तस्वीरों से छेड़छाड़, बदनामी का दबाव! बिलासपुर में पोर्टल संचालक गिरफ्तार, कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की जाँच

व्यवसायी की फोटो को तांत्रिक वेशभूषा में बदलकर भ्रामक खबरें चलाने का आरोप। सिरगिट्टी पुलिस ने रायपुर से दीपक टंडन उर्फ अंबेडकर टंडन को पकड़ा, दो मोबाइल जब्त। सह-आरोपियों की भूमिका भी जाँच के दायरे में।
बिलासपुर | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क खबर प्रकाशित करने के नाम पर किसी की तस्वीर बदलना, उसे अपमानजनक दावों के साथ प्रसारित करना और फिर बदनामी का दबाव बनाना—बिलासपुर में सामने आया मामला डिजिटल माध्यमों के इसी कथित दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तस्वीर में छेड़छाड़ कर व्यवसायी की प्रतिष्ठा धूमिल करने और ब्लैकमेलिंग के आरोप में सिरगिट्टी पुलिस ने एक वेब पोर्टल संचालक को गिरफ्तार किया है।
7 नवंबर 2026 के दैनिक भास्कर, बिलासपुर संस्करण में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने ‘द हनी बैजर न्यूज’ वेब पोर्टल के संचालक दीपक टंडन उर्फ अंबेडकर टंडन, उम्र 46 वर्ष, को रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर स्थित एक अपार्टमेंट से गिरफ्तार किया। मामले में उसके साले सहित अन्य आरोपियों के फरार होने की जानकारी दी गई है।
महाराणा प्रताप नगर, तिफरा निवासी व्यवसायी मणीशंकर पांडेय ने 29 अक्टूबर को सिरगिट्टी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उनकी तस्वीर को एआई तकनीक से तांत्रिक वेशभूषा में बदला गया और फिर पोर्टल तथा सोशल मीडिया पर वशीकरण एवं तंत्र-मंत्र से जुड़ी भ्रामक और अपमानजनक बातें प्रसारित की गईं। शिकायत में आरोप लगाया गया कि इसका उद्देश्य उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना और ब्लैकमेल करना था। इस मामले का गंभीर पहलू तस्वीर के साथ जोड़ा गया कथित झूठा घटनाक्रम है। डिजिटल तकनीक से तैयार दृश्य को वास्तविक मान लेने पर किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, परिवार और कारोबार पर असर पड़ सकता है। अब जाँच में यह स्पष्ट होना है कि तस्वीर किसने बदली, उसे किसने प्रकाशित कराया और कथित ब्लैकमेलिंग में किन लोगों की क्या भूमिका थी।
रिपोर्ट के अनुसार, डीआईजी और एसएसपी के निर्देश पर पुलिस ने छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम की धारा 4 और 5 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) के तहत दीपक टंडन, कोमल प्रसाद चौबे और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन धाराओं और आरोपों का विवरण समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। एफआईआर की प्रति इस खबर के लिए उपलब्ध नहीं है। पुलिस ने आरोपी से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। प्रकाशित रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से दावा है कि उनमें मीडिया संस्थानों और अधिकारियों से संबंधित तस्वीरें, वीडियो तथा ऑडियो क्लिप मिले हैं। इन फाइलों का स्रोत, प्रामाणिकता और कथित ब्लैकमेलिंग से संबंध जाँच का विषय है। रिपोर्ट में किसी विशिष्ट रकम की माँग या भुगतान का विवरण नहीं दिया गया है।
सिरगिट्टी पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जब्त मोबाइलों की जाँच और सह-आरोपियों तक पहुँचना महत्वपूर्ण होगा। शिकायतकर्ता की तस्वीर में कथित बदलाव से लेकर उसके प्रसार और दबाव बनाने के आरोप तक, हर कड़ी का दस्तावेजी तथा डिजिटल साक्ष्यों से मिलान होना चाहिए। यदि अन्य लोगों को भी इसी तरीके से निशाना बनाया गया है, तो उनके प्रकरणों की भी तथ्यपरक जाँच आवश्यक है।
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