बस्तर के बीहड़ों में AK-47 लेकर उतरीं अंकिता शर्मा: विवाद के बीच उनके साहस और सेवा को भी याद रखिए

शस्त्र पूजा की फायरिंग पर स्पष्टीकरण के बीच महिला IPS के परिधान पर केंद्रित बहस पर सवाल; ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का मत—निष्पक्ष समीक्षा हो, महिला अधिकारी की गरिमा और योगदान का सम्मान भी हो
रायपुर/राजनांदगांव। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क जिस महिला पुलिस अधिकारी ने बस्तर के नक्सल प्रभावित इलाकों में जवानों के साथ कठिन सर्च अभियानों में हिस्सा लिया, आज उसकी पहचान सोशल मीडिया पर एक वीडियो और साड़ी तक सीमित की जा रही है। IPS अंकिता शर्मा के काम का मूल्यांकन करते समय उनके सेवा इतिहास, जोखिम भरी तैनाती और साहस को भी जगह मिलनी चाहिए।
राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा का शस्त्र पूजा के दौरान AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो चर्चा में है। विभागीय जवाबदेही के सवाल अपनी जगह हैं, लेकिन किसी महिला अधिकारी की क्षमता को उसके परिधान के आधार पर आंकना नारी सम्मान की भावना के विपरीत है।
बस्तर में जवानों के साथ करती थीं सर्च ऑपरेशन
अंकिता शर्मा की नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका का उल्लेख आज के विवाद से वर्षों पहले की रिपोर्टों में मौजूद है। आज तक की 31 दिसंबर 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, बस्तर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनाती के दौरान वह दरभा, तुलसीडोंगरी, कोलेंग और तोंगपाल जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में पुलिस तथा सीआरपीएफ जवानों के साथ सर्च ऑपरेशन में जाती थीं। रिपोर्ट में उनके AK-47 लेकर अभियानों में शामिल होने का भी उल्लेख है।
दिसंबर 2021 में जनसत्ता और एबीपी की रिपोर्टों ने भी बस्तर में उनकी नक्सल विरोधी भूमिका तथा जंगलों में जवानों के साथ मौजूदगी को प्रमुखता दी थी। इसलिए उनके साहस और मैदानी अनुभव की चर्चा का आधार पुरानी प्रकाशित रिपोर्टें हैं।
कठिन इलाकों में जिम्मेदारी निभाने वाली महिला अधिकारी का योगदान सार्वजनिक बहस से गायब नहीं होना चाहिए।
नोटिस का आधार स्पष्ट रहे
नईदुनिया की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, शस्त्र पूजा के दौरान हवाई फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने स्पष्टीकरण मांगा है। रिपोर्ट में हथियार संचालन, सुरक्षा और विभागीय अनुशासन से जुड़े सवालों का उल्लेख है। उपलब्ध जानकारी नोटिस को केवल साड़ी पहनने की कार्रवाई के रूप में स्थापित नहीं करती।
सुरक्षा संबंधी आपत्तियों का उत्तर तथ्यों, लागू निर्देशों और अधिकारी के स्पष्टीकरण से सामने आना चाहिए। उसी तरह, समीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर किसी अधिकारी को दोषी घोषित कर देना भी उचित नहीं है।
अन्य अधिकारियों के मामलों में भी समान कसौटी क्यों न हो?
इंडियन एक्सप्रेस की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट में अन्य जिलों में भी शस्त्र पूजा के दौरान अधिकारियों की फायरिंग के वीडियो सामने आने का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, उस समय तक उन अधिकारियों को नोटिस जारी नहीं हुए थे। यह समान परिस्थितियों में समान समीक्षा का सवाल उठाता है।
विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि समीक्षा की कसौटी क्या है और क्या उसे सभी संबंधित मामलों में समान रूप से लागू किया जा रहा है। पारदर्शिता से अनुशासन पर भरोसा बढ़ेगा और चयनात्मक कार्रवाई की आशंकाओं का उत्तर मिलेगा।
साड़ी महिला की गरिमा है, उसकी क्षमता पर सवाल का आधार नहीं
साड़ी भारतीय महिलाओं का सम्मानित परिधान है। उसे पहनने वाली महिला के प्रशिक्षण, निर्णय क्षमता या पेशेवर अनुभव को छोटा नहीं किया जा सकता। जहां किसी विशेष कार्य के लिए निर्धारित पोशाक या सुरक्षा उपकरण आवश्यक हों, वहां संबंधित निर्देशों पर तथ्यपूर्ण चर्चा होनी चाहिए। उस चर्चा में लैंगिक उपहास और व्यक्तिगत तंज के लिए कोई जगह नहीं है। नारी शक्ति के सम्मान का अर्थ नेतृत्व करती महिलाओं के प्रति भाषा और व्यवहार में भी गरिमा रखना है।
ग्राम यात्रा का स्पष्ट मत: साहस को सलाम, समीक्षा में निष्पक्षता
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क, अंकिता शर्मा की नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निभाई गई जिम्मेदारियों और उनके साहस को सम्मानपूर्वक सलाम करता है। साथ ही अपेक्षा करता है कि वर्तमान घटनाक्रम की समीक्षा प्रमाणों और समान विभागीय मानकों के आधार पर हो।
एक वीडियो पर सवाल पूछे जा सकते हैं; जवाब सुनना भी उतना ही जरूरी है। महिला अधिकारी की सेवा, साहस और सम्मान को बहस में उचित स्थान मिलना चाहिए।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
Live Cricket Info
