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नरईबोध का पुनर्वास या जोखिम की बसाहट? ओबी डंप के नीचे निर्माण, सुरक्षा और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल

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मिट्टी भराव, कॉम्पैक्शन, परिवहन दूरी और पेड़ों की कटाई को लेकर कलेक्टर से शिकायत; भूविस्थापितों को बसाने से पहले स्वतंत्र तकनीकी जांच और निर्माण रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग

 

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कोरबा।   ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क   खदान विस्तार के लिए अपना गांव छोड़ने वाले परिवारों को नई बसाहट में सुरक्षा और स्थायित्व मिलना चाहिए। लेकिन एसईसीएल की गेवरा परियोजना से प्रभावित नरईबोध के लिए विकसित किए जा रहे नए पुनर्वास स्थल को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि बसाहट का विकास पहले से मौजूद ओवरबर्डन यानी ओबी डंप की तलहटी से सटाकर किया जा रहा है। इसके साथ मिट्टी भराव की गुणवत्ता, संघनन, मिट्टी लाने की दूरी और पेड़ों की कटाई पर भी सवाल उठाए गए हैं।

सवाल केवल निर्माण की गुणवत्ता का नहीं, वहां बसने वाले परिवारों की दीर्घकालिक सुरक्षा का है। क्या इस स्थल की उपयुक्तता और डंप की स्थिरता का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण कराया गया है? यदि कराया गया है, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाए?

डंप की तलहटी में बसाहट: सुरक्षा का आधार क्या है?

 

शिकायतकर्ता एवं पर्यावरण विभाग के सांसद प्रतिनिधि बताए गए शेत मसीह ने आरोप लगाया है कि पुनर्वास ग्राम का विकास ओबी डंप के अत्यंत निकट किया जा रहा है। उनकी आशंका है कि डंप से मिट्टी खिसकने अथवा मलबा आने की स्थिति में भविष्य की बसाहट प्रभावित हो सकती है।   शिकायत में जटराज क्षेत्र में पूर्व में मिट्टी डंप का मलबा सड़क पर आने की घटना का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि उस घटना की परिस्थितियों और नरईबोध स्थल की तकनीकी समानता की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

नरईबोध में वास्तविक जोखिम का निर्धारण विशेषज्ञ जांच से ही होगा। इसके लिए डंप की ऊंचाई और ढलान, बसाहट से दूरी, जलनिकासी, मिट्टी की प्रकृति तथा स्थिरता संबंधी अध्ययन सामने आना जरूरी है। परिवारों को बसाने से पहले इन प्रश्नों का लिखित और तकनीकी उत्तर मिलना चाहिए।

मिट्टी कहां से आई, भुगतान किस दूरी का होगा?

 

शिकायत में निविदा का हवाला देते हुए कहा गया है कि विकास कार्य के लिए 1,65,650 घनमीटर मिट्टी एक किलोमीटर तथा 3,36,600 घनमीटर मिट्टी दस किलोमीटर की दूरी से लाई जानी थी। इसमें ₹178.69 प्रति घनमीटर की दर का भी उल्लेख किया गया है।  आरोप है कि निर्धारित स्रोतों से मिट्टी लाने के बजाय पूरी अथवा बड़ी मात्रा में मिट्टी पास के ओबी डंप से उठाई गई। शिकायतकर्ता ने इस कार्य में ठेका कंपनी और प्रभारी अभियंता की कथित मिलीभगत की जांच मांगी है।

इन आरोपों की पुष्टि मूल निविदा, स्वीकृत दरों, मिट्टी के अनुमोदित स्रोत, माप पुस्तिका और बिलों के मिलान से होगी। उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं है कि बताई गई दर किन मदों पर लागू है तथा कितना भुगतान वास्तव में किया जा चुका है।  यदि मिट्टी नजदीकी डंप से ली गई, तो रिकॉर्ड में उसका स्रोत और वास्तविक परिवहन दूरी क्या दर्ज है? क्या स्रोत बदलने की सक्षम स्वीकृति ली गई? क्या बिल वास्तविक कार्य के अनुरूप बनाए गए? यही प्रश्न जांच का केंद्र होने चाहिए।

कॉम्पैक्शन पर शिकायत: भराव की मजबूती किसने जांची?

 

शिकायत का एक प्रमुख बिंदु मिट्टी भराव का संघनन, यानी कॉम्पैक्शन है। आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परतों में भराव और संघनन करने के बजाय कुछ स्थानों पर लगभग छह से सात मीटर ऊंचाई तक मिट्टी जमा कर दी गई।  यदि भराव का संघनन निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं हुआ है, तो भविष्य में जमीन बैठने और उस पर बनने वाली सड़कों, नालियों, कल्वर्ट तथा अन्य संरचनाओं की मजबूती प्रभावित होने की आशंका की जांच जरूरी है।   हालांकि केवल भराव की ऊंचाई देखकर उसकी गुणवत्ता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए स्वीकृत तकनीकी विनिर्देश, परतवार कार्य का रिकॉर्ड, नमी और घनत्व परीक्षण तथा गुणवत्ता नियंत्रण रिपोर्ट देखनी होगी।

एसईसीएल बताए—भराव की जांच किसने की, कितने परीक्षण हुए और किस अधिकारी ने कार्य की गुणवत्ता प्रमाणित की?

