4,000 EVM जलकर राख! कोलकाता की भीषण आग ने खड़े किए कई बड़े सवाल 24 घंटे तक धधकती रही आग, बीच की मंजिलें सुरक्षित रहीं और EVM वाले फ्लोर तक पहुंच गई लपटें! आखिर कैसे?

विशेष रिपोर्ट
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब कोलकाता के अलीपुरद्वार क्षेत्र स्थित एक सरकारी भवन में लगी भीषण आग में लगभग 4,000 ईवीएम और वीवीपैट मशीनें जलकर नष्ट हो गईं।
बताया जा रहा है कि ये मशीनें पिछले विधानसभा चुनावों में 10 विधानसभा क्षेत्रों में उपयोग की गई थीं और सुरक्षित रखी गई थीं। लेकिन अब आग की इस घटना ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
24 घंटे तक जलती रही आग
आग इतनी विकराल थी कि अग्निशमन विभाग को आग पर काबू पाने में लगभग 24 घंटे लग गए।
लेकिन सबसे अधिक चर्चा उस तथ्य को लेकर हो रही है कि आग तीसरी मंजिल पर शुरू हुई बताई जा रही है, जबकि चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचा और आग सीधे उन ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गई जहां EVM और VVPAT मशीनें रखी थीं।
क्या यह सिर्फ एक हादसा है?
यही वह प्रश्न है जो अब राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यदि आग तीसरी मंजिल पर लगी थी तो:
- बीच की मंजिलें कैसे बच गईं?
- EVM रखे गए हिस्से को इतना अधिक नुकसान कैसे हुआ?
- क्या भवन में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी?
- क्या मशीनों के भंडारण संबंधी सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था?
पुलिस जांच शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
लोकतंत्र से जुड़ा संवेदनशील मामला
EVM केवल मशीन नहीं हैं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए हजारों मशीनों का एक साथ नष्ट होना स्वाभाविक रूप से जनचर्चा और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।
जनता जानना चाहती है
- आग का वास्तविक कारण क्या था?
- क्या यह तकनीकी खराबी थी?
- क्या सुरक्षा मानकों में कोई चूक हुई?
- क्या जिम्मेदारी तय होगी?
- और सबसे महत्वपूर्ण, क्या इस घटना से भविष्य की चुनावी व्यवस्थाओं के लिए कोई सबक लिया जाएगा?
सबसे बड़ा सवाल
4,000 EVM का जलना सिर्फ एक आग की घटना है या सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न?
इसका उत्तर अब जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्ष ही देंगे।
तब तक यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन दोनों के लिए चर्चा का बड़ा विषय बना रहेगा।
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