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कोरबा तिहरा हत्याकांड : पुलिस के खुलासे के पीछे कितने अधूरे सच ? तंत्र-मंत्र की आड़ या सोची-समझी साजिश, जवाब अब भी अधूरे

 

कोरबा।
थाना उरगा क्षेत्र में हुए तिहरे हत्याकांड को लेकर पुलिस ने भले ही पूरे आत्मविश्वास के साथ मामले का “खुलासा” कर दिया हो, लेकिन यह दावा अब भी शहर के बड़े हिस्से को संतुष्ट नहीं कर पा रहा है। पुलिस की कहानी फाइलों में भले पूरी दिख रही हो, मगर ज़मीनी हकीकत में लोगों के सवाल जस-के-तस बने हुए हैं। यही वजह है कि कोरबा में हर चर्चा का केंद्र अब एक ही सवाल बन गया है — क्या सच वाकई वही है, जो पुलिस बता रही है ?

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पुलिस के अनुसार तंत्र-मंत्र और झरन विधि के नाम पर 5 लाख रुपये को 2 करोड़ 50 लाख रुपये करने का लालच देकर तीन लोगों को फार्म हाउस बुलाया गया और नायलॉन रस्सी से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी गई। छह आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ इसे सुलझा हुआ केस बताया जा रहा है। लेकिन जिस तरह इस जघन्य वारदात को एक “सीधी-सादी तंत्र-क्रिया” तक सीमित कर प्रस्तुत किया गया है, वह कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

अशरफ मेमन : क्या कहानी उनके स्वभाव से मेल खाती है ?

इस पूरे मामले का सबसे अहम चेहरा अशरफ मेमन हैं। अशरफ को जानने वाले लोग साफ कहते हैं कि वह किसी भी फैसले में बेहद सतर्क रहने वाले कारोबारी थे। ऐसे व्यक्ति का तंत्र-मंत्र के नाम पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेना और दो लोगों की हालत बिगड़ते देखने के बाद भी तीसरे नंबर पर अंदर जाकर अपने गले में फंदा डलवा लेना — यह बात लोगों के गले से नीचे नहीं उतर रही है।

सवाल यह भी है कि अगर अशरफ तीसरे नंबर पर अंदर गए, तो क्या उन्होंने पहले दो लोगों की स्थिति नहीं देखी ? या फिर कमरे के भीतर हालात ऐसे थे कि विरोध या पीछे हटने की कोई गुंजाइश ही नहीं बची थी ?

कमरे के भीतर की कहानी में कई खाली जगहें

पुलिस का दावा है कि एक कमरे में तंत्र-क्रिया हो रही थी और बाहर खड़े सह-आरोपी रस्सी खींच रहे थे। लेकिन इस कथित प्रक्रिया में कई ऐसे बिंदु हैं, जो जांच को अधूरा साबित करते हैं —
पहला व्यक्ति जब बेहोश हुआ, तब प्रक्रिया तुरंत क्यों नहीं रोकी गई ?
दूसरे व्यक्ति की हालत बिगड़ने के बाद भी तीसरे को अंदर बुलाने की क्या मजबूरी थी ?
क्या यह सब कुछ मृतकों की पूरी होश-हवास में संभव था ?

ये सवाल इसलिए अहम हैं क्योंकि अदालत में यही बिंदु पूरे केस की दिशा तय करेंगे।

खिलाया-पिलाया गया ? इस एंगल पर चुप्पी क्यों

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण नायलॉन रस्सी से दम घुटना बताया गया है, लेकिन शरीर पर चोट-खरोंच के निशानों को लेकर पुलिस की ओर से अब तक कोई विस्तृत और ठोस जवाब सामने नहीं आया है।
यही वजह है कि यह आशंका लगातार गहराती जा रही है कि कहीं मृतकों को पहले किसी तरह का नशीला या अचेत करने वाला पदार्थ तो नहीं दिया गया ? यदि ऐसा है, तो पूरी पुलिसिया कहानी एक अलग ही दिशा में चली जाती है।

क्या असली निशाना सिर्फ अशरफ थे ?

शहर में यह चर्चा भी तेज़ है कि इस पूरे हत्याकांड का मुख्य टारगेट अशरफ मेमन ही थे। आशंका जताई जा रही है कि बाकी दो लोगों की हत्या सिर्फ इसलिए की गई, ताकि कोई गवाह न बचे और पूरे मामले को तंत्र-मंत्र की असफल प्रक्रिया बताकर ढक दिया जाए।

लोग सवाल कर रहे हैं —
क्या अशरफ और आरोपियों के बीच कोई पुराना लेन-देन या विवाद था ?
क्या इस गिरोह का पहले भी ऐसा कोई इतिहास रहा है ?
क्या पुलिस ने इस एंगल से उतनी गहराई से जांच की, जितनी अपेक्षित थी ?

पुलिस का दावा मजबूत, लेकिन कहानी कमजोर ?

पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है और नायलॉन रस्सी, तंत्र-मंत्र सामग्री, वाहन, मोबाइल फोन व नकदी जब्त करने की बात कही है। ये तथ्य अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सिर्फ गिरफ्तारी और बरामदगी से कोई केस मजबूत नहीं हो जाता।

कानून के जानकारों का मानना है कि अगर जांच में मौजूद इन खाली जगहों को अदालत में ठोस सबूतों से नहीं भरा गया, तो बचाव पक्ष इन्हीं सवालों को अपना सबसे बड़ा हथियार बना सकता है।

अदालत में होगी असली परीक्षा

फिलहाल पुलिस भले ही आश्वस्त दिखाई दे, लेकिन इस पूरे मामले की असली परीक्षा अदालत में होगी। वहीं यह तय होगा कि पुलिस की यह कहानी न्याय की कसौटी पर कितनी टिकाऊ साबित होती है।

कोरबा आज सिर्फ तीन मौतों का शोक नहीं मना रहा, बल्कि उस सवाल से जूझ रहा है जिसका जवाब अब भी अधूरा है —
उस कमरे में आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसे अब तक पूरी तरह सामने नहीं लाया गया ?


गिरफ्तार आरोपियों के नाम

  1. आशीष दास (24 वर्ष), निवासी – कमेल बिहार, बिलासपुर
  2. राजेन्द्र जोगी (75 वर्ष), निवासी – जरहाभांठा, जिला बिलासपुर
  3. केशव सूर्यवंशी (55 वर्ष), निवासी – घुरू, गोकुलधाम, सकरी, बिलासपुर
  4. अश्वनी कुर्रे (42 वर्ष), निवासी – अमेरि, थाना सकरी
  5. संजय साहू उर्फ लव कुमार साहू (46 वर्ष), निवासी – मोदर, थाना सीपत
  6. भागवत प्रसाद (48 वर्ष), निवासी – मुड़ापार बाजार, मूल निवासी गवरा पंतोरा, जिला जांजगीर-चांपा

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