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मुख्यमंत्री के सचिव ने छत्तीसगढ़ की जनता को दिया ये संदेश

रायपुर। लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर भारतीय को निर्भीक, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होकर मतदान करना चाहिए। हमारे आज में लिए गए यही सही निर्णय कल की सटीक व्यवस्था का आधार मानते हैं। यही उद्देश्य रखते हुए हमने आज मतदान के महादान का संकल्प निभाया और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी सुनिश्चित की।

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यह बातें मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सचिव और कोरबा के पूर्व DM पी दयानंद ने सपत्नीक मतदान करने के बाद मतदाताओं को प्रोत्साहित करते हुए कही। लोकसभा निर्वाचन 2024 के तीसरे चरण के मतदान के दौरान उन्होंने वोट दिया। पी दयानंद मुख्यमंत्री के सचिव के साथ पावर कंपनी के चेयरमैन और  प्रदेश के ऊर्जा एवं जनसंपर्क सचिव के पद को भी सुशोभित कर रहे हैं। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती शैलजा के साथ देवेंद्र नगर ऑफिसर्स कॉलोनी रायपुर के आदर्श मतदान केंद्र क्रमांक 52 में अपने मताधिकार का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी नागरिकों को निर्भीक, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष होकर अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए। वर्ष 2006 बैच के आईएएस अधिकारी पी दयानंद अपनी कड़क कार्यशैली, तेज तर्रार व्यक्तित्व और बेदाग छवि की पहचान रखने वाले पी दयानंद ने बहुत ही मजबूती के साथ वापसी की। ईमानदार और साफ सुथरी छवि के अफसर कहे जाने वाले पी दयानंद को हमेशा से नतीजे देने वाले आईएएस में गिना जाता है।

बढ़ते गए कीर्तिमान और ऐसे हासिल किया यह मुकाम

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सचिव की जिम्मेदारी के साथ प्रदेश के ऊर्जा सचिव एवं छत्तीसगढ़ पॉवर कम्पनीज़ का अध्यक्ष पद हासिल करने वाले आईएएस पी दयानंद यूं ही इस मुकाम पर नहीं पहुंचे। इसके लिए उन्होंने कहीं कोई शॉर्ट कट या जोड़ तोड़ का रास्ता भी नहीं अपनाया, बल्कि 17 साल अपने काम में उसी समर्पण से जुटे रहे, जैसी एक आईएएस अफसर से अपेक्षा की जाती है। अपने सिद्धांतों के लिए उन्होंने सदा नो कॉम्प्रोमाइज कहा और उनके लिए मंत्रियों से भी भीड़ गए। धुर नक्सल क्षेत्र सुकमा हो, ऊर्जानगरी  कोरबा या फिर न्यायधानी कहे जाने वाले सघन राजनीतिक गढ़ बिलासपुर, अपनी कलेक्टरी लेकर जहां से भी गुजरे, एक-एक कर नए कीर्तिमान भी गढ़ते गए।

पूर्व मंत्री जयसिंह से भिड़ गए पर उसूलों से नहीं किया समझौता

आईएएस पी दयानंद ने कभी अपने उसूलों के लिए समझौता न किया, बल्कि अधिकारों के लिए लड़ जाने से भी पीछे नहीं हटे। इसके लिए उन्हें पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के निशाने पर भी आना पड़ा। पिछली बार सरकार बदली, तब वह  कोरबा के बिलासपुर के कलेक्टर थे। फिर उन्हें प्रबंध संचालक समग्र शिक्षा और बाद में सचिव स्वास्थ्य शिक्षा बना दिया गया। इसके बाद जब उन्होंने वापसी की, तो सीधे सीएमओ में शामिल हुए यहां सचिव की कमान से लेकर सीएसईबी के चेयरमैन की जिम्मीदारी का बखूबी निर्वहन कर रहे है। मूलतः बिहार के सासाराम के रहने वाले पी.दयानंद की गिनती तेज तर्रार IAS अफसरों में की जाती है। सुकमा,  कोरबा, बिलासपुर सहित प्रदेश के चार जिलों की कमान संभाल चुके आईएएस अफसर पी.दयानंद को शिक्षा के क्षेत्र में एजुकेशन हब के जरिए बेहतर शिक्षा व्यवस्था की नींव रखने के लिए भी पहचाना जाता है। 2006 बैच के IAS अफसर पी.दयानंद ने अपने प्रोबेशन पीरियड नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिला में जिला पंचायत सीईओ के तौर पर पूरा किया। इसके बाद वे सुकमा जिला की कमान संभालते हुए कलेक्टर बने और शिक्षा के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य किए।

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