डंप से मिट्टी निकालने और पेड़ काटने की अनुमति किसने दी?

 

शिकायत में पुनर्वास स्थल और ओबी डंप पर पेड़ काटे जाने का आरोप भी लगाया गया है। दावा है कि आवश्यक अनुमति लिए बिना कटाई की गई और डंप से मिट्टी निकाली गई।  इस आरोप की जांच में भूमि की श्रेणी, पेड़ों की संख्या, कटाई की अनुमति और संबंधित विभागों के अभिलेख सामने आने चाहिए। साथ ही यह भी जांचा जाए कि डंप से मिट्टी निकालने का कार्य स्वीकृत योजना के अनुसार हुआ या नहीं और उससे ढलान की स्थिरता पर क्या प्रभाव पड़ा।  डंप को निर्माण सामग्री का स्रोत बनाने से पहले सुरक्षा का आकलन हुआ था या नहीं—इसका जवाब दस्तावेजों से मिलना चाहिए।

पहले काम पर रोक, फिर शुरुआत—कमियां दूर होने का प्रमाण कहां है?

शिकायतकर्ता के अनुसार, पूर्व में ग्रामीणों की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए तत्कालीन कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जुलाई में कार्य पर रोक लगाई थी और सितंबर में कार्य दोबारा शुरू हुआ।   इस घटनाक्रम की पुष्टि संबंधित आदेशों से आवश्यक है। यदि काम रोका गया था, तो रोक के कारण क्या थे? दोबारा काम शुरू करने से पहले किन कमियों को दूर कराया गया? अनुपालन का निरीक्षण किसने किया और किस आधार पर अनुमति दी गई?  प्रशासन को रोक और पुनः कार्य प्रारंभ करने से संबंधित आदेश तथा निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए।

तकनीकी अपात्रता से सबसे कम बोली तक: निर्णयों का रिकॉर्ड सामने आए

 

शिकायत के मुताबिक, निविदा में आठ कंपनियों ने भाग लिया था। आरकेटीसी–कीस्टोन जेवी सहित कुछ कंपनियों को प्रारंभिक तकनीकी मूल्यांकन में अपात्र घोषित किया गया। इसके बाद आरकेटीसी–कीस्टोन जेवी ने स्वतंत्र बाह्य मॉनिटरों के समक्ष मामला रखा और बाद की प्रक्रिया में उसे पात्र मानते हुए वित्तीय बोली में सबसे कम बोलीदाता बताया गया।  अपील अथवा समीक्षा के बाद किसी कंपनी को पात्र पाया जाना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन प्रारंभिक और बाद के निर्णयों का आधार स्पष्ट होना चाहिए। तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट, कंपनी का अभ्यावेदन, मॉनिटरों की राय और सक्षम प्राधिकारी का निर्णय सार्वजनिक होने से स्थिति साफ हो सकती है।

यदि शुरुआती मूल्यांकन गलत था, तो उसके कारणों की समीक्षा होनी चाहिए। यदि बाद में पात्रता स्वीकार की गई, तो उसका दस्तावेजी आधार भी सामने आना चाहिए।

“भूविस्थापितों से जुड़े मामलों में गंभीरता दिखाए एसईसीएल”

 

शिकायतकर्ता शेत मसीह का कहना है कि भूविस्थापित परिवारों से सीधे जुड़े कार्यों में एसईसीएल को पूरी गंभीरता और पारदर्शिता से काम करना चाहिए। उन्होंने पुनर्वास स्थल के चयन, मिट्टी भराव, निर्माण गुणवत्ता और अन्य कथित खामियों की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।    उनकी शिकायत में उठे बिंदुओं पर जिला प्रशासन, खनन सुरक्षा और संबंधित तकनीकी विशेषज्ञों से स्वतंत्र परीक्षण कराया जाना आवश्यक है। जांच में कार्य की वास्तविक मात्रा और गुणवत्ता के साथ बिलों तथा भुगतान की स्थिति का भी मिलान होना चाहिए।

पुनर्वास की जमीन पर भरोसे की नींव जरूरी

 

नरईबोध के प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास केवल नया भूखंड मिलने का प्रश्न नहीं है। यह उनके घर, आजीविका और अगली पीढ़ी की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। इसलिए शिकायतों का निपटारा केवल पत्राचार से नहीं, स्थल परीक्षण और सार्वजनिक निष्कर्षों से होना चाहिए।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का सवाल स्पष्ट है—जिस जमीन पर भूविस्थापितों का भविष्य बसाया जा रहा है, उसकी सुरक्षा और मजबूती की जिम्मेदारी कौन लिखित रूप में लेगा?

यह समाचार उपलब्ध शिकायत और उसमें वर्णित आरोपों पर आधारित है। मूल निविदा, माप पुस्तिका, भुगतान अभिलेख, तकनीकी परीक्षण रिपोर्ट और संबंधित आदेशों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है। एसईसीएल, संबंधित अभियंता तथा आरकेटीसी–कीस्टोन जेवी का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

 

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

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