तीवरता वाशरी का हिसाब खोलिए! कोयला, पानी और रिजेक्ट पर कंपनी जवाब दे—अपनी निगरानी का प्रमाण दिखाए प्रशासन

अप्रैल 2024 से संचालन का प्रकाशित उल्लेख, मार्च 2025 की केंद्रीय सूची में नाम नहीं मिला; जलमीटर, खनिज भंडारण अनुमति, रिजेक्ट के प्राप्तकर्ता और निरीक्षण रिपोर्ट का संयुक्त मिलान जरूरी
विश्वस्त सूत्र की खेतों में दूषित पानी, ग्रामीण विरोध और कथित सांठगांठ की सूचना—स्वतंत्र पुष्टि शेष। शासन जांच कराए: अनुमति देने वाले और निगरानी करने वाले विभागों की भूमिका भी परखी जाए।
बिलासपुर/बेलतरा। कोयले की धुलाई का कारोबार चले तो उसका हिसाब भी खुले। कितना पानी निकला, कितना कोयला धुला, कितना रिजेक्ट बना और माल आखिर किसके पास पहुंचा—ये सवाल किसी कंपनी की निजी सुविधा के नहीं, सार्वजनिक जवाबदेही के हैं। पर्यावरण की निगरानी का दावा करने वाले विभाग भी बताएं कि उन्होंने क्या देखा, क्या मापा और क्या कार्रवाई की।
लिम्हा स्थित तीवरता कोल वाशरी—तिवार्ता कोल बेनिफिसिऐशन लिमिटेड पर ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की पड़ताल अब अनुमति की शर्तों से आगे बढ़कर संचालन की समयरेखा, केंद्रीय सूची, रिजेक्ट के स्वामित्व और परिवहन अभिलेखों तक पहुंची है। उपलब्ध दस्तावेज उल्लंघन सिद्ध नहीं करते। लेकिन ऐसे ठोस प्रश्न जरूर खड़े करते हैं, जिनका उत्तर कंपनी और संबंधित विभागों को रिकॉर्ड के साथ देना चाहिए। अनुमति की मुहर सवालों का पूर्णविराम नहीं है।
अप्रैल 2024 से संचालन का उल्लेख—केंद्रीय सूची में पहचान कहां?
Infomerics की 26 अप्रैल 2024 की रेटिंग रिपोर्ट में कंपनी की वाशरी का संचालन अप्रैल 2024 से शुरू होने का उल्लेख है। यह रेटिंग एजेंसी का प्रकाशित विवरण है, सरकारी स्थल निरीक्षण का प्रमाण नहीं। दूसरी ओर, कोयला नियंत्रक संगठन की वेबसाइट से प्राप्त 31 मार्च 2025 तक की वाशरियों की Excel सूची पढ़ने पर तीवरता/Tiwarta अथवा लिम्हा/Limha के नाम से प्रविष्टि नहीं मिली। सूची में छत्तीसगढ़ की अन्य वाशरियां दर्ज हैं।
संबंधित कार्यालय बताए—
लिम्हा वाशरी किस नाम और पहचान से दर्ज है?
उसका विवरण कब प्राप्त हुआ?
क्या सूची में अद्यतन की कमी है या किसी दूसरी पहचान से प्रविष्टि मौजूद है?
नाम नहीं मिलने से अवैधता का निष्कर्ष नहीं निकलता। लेकिन संचालन का उल्लेख और सूची की स्थिति साथ रखकर स्पष्टीकरण मांगना जरूरी है। सरकारी रिकॉर्ड का अंतर सरकारी जवाब से ही दूर होगा।
रोजाना 3.50 लाख लीटर की सीमा—वास्तविक निकासी का हिसाब दीजिए
मार्च 2024 की संचालन सहमति में अधिकतम 350 घनमीटर अर्थात 3.50 लाख लीटर प्रतिदिन जल खपत निर्धारित है। स्रोत भूजल बताया गया है। डिजिटल जलमीटर, बंद जल-चक्र और भूजल प्राधिकरण की अनुमति की शर्तों का पालन अपेक्षित है।
कंपनी बताए—बोरवेल कितने हैं? वर्तमान अनुमति कितनी निकासी की है? मीटर कितना पानी दर्ज करते हैं?
