बिलासपुर में स्टांप वेंडरों की मनमानी:तय कीमत से ज्यादा वसूली, रेट लिस्ट भी गायब

बिलासपुर – जिला कोषालय में कोर्ट फीस का पर्याप्त स्टॉक पहुंच चुका है, इसके बावजूद नकल के लिए न्यायालयों में कोर्ट फीस कॉपिंग की समस्या बनी हुई है।
दूसरी ओर स्टांप वेंडर तय मूल्य से अधिक रुपए वसूल रहे हैं। दैनिक भास्कर ने ग्राहक बनकर स्टांप वेंडरों के