“CSR के नाम पर करोड़ों का खेल?” BALCO–Vedanta पर गंभीर सवाल, रिपोर्ट ने खोली कथित पारदर्शिता की परतें! 20 वर्षों के CSR मॉडल पर उठे सवाल, कई सालों की रिपोर्ट गायब होने का दावा

छत्तीसगढ़ के कोरबा स्थित भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO) और उसकी पैरेंट कंपनी Vedanta Group एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है।
एक स्वतंत्र CSR Analysis Report में दावा किया गया है कि कंपनी की CSR (Corporate Social Responsibility) व्यवस्था में कई बड़ी “Compliance Gaps” और पारदर्शिता संबंधी कमियां मौजूद हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, BALCO की वेबसाइट और सार्वजनिक दस्तावेजों में कई ऐसी जानकारियां अनुपस्थित हैं, जिन्हें भारतीय कंपनी कानून के तहत सार्वजनिक होना चाहिए था।
“CSR का सच या सिर्फ प्रचार?”
कंपनी वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण और ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावे करती रही है।
लेकिन स्वतंत्र विश्लेषण रिपोर्ट ने अब उन दावों की जमीनी और कानूनी सच्चाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट का दावा है कि:
- FY 2014-15 से FY 2018-19 तक की CSR Annual Reports सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं
- CSR खर्च का वर्षवार हिसाब नहीं
- 2% CSR Obligation बनाम वास्तविक खर्च का डेटा नहीं
- Independent Impact Assessment Report उपलब्ध नहीं
- CSR Committee की संरचना सार्वजनिक नहीं
- CSR Implementing Agencies ke Registration Number नहीं दिए गए
“करोड़ों का CSR खर्च… लेकिन जनता को हिसाब नहीं?”
Companies Act 2013 के अनुसार बड़ी कंपनियों को अपने औसत लाभ का कम से कम 2% CSR पर खर्च करना अनिवार्य है।
लेकिन रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि BALCO ने:
- वास्तविक CSR खर्च का विस्तृत सार्वजनिक खुलासा नहीं किया
- Unspent CSR Amount की जानकारी नहीं दी
- यह नहीं बताया कि बची राशि कहां ट्रांसफर हुई
रिपोर्ट ने इसे “Critical Severity” यानी बेहद गंभीर श्रेणी में रखा है।
“Employee Volunteering को भी CSR में दिखाया गया?”
रिपोर्ट का एक बड़ा दावा यह भी है कि BALCO ने “Employee Volunteering” को CSR गतिविधि के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि Schedule VII के अनुसार यह वैध CSR गतिविधि नहीं मानी जाती।
यदि इस मद में कंपनी खर्च दिखाती है, तो यह CSR खर्च की गलत श्रेणीकरण (Misclassification) माना जा सकता है।
“5 साल की रिपोर्ट गायब… आखिर क्यों?”
सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
रिपोर्ट के अनुसार इससे:
- जनता स्वतंत्र सत्यापन नहीं कर सकती
- नियामकीय अनुपालन की जांच मुश्किल हो जाती है
- पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं
“Impact Assessment नहीं… तो CSR का असर कैसे मापा गया?”
2021 के संशोधित नियमों के अनुसार बड़े CSR खर्च वाली कंपनियों को Independent Third-Party Impact Assessment कराना अनिवार्य है।
लेकिन रिपोर्ट का दावा है कि:
- BALCO की वेबसाइट पर कोई स्वतंत्र Impact Assessment उपलब्ध नहीं
- केवल आंतरिक Vedanta Sustainability Tool (VSAP) का उल्लेख है
- जबकि कानून स्वतंत्र बाहरी मूल्यांकन की अपेक्षा करता है
“स्थानीय जनता का हिस्सा कितना?”
कंपनी कहती है कि उसका CSR छत्तीसगढ़ के गांवों तक पहुंचा।
लेकिन रिपोर्ट पूछती है:
- कोरबा और आसपास कितना खर्च हुआ?
- अन्य राज्यों में कितना गया?
- “National Projects” पर कितना पैसा लगा?
इसका कोई स्पष्ट सार्वजनिक डेटा उपलब्ध नहीं बताया गया।
“20 Years CSR” Narrative पर भी सवाल
रिपोर्ट में कहा गया है कि BALCO “20 Years CSR” का प्रचार करती है, जबकि CSR कानून 2014 से लागू हुआ।
इससे ऐसा प्रभाव बनता है जैसे कंपनी लंबे समय से कानूनी CSR ढांचे के तहत काम कर रही हो।
जनता पूछ रही है…
- CSR का पैसा आखिर गया कहां?
- 5 वर्षों की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?
- Independent Audit क्यों नहीं हुआ?
- क्या CSR सिर्फ ब्रांडिंग बनकर रह गया?
- क्या स्थानीय जनता को उसका अधिकार मिला?
BALCO–Vedanta पर बढ़ सकता है दबाव
यदि रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो यह मामला:
- MCA (Ministry of Corporate Affairs)
- CSR Compliance Authorities
- Environmental Governance
- Corporate Transparency
जैसे राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों से जुड़ सकता है।
बड़ा निष्कर्ष
कोरबा की धरती से उठी यह रिपोर्ट अब केवल एक कंपनी का मामला नहीं रही, बल्कि यह सवाल बन चुकी है कि:
अब जनता जवाब चाहती है… और देश देख रहा है।
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