विभाग बताए कि इन आंकड़ों का उत्पादन से मिलान कब किया गया। कितना ताजा पानी निकला, कितना पुनः इस्तेमाल हुआ और कितना संग्रहण में बचा—पूरा लेखा सामने आए। धरती से पानी निकालना मापा जा सकता है। फिर उसके हिसाब पर अस्पष्टता क्यों रहे? जलमीटर की प्रमाणित रीडिंग और जल-संतुलन ही वास्तविक पालन बताएंगे।
खेतों में पानी पहुंचने की सूचना—निकासी से खेत तक जांच पहुंचे
विश्वस्त सूत्र ने वाशरी का दूषित पानी खेतों में पहुंचने और ग्रामीण विरोध की सूचना दी है। उसी सूत्र ने संबंधित तंत्र को कथित रूप से ‘मैनेज’ किए जाने का आरोप भी लगाया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि शेष है; अनुचित लेन-देन का प्रमाण इस पड़ताल में प्राप्त नहीं हुआ है। नवंबर 2024 के सरकारी पत्र में थिकनर, पर्याप्त क्षमता के सेडिमेंटेशन तालाब, बेल्ट/फिल्टर प्रेस, घरेलू अपशिष्ट उपचार और रिसाव रोकने के लिए तालाबों की लाइनिंग की शर्तें हैं।
यदि उपचार व्यवस्था प्रभावी है तो कथित बहाव कहां से आया?
यदि खराबी या ओवरफ्लो हुआ तो उसका रिकॉर्ड क्या है?
कलेक्टर प्रभावित खेतों का खसरा चिन्हित कराएं। पानी का रास्ता, नालियां, पुलिया और परिसर की निकासी जांची जाए। घटना की तारीख, बारिश, संचालन लॉग और पानी–मिट्टी की परीक्षण रिपोर्ट मिलाई जाए। तालाब की तस्वीर और उपकरण की मौजूदगी शिकायत का अंतिम उत्तर नहीं हैं। कंपनी का दावा और किसान की सूचना—दोनों को प्रमाण की एक ही कसौटी पर परखा जाए।
व्यवस्था उपलब्ध बताने वाले विभाग—निरीक्षण का आधार सामने रखें
नवंबर 2024 के विस्तार पत्र में क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा उपचार और वायु प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था उपलब्ध होने की सूचना तथा नवीनीकरण की सिफारिश दर्ज है। उस सिफारिश की पूरी निरीक्षण रिपोर्ट और परीक्षण परिणाम इस पड़ताल में प्राप्त नहीं हुए हैं।
निरीक्षण कब हुआ?
उपकरण कितनी देर चलते देखे गए?
तालाब की क्षमता कैसे जांची गई?
पानी के नमूने कहां से लिए गए?
कमी मिली तो कार्रवाई क्या हुई?
सिफारिश का आधार मजबूत है तो उसे सामने रखिए। जांच अधूरी थी तो उसे पूरा कीजिए। कंपनी से पालन का प्रमाण मांगने वाला विभाग अपनी जांच का प्रमाण देने से बाहर नहीं हो सकता।
रिजेक्ट किसका है—वाशरी का या ग्राहक का?
कोयला नियंत्रक संगठन की निरीक्षण चेकलिस्ट में धुलाई के वर्क ऑर्डर और समझौतों से रिजेक्ट का स्वामित्व स्थापित करने, कच्चे कोयले के DO तथा विभिन्न उत्पादों की उपज जांचने का प्रावधान है। इसलिए सवाल केवल रिजेक्ट बेचने का नहीं है। जिस माल की बिक्री हुई, उसका अधिकार किसके पास था?
कंपनी ग्राहकवार समझौते सामने रखे। कितना कोयला आया, कितना धुला कोयला लौटा, कितना रिजेक्ट और स्लरी बनी तथा उनका मालिक कौन था—यह स्पष्ट हो। व्यापार का नाम बताने से माल का स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। उसका उत्तर समझौते और लेखे में मिलेगा।
बिल पर खरीदार, अनुमति में प्राप्तकर्ता—वास्तविक माल कहां पहुंचा?
सरकारी निरीक्षण चेकलिस्ट में टैक्स इनवॉइस, खनिज पोर्टल रिपोर्ट, रेलवे रसीद और अन्य अभिलेखों से रिजेक्ट की मात्रा तथा गंतव्य का मिलान करने को कहा गया है। प्राप्तकर्ता संयंत्र की वैध संचालन सहमति और अनुमत ईंधन उपयोग भी जांचना है। लिम्हा वाशरी की सहमति में कोल रिजेक्ट, फाइन्स और स्लज को बिजली संयंत्र में ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की शर्त है।
कौन-सा संयंत्र?
कितनी मात्रा?
किस गुणवत्ता का माल?
किस तारीख को प्राप्त हुआ?
