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कोरबा में भू-माफिया का नया खेल! कूट रचना कर हड़प रहा है गैर-आदिवासी की जमीन, तीन FIR के बाद भी बेलगाम चेतन चौधरी

यह पहला मामला नहीं है। पहले भी चेतन ने अपने स्टाफ को फर्जी आदिवासी बताकर पहाड़ी कोरवा की जमीन कब्जा कर ली थी। जांच में महिला का आदिवासी प्रमाण पत्र फर्जी निकला और तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। इसके बावजूद चेतन चौधरी ने न सिर्फ जमीन बल्कि मकान और घरेलू सामान तक पर अवैध कब्जा जमा लिया।

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कोरबा। खुद को कानून से ऊपर समझने वाला चेतन चौधरी एक बार फिर ज़मीन हड़पने के संगीन आरोपों में घिर गया है। इस बार गैर-आदिवासी महिला शशिकला जायसवाल की ज़मीन पर फर्जीवाड़ा कर कब्जा करने की कोशिश का खुलासा हुआ है। पहले भी संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरवा की जमीन हड़पने पर FIR दर्ज हो चुकी है, लेकिन प्रशासनिक ढिलाई का नतीजा है कि चेतन अब एक के बाद एक जमीन पर कब्जा करने की हिमाकत कर रहा है।


झूठी चौहद्दी, बदला नक्शा, कूट रचना – दस्तावेजों में खुली साजिश

शिकायतकर्ता अमित जायसवाल द्वारा जिलाधीश को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि ग्राम कोरबा स्थित खसरा नंबर 322/7 की 0.081 हेक्टेयर ज़मीन पर चेतन चौधरी ने अवैध कब्जा कर लिया है। चेतन ने 2007 में एक भूमि की रजिस्ट्री कराई, लेकिन चौहद्दी में चालाकी से फर्जी नाम डाल दिए – ताकि बगल की जमीन को अपनी बताकर कब्जे की जाल बिछा सके।

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इतना ही नहीं, नक्शे में भी हेराफेरी की गई। मुख्य सड़क से अंदर की भूमि को “मुख्य सड़क से लगी हुई” दिखाकर उसकी वैल्यू और लोकेशन को बदलने की साजिश की गई। यह न सिर्फ दस्तावेज़ीय अपराध है, बल्कि राजस्व प्रणाली में भी फर्जीवाड़ा है।


तहसील का स्टे आदेश भी ठेंगे पर, कोर्ट की अवमानना की ओर बढ़ते कदम

शशिकला जायसवाल की शिकायत पर तहसीलदार कोरबा ने चेतन चौधरी को भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण रोकने का स्पष्ट आदेश दिया है और कोर्ट में दस्तावेज़ों के साथ पेश होने को कहा है। लेकिन आदेश के बाद भी चेतन ने खुलेआम निर्माण जारी रखा है — जो कोर्ट की सीधी अवमानना है।

 

राजस्व निरीक्षक और हल्का पटवारी को निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर चेतन का निर्माण जारी है। सवाल यह है कि क्या कोर्ट के आदेश की अब कोई अहमियत बची है? क्या भू-माफियाओं को खुली छूट दी जा रही है ?


पहले भी पहाड़ी कोरवा की जमीन हड़प चुका है चेतन, आदिवासी स्टेटस फर्जी निकला

यह पहला मामला नहीं है। पहले भी चेतन ने अपने स्टाफ को फर्जी आदिवासी बताकर पहाड़ी कोरवा की जमीन कब्जा कर ली थी। जांच में महिला का आदिवासी प्रमाण पत्र फर्जी निकला और तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। इसके बावजूद चेतन चौधरी ने न सिर्फ जमीन बल्कि मकान और घरेलू सामान तक पर अवैध कब्जा जमा लिया।

इस मामले में एससी-एसटी एक्ट समेत तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं, लेकिन उसके दुस्साहस में कोई कमी नहीं आई है। चेतन चौधरी अब भी उस जमीन और मकान को खाली नहीं कर रहा है।


क्या प्रशासन चेतन चौधरी को राजनीतिक संरक्षण दे रहा है ?

लगातार तीन मामलों में एफआईआर, कोर्ट के आदेश की अवहेलना, नक्शा फर्जीवाड़ा, चौहद्दी की कूट रचना – सब कुछ सामने होने के बावजूद अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। क्या चेतन चौधरी को किसी राजनैतिक ताकत का संरक्षण प्राप्त है ? या फिर प्रशासन की आंखें मूंद ली गई हैं ?


प्रशासन और न्यायालय से मांग :

  1. चेतन चौधरी के सभी दस्तावेजों की उच्चस्तरीय जांच हो।
  2. कोर्ट के आदेश की अवमानना पर तत्काल गिरफ्तारी हो।
  3. तीनों FIR की स्टेटस रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
  4. पहाड़ी कोरवा जमीन कब्जे के मामले में पुनः कड़ी कानूनी कार्यवाही हो।
  5. भूमि की पैमाइश कर वास्तविक कब्जेदार को कब्जा दिलाया जाए।

कोरबा की जनता जानना चाहती है : कब तक चेतन चौधरी जैसे भू-माफिया कानून को ठेंगा दिखाते रहेंगे ? क्या प्रशासन चेतन के खिलाफ निर्णायक कदम उठाएगा या फिर आम जनता को ही सब्र की सौगात दी जाएगी ?

 

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