देखिए कलेक्टर साहब, देखिए नगर निगम आयुक्त…! करोड़ों के अस्पतालों तक जाने वाली सड़क बनी जनपीड़ा का प्रतीक

मरीजों को इलाज से पहले झेलनी पड़ रही परीक्षा, एम्बुलेंस में हिचकोले, डिलीवरी पेशेंट तक खतरे में
विशेष जनहित रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा। शहर के सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने वाली सड़क यदि खुद मरीजों के लिए पीड़ा का कारण बन जाए, तो यह केवल एक सड़क का मुद्दा नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य, प्रशासनिक जवाबदेही और शहरी विकास पर गंभीर प्रश्न है।
कोसाबाड़ी चौक के समीप स्थित वह एप्रोच रोड, जो कृष्णा हॉस्पिटल, न्यू कोरबा हॉस्पिटल (NKH), फिजिक्सवाला, बाइक शोरूम तथा मंगलम विहार कॉलोनी सहित कई प्रमुख संस्थानों तक पहुंचने का मुख्य मार्ग है, वर्षों से बदहाल स्थिति में है। यह सड़क आज भी ऐसी प्रतीत होती है मानो किसी दूरस्थ गांव का कच्चा मार्ग हो।
इलाज से पहले दर्द का सफर
इस सड़क से गुजरने वाले हर वाहन को गहरे गड्ढों और उबड़-खाबड़ रास्ते का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को होती है जिन्हें गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया जाता है।
– एम्बुलेंस में मरीजों को लगातार झटके लगते हैं।
– अस्थि रोगियों, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की पीड़ा कई गुना बढ़ जाती है।
– गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाते समय परिजनों में यह डर बना रहता है कि कहीं रास्ते में ही प्रसव की नौबत न आ जाए।
– बारिश के दौरान स्थिति और भी भयावह हो जाती है।
करोड़ों के अस्पताल… लेकिन सड़क किसकी जिम्मेदारी?
यह सवाल अब आम जनता पूछ रही है।
नगर निगम सीमा के भीतर स्थित इस मार्ग पर करोड़ों रुपये के निजी अस्पताल, प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और आवासीय कॉलोनी संचालित हैं। इसके बावजूद वर्षों से इस सड़क का स्थायी निर्माण नहीं हो सका।
यदि कॉलोनी विकसित हुई, अस्पताल बने और विभिन्न संस्थानों को अनुमति मिली, तो क्या इस मार्ग के विकास की कोई शर्त नहीं थी? यदि थी, तो उसका पालन किसने किया? यदि नहीं हुआ, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
सरकारें बदलीं, अधिकारी बदले… लेकिन सड़क नहीं बदली
राज्य में सरकारें बदलीं, जिला प्रशासन बदला, नगर निगम में नेतृत्व बदला, जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन यह सड़क आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि शहर के सबसे संवेदनशील मार्गों में शामिल इस सड़क को वर्षों से योजनाओं और प्राथमिकताओं से बाहर रखा गया।
एक बार अस्पताल प्रबंधन ने किया था प्रयास
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों पहले एक मरीज को हुई गंभीर असुविधा के बाद एनकेएच के डायरेक्टर डॉ. एस. चांदनी ने अपने स्तर पर सड़क को समतल कराने की पहल की थी। लेकिन यह केवल अस्थायी समाधान साबित हुआ। उसके बाद किसी भी जिम्मेदार विभाग ने स्थायी निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया।
जनता पूछ रही है पांच सीधे सवाल
1. करोड़ों रुपये के अस्पतालों तक जाने वाली सड़क आखिर आज तक पक्की क्यों नहीं बनी?
2. इस सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी नगर निगम, लोक निर्माण विभाग या किसी अन्य एजेंसी की है?
3. क्या संबंधित संस्थानों और कॉलोनी विकास के दौरान सड़क विकास की शर्तें तय की गई थीं?
4. यदि शर्तें थीं, तो उनका पालन क्यों नहीं कराया गया?
5. आखिर मरीजों को सुरक्षित और सम्मानजनक रास्ता कब मिलेगा?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की जनहित अपील
यह मुद्दा किसी एक अस्पताल या एक कॉलोनी का नहीं, बल्कि हजारों नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा प्रश्न है।
जिला कलेक्टर महोदय, नगर निगम आयुक्त महोदय और जनप्रतिनिधियों से विनम्र आग्रह है कि इस सड़क का तत्काल संयुक्त निरीक्षण कराया जाए, जिम्मेदारी तय की जाए और शीघ्र स्थायी सीसी अथवा डामर सड़क निर्माण की कार्रवाई प्रारंभ की जाए।
मरीज अस्पताल इलाज के लिए पहुंचते हैं, रास्ते में और बीमार होने के लिए नहीं।
अब फैसला प्रशासन को करना है—क्या यह सड़क यूं ही जनपीड़ा का प्रतीक बनी रहेगी, या करोड़ों के अस्पतालों तक जाने वाले इस मार्ग को भी विकास का अधिकार मिलेगा?
Live Cricket Info