बिक्री बिल, संबंधित ई-वे बिल, वाहन, प्रेषण तौल और प्राप्तकर्ता की तौल जोड़कर जांच हो। कागज पर रवाना माल दूसरी तरफ प्राप्त होना भी साबित होना चाहिए। अभी किसी वास्तविक रिजेक्ट खरीदार या हेराफेरी की पुष्टि नहीं हुई है। GST बिल एक कड़ी होगा; पूरी सच्चाई खेपवार मिलान से निकलेगी।
खनिज विभाग अपना रिकॉर्ड दिखाए—कलेक्टर अनुमति की स्थिति स्पष्ट करें
जिला खनिज अधिकारी और कलेक्टर से वाशरी की भंडारण–प्रसंस्करण अनुमति, स्वीकृत खसरे, नवीनीकरण, आवक–जावक तथा स्टॉक सत्यापन का रिकॉर्ड मांगा जाना चाहिए। ये कंपनी से जुड़े वास्तविक अभिलेख अभी प्राप्त नहीं हुए हैं।
खनिज विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध 6 अक्टूबर 2018 के संशोधन में पट्टे से बाहर प्रसंस्करण आदि में एकत्र सामग्री को गौण खनिज के रूप में निर्दिष्ट उपयोग/बिक्री की अनुमति से पहले विभागीय नमूना और परीक्षण का प्रावधान है। हर कोल रिजेक्ट पर इसे स्वतः लागू नहीं माना जा सकता; सामग्री का वर्गीकरण और वास्तविक अनुमति पहले देखनी होगी।
क्या वाशरी की कोई सामग्री सड़क निर्माण, भराव या अन्य कार्य में गई?
यदि गई तो किस वर्गीकरण, परीक्षण और अनुमति से?
वर्तमान नियमों, संशोधनों और किसी छूट की प्रमाणित प्रति सहित उत्तर दिया जाए। हाईवे, बस्ती और खेत—सुरक्षा की शर्तें मौके पर मापिए। मार्च 2024 के पत्र में गांव, स्कूल और सड़क की ओर निर्धारित हिस्से में पांच मीटर दीवार, अन्य परिधि में तीन मीटर दीवार, हवा रोकने वाली स्क्रीन तथा रेन गन की शर्त है। कोयले के ढेर की अधिकतम ऊंचाई तीन मीटर है। नवंबर 2024 के पत्र में ट्रकों की पार्किंग परिसर के भीतर रखने और सार्वजनिक स्थान इस्तेमाल नहीं करने की शर्त भी है।
टीम मौके पर जाए, माप ले और तस्वीर सहित रिपोर्ट दे। हाईवे प्रवेश अनुमति और स्वीकृत नक्शे का वास्तविक प्रवेश–निकास से मिलान हो। सड़क के पास उद्योग होने से अपने आप अवैधता सिद्ध नहीं होती; लागू सुरक्षा और प्रवेश शर्तों का पालन जांचना जरूरी है।
सरकार की सख्ती अब संयुक्त जांच में दिखाई दे
उपलब्ध नवंबर 2024 के पत्र में संचालन सहमति 28 फरवरी 2025 तक बढ़ाई गई थी। उसके बाद की वर्तमान सहमति सत्यापित नहीं हुई है। इससे अवैध संचालन का निष्कर्ष नहीं निकलता; वर्तमान अनुमति सामने रखने का सवाल उठता है।
छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन CECB, खनिज विभाग, भूजल प्राधिकरण, कोयला नियंत्रक संगठन, NHAI तथा राजस्व विभाग की संयुक्त जांच कराएं। शिकायतों, जलमीटर, उत्पादन, स्टॉक, तौल और परिवहन अभिलेखों को सुरक्षित कर मिलान किया जाए। उल्लंघन साबित हो तो कंपनी जवाब दे। दर्ज कमी या शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई हो तो जिम्मेदार अधिकारी जवाब दें। जांच पूरी हुए बिना क्लीन चिट भी न बांटी जाए और आरोप को फैसला भी न बनाया जाए।
जल्द अगली दस्तावेजी रिपोर्ट—संचालन से सूची तक, पानी से रिजेक्ट तक
ग्राम यात्रा का दस्तावेज संकलन और सत्यापन जारी है। अगली रिपोर्ट प्राप्त प्रमाणों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर सामने आएगी। तीवरता प्रबंधन हिसाब दे। खनिज विभाग सत्यापन दिखाए। पर्यावरण विभाग निरीक्षण का आधार रखे। जिला प्रशासन जांच का परिणाम बताए। जनता को फाइलों की भाषा नहीं, प्रमाणित जवाब चाहिए।
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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