पदों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती और भर्ती सीमित संपर्कों, सिफारिशों या बिचौलियों के माध्यम से कर ली जाती है।
इसलिए जांच केवल बालको की सीधी भर्ती तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। कंपनी परिसर में कार्यरत सभी ठेका एजेंसियों, सेवा प्रदाताओं और आउटसोर्सिंग कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
यह भी देखा जाना चाहिए कि समान कार्य करने वाले स्थानीय और बाहरी श्रमिकों को समान वेतन, सुविधाएं, सुरक्षा उपकरण और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां मिल रही हैं या नहीं।
जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
कोरबा जिला प्रशासन जिले के युवाओं के रोजगार हितों की अनदेखी नहीं कर सकता। प्रशासन को बालको प्रबंधन से भर्ती का विस्तृत विवरण मांगना चाहिए और एक संयुक्त समिति बनाकर स्थानीय रोजगार की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए।
समिति में जिला प्रशासन, श्रम विभाग, जिला रोजगार कार्यालय, कौशल विकास विभाग, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रभावित क्षेत्र के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए।
जांच में पिछले वर्षों की भर्ती, संविदा नियुक्ति, प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्थानीय अभ्यर्थियों की भागीदारी का परीक्षण होना चाहिए।
सवाल यह है कि स्थानीय युवाओं की शिकायतें लंबे समय से सामने आने के बाद भी जिला प्रशासन ने इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया?
जनप्रतिनिधियों को भी देना होगा जवाब
विधानसभा और संसद में बड़े उद्योगों, निवेश और विकास की बातें बार-बार होती हैं, लेकिन कोरबा के स्थानीय युवाओं को रोजगार में वास्तविक हिस्सेदारी दिलाने के लिए कितनी आवाज उठाई गई?
स्थानीय विधायक, सांसद, मंत्री, महापौर और अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को इस विषय पर अपना स्पष्ट पक्ष रखना चाहिए।
केवल उद्योगों के कार्यक्रमों में शामिल होना पर्याप्त नहीं है। जनप्रतिनिधियों की पहली जवाबदेही जनता और बेरोजगार युवाओं के प्रति है।
कोरबा के युवाओं का सवाल सीधा है—
जब हमारी जमीन, हमारा पानी, हमारा पर्यावरण और हमारी सड़कें उद्योग के लिए उपयोग हो रही हैं, तो रोजगार में हमारी हिस्सेदारी क्यों सुनिश्चित नहीं की जा रही?
सरकार बनाए स्पष्ट स्थानीय रोजगार नीति
राज्य सरकार को बड़े उद्योगों के लिए पारदर्शी स्थानीय रोजगार नीति बनानी चाहिए। इसमें स्थानीय योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता, भर्ती आंकड़ों का सार्वजनिक प्रकटीकरण, जिला स्तर पर शिकायत निवारण तंत्र और भेदभाव की स्थिति में निष्पक्ष जांच की व्यवस्था होनी चाहिए।
उद्योगों को समय-समय पर यह बताना चाहिए कि कुल कर्मचारियों में जिले, राज्य और बाहरी राज्यों के कितने लोग कार्यरत हैं।
केंद्र सरकार और श्रम मंत्रालय को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी कर्मचारी या अभ्यर्थी के साथ क्षेत्र, जाति, वर्ग, भाषा, लिंग अथवा किसी अन्य आधार पर गैरकानूनी भेदभाव न हो और लागू श्रम कानूनों का समान रूप से पालन किया जाए।
बालको प्रबंधन से ग्राम यात्रा के सीधे सवाल
1. बालको और उसकी ठेका कंपनियों में कुल कितने कर्मचारी कार्यरत हैं?
2. इनमें कोरबा जिले के स्थानीय कर्मचारियों की संख्या कितनी है?
3. पिछले पांच वर्षों में कितने स्थानीय और कितने बाहरी अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई?
4. क्या कंपनी के पास लिखित स्थानीय रोजगार नीति है?
5. भर्ती विज्ञापन किन माध्यमों से प्रकाशित किए जाते हैं?
6. स्थानीय युवाओं के कौशल विकास पर कंपनी ने कितना व्यय किया?
7. कितने प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण के बाद स्थायी या संविदा रोजगार मिला?
8. क्या कंपनी स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण के लिए तैयार है?
युवाओं के भविष्य के लिए ग्राम यात्रा की जनहितैषी मुहिम
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क स्पष्ट करता है कि यह मुहिम किसी क्षेत्र या राज्य के नागरिकों के विरोध में नहीं है। भारत का प्रत्येक नागरिक देश में कहीं भी रोजगार पाने का अधिकार रखता है।
मुद्दा यह है कि बड़े उद्योग अपने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र के योग्य युवाओं को अवसर, प्रशिक्षण और पारदर्शी भागीदारी दें। समान योग्यता होने पर स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देना सामाजिक न्याय, औद्योगिक सद्भाव और जिम्मेदार कॉर्पोरेट आचरण की दिशा में आवश्यक कदम है।
हमारी मांग
पहले स्थानीय योग्य युवा, विशेष योग्यता उपलब्ध न होने पर ही बाहरी भर्ती।
बालको-वेदांता अपनी भर्ती नीति सार्वजनिक करे।
जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच समिति गठित करे।
ठेका कंपनियों की भर्ती प्रक्रिया का भी परीक्षण हो।
स्थानीय युवाओं के लिए नियमित कौशल प्रशिक्षण और कैंपस भर्ती आयोजित हो।
भर्ती में भेदभाव की शिकायतों के लिए स्वतंत्र शिकायत प्रकोष्ठ बने।
स्थानीय जनप्रतिनिधि इस विषय को विधानसभा और संसद में उठाएं।
कोरबा का युवा दया नहीं मांग रहा। वह अपने क्षेत्र के विकास में न्यायपूर्ण भागीदारी, समान अवसर और सम्मानजनक रोजगार मांग रहा है।
अब बालको प्रबंधन, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को तय करना होगा कि वे बेरोजगार युवाओं की आवाज सुनेंगे या फिर कोरबा की नई पीढ़ी को उद्योगों की ऊंची दीवारों के बाहर अपने भविष्य के लिए तरसते देखते रहेंगे।
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