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तीवरता वॉशरी: कोयले का कारोबार, पानी का हिसाब और सरकारी निगरानी की अग्निपरीक्षा

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अशोक कुमार धुल्यानी की स्थापित कंपनी से अनुपालन के दस्तावेज सामने रखने का सवाल; CECB और प्रशासन बताएं—आखिरी निरीक्षण कब हुआ, क्या मिला और उसके बाद क्या किया?

 

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कोरबा–बिलासपुर। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। कोयले की धुलाई के कारोबार में पानी का हिसाब कौन रख रहा है? पर्यावरणीय अनुमति की शर्तें जमीन पर कौन जांच रहा है? और निगरानी करने वाले विभाग अपनी जांच का प्रमाण कहां रखते हैं? तीवरता कोल बेनिफिशिएशन लिमिटेड की लिम्हा स्थित वॉशरी की पड़ताल में यही सवाल कंपनी प्रबंधन से लेकर पर्यावरण विभाग और जिला प्रशासन तक जवाब मांगते हैं।   कारोबार का अधिकार अपनी जगह है। पानी, मिट्टी और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी उससे कम नहीं हो सकती।

 

तीवरता प्रबंधन बताए—अनुमति क्या कहती है, संचालन क्या दिखाता है?

कंपनी की वेबसाइट अशोक कुमार धुल्यानी को संस्थापक एवं निदेशक बताती है। इन्फोमेरिक्स की 26 अप्रैल 2024 की रिपोर्ट में अशोक धुल्यानी, रवि धुल्यानी और चंद्रमा देवी धुल्यानी का उल्लेख प्रवर्तकों के रूप में है। यह उनकी कारोबारी भूमिका का स्रोत है; वर्तमान संपूर्ण मालिकाना हिस्सेदारी की पुष्टि अलग विषय है।

प्रबंधन से सवाल स्पष्ट हैं—वर्तमान पर्यावरणीय स्वीकृति और संचालन सहमति की अवधि क्या है? कितनी क्षमता स्वीकृत है? पानी का अधिकृत स्रोत क्या है? रोज कितना पानी इस्तेमाल होता है और उसका कितना हिस्सा दोबारा उपयोग में आता है?    इन सवालों का सबसे प्रभावी जवाब अनुमति पत्र, मीटर रिकॉर्ड और अनुपालन रिपोर्ट होंगी।

CECB की निगरानी कितनी कठोर? निरीक्षण रिपोर्ट सामने आए

पर्यावरण संरक्षण मंडल बताए कि इकाई का अंतिम निरीक्षण कब हुआ। क्या निरीक्षण में वास्तविक उत्पादन, जल खपत और प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था का मिलान किया गया? नमूने लिए गए तो किस स्थान से और किस प्रयोगशाला में जांच हुई?  कमी मिली तो नोटिस, सुधार के निर्देश और उसके बाद हुए सत्यापन का रिकॉर्ड क्या है? कमी नहीं मिली तो उस निष्कर्ष का आधार क्या है?  जिस विभाग के पास पर्यावरण की पहरेदारी है, उसकी कार्यकुशलता भी जांच के दायरे से बाहर नहीं हो सकती।

कोयला धुल रहा है—रिजेक्ट और स्लाइम का हिसाब भी खुले

 

पड़ताल केवल साफ कोयला निकलने तक सीमित नहीं रह सकती। कितना कच्चा कोयला आया, कितना धुला कोयला निकला और कितना रिजेक्ट तथा स्लाइम बना—इनका मिलान आवश्यक है।   अवशेष कहां रखे गए? किसे भेजे गए? परिवहन और प्राप्तकर्ता का रिकॉर्ड क्या है? बरसात में बहाव रोकने की व्यवस्था का परीक्षण हुआ या नहीं?   उत्पादन का आंकड़ा और अवशेष का हिसाब साथ रखे बिना पर्यावरणीय अनुपालन की तस्वीर अधूरी रहेगी।

विभागों की आंख खुली है या निगरानी में चूक है? जवाब रिकॉर्ड देगा

 

काले कोयले के कारोबार के सामने सरकारी निगरानी कितनी स्वतंत्र और प्रभावी है—यह गंभीर सार्वजनिक सवाल है। इसका उत्तर न कंपनी के प्रभाव से तय होगा, न अधिकारियों के पद से; उत्तर जांच के रिकॉर्ड से निकलेगा।  यदि निरीक्षण हुआ है तो निष्कर्ष सामने आएं। यदि खामियां मिली हैं तो कार्रवाई का हिसाब आए। यदि अनुपालन सही है तो उसका प्रमाण आए।   इस समय विभागीय मिलीभगत या अवैध कमाई का पुष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए उसे स्थापित तथ्य कहना उचित नहीं होगा। लेकिन निगरानी में संभावित चूक की जांच और जिम्मेदार कार्यालयों से जवाब मांगना आवश्यक है।

प्रशासन संयुक्त जांच कराए, निष्कर्ष सार्वजनिक करे

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का संपादकीय आग्रह है कि संबंधित जिला प्रशासन, CECB और जल उपयोग की अनुमति देने वाला प्राधिकारी अपने अधिकारक्षेत्र में रिकॉर्ड का मिलान करें। जरूरत होने पर स्वतंत्र नमूना परीक्षण और संयुक्त स्थल निरीक्षण कराया जाए।   जांच का निष्कर्ष सार्वजनिक हो—ताकि कंपनी के दावे, विभागों की निगरानी और वास्तविक स्थिति को एक साथ परखा जा सके।

राष्ट्रीय महत्व का सवाल: अनुमति के बाद निगरानी कौन सुनिश्चित करता है?

यह पड़ताल एक व्यापक प्रश्न उठाती है—औद्योगिक परियोजनाओं को स्वीकृति देने के बाद उनकी शर्तों का पालन सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

 

दस्तावेजों में गंभीर उल्लंघन या निगरानी की चूक मिले तो संबंधित राज्य और केंद्रीय प्राधिकारियों की जवाबदेही तय करने का आधार बनेगा। अभी किसी केंद्रीय जांच, नए दंडात्मक आदेश या उल्लंघन की पुष्टि नहीं हुई है।   तीवरता प्रबंधन अपना अनुपालन बताए। विभाग अपनी निगरानी साबित करें। जनता के पानी और पर्यावरण से जुड़े सवालों का जवाब प्रमाण के साथ मिलना चाहिए।

सत्यापन स्थिति: उपलब्ध शुरुआती खोज से अवैध संचालन, अनधिकृत जल दोहन, प्रदूषण उल्लंघन अथवा विभागीय मिलीभगत सिद्ध नहीं हुई है। संबंधित अनुमति और निरीक्षण दस्तावेजों का पूर्ण सत्यापन तथा कंपनी एवं विभागों का पक्ष अभी शेष है।

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

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