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चतुर्भुज सिरकट्टी धाम में नवनिर्मित श्री राम जानकी मंदिर में मुख्यमंत्री ने पूजा-अर्चना कर धर्मध्वज की स्थापना की

आश्रम के विकास के लिए मुख्यमंत्री ने की 50 लाख रुपये की घोषणा

 

गरियाबंद । चतुर्भुज सिरकट्टी पावन धाम स्थित नवनिर्मित भव्य श्री राम जानकी मंदिर में 51 कुंडीय श्रीराम चरित मानस महायज्ञ का भव्य आयोजन 6 से 12 जनवरी तक किया जा रहा है।

इसी क्रम में आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्री राम जानकी मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना कर प्रदेश के लिए सुख-समृद्धि कि कामना की। मुख्यमंत्री साय ने धार्मिक अनुष्ठान में आमंत्रित संत 108 रामगोपाल दास जी महाराज (देवरघटा, शिवरीनारायण), पूज्य संत 108 महंत सरजू शरण महाराज (राघवेन्द्र आश्रम, अयोध्या), पूज्य संत रामनारायण शरण महाराज (अयोध्या) तथा पूज्य संत उदयनाथ बाबा महाराज (कांडशर आश्रम, देवभोग), उपमुख्यमंत्री अरुण साव, मंत्र गुरु खुशवंत साहेब, राजिम विधायक रोहित साहू, विधायक दीपेश साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप की गरिमामय उपस्थिति में बटन दबाकर धर्मध्वज कि स्थापना की।

 

यह मंदिर हजारों श्रद्धालुओं के दान दाताओं के फल स्वरूप 10 सालों में निर्मित हुई है जो कि अयोध्या के राम मंदिर के तर्ज पर बनाया गया है जिसमें लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से राजस्थान के जयपुर के शिल्पकारों ने तैयार किया है। जो कि लगभग 22 हजार परिवारों के आर्थिक सहयोग से बना है। यह मंदिर छड़, सीमेंट, रेत जैसे अवयवों के उपयोग के बिना बनाया गया है जिसकी आयु 1000 वर्ष मानी जा रही है। इस अवसर पर उपस्थित सभी संत-महात्माओं, गणमान्य नागरिकों का मुख्यमंत्री ने स्वयं पुष्पहार से अभिनंदन किया।

 

मुख्यमंत्री साय ने अपने उद्बोधन में  आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन संत भुवनेश्वर शरण को नमन करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि चतुर्भुज सिरकट्टी धाम में मंगल कलश एवं धर्म ध्वजा की स्थापना का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने आश्रम निर्माण में सहयोग देने वाले आसपास के ग्रामों के 22 हजार परिवारों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश ऋषि-मुनियों, गीता, गौ माता और गंगा माता की भूमि है।

 

 

 

 

उन्होंने अपने जीवन प्रसंग साझा करते हुए बताया कि घर में सबसे बड़े पुत्र होने के कारण पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते मात्र 10 वर्ष की आयु में गुरु धनपति पंडा से गुरुदीक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को सार्थक दिशा दी। उन्होंने कहा कि जीवन में माता-पिता सबसे बड़े भगवान होते हैं, उनका सम्मान करना चाहिए तथा बच्चों को भी अच्छे संस्कार देना चाहिए। राजिम कुंभ कल्प के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में यह आयोजन छोटे स्वरूप में किया जाता था, जिसे वर्तमान शासनकाल में भव्य रूप प्रदान किया गया है।

 

 

 

उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश के समस्त शक्तिपीठों के विकास का कार्य निरंतर किया जा रहा है। इसी समरसता एवं आध्यात्मिक चेतना को आगे बढ़ाते हुए आश्रम में सत्संग एवं अनुष्ठान कार्यों के संचालन के लिए मुख्यमंत्री ने 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की।

 

आश्रम के मुख्य पीठाधीश महामंडलेश्वर संत गोवर्धन शरण व्यास ने कहा कि सिरकट्टी धाम धर्म, संस्कृति एवं संत भुनेश्वरी शरण महाराज की तपोभूमि है। जिसका चयन भारत भ्रमण के पश्चात सन 1962 में की गई थी।

 

 

 

यह आश्रम पुरातात्विक विभाग के अनुसार बंदरगाह जैसे व्यावसायिक स्थल के रूप में माना जाता है। यह धाम चतुर्भुज धाम है क्यों कि शिवरीनारायण, सिरकट्टीधाम, राजीवलोचन, सिरपुर महानदी के दाहिनी ओर स्थित है जिसका यह स्थल अभिन्न अंग है। गुरुदेव ने इस आश्रम में 3 चीज़ों के सपने सजोए थे। यज्ञशाला, गौशाला, पाठशाला जो कि आज साकार हो रहा है।

आयोजनकर्ता एवं आश्रम के मुख्य पीठाधीश महामण्डलेश्वर संत गोवर्धन शरण व्यास एवं आश्रम परिवार ने मुख्यमंत्री के आगमन पर धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि यह मंदिर क्षेत्रवाासियों के सुख-समृद्धि में वृद्धि एवं धार्मिक एवं सामाजिक समरसता में सदभावना लाएगी एवं सकरात्मक ऊर्जा का संचार करेगी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 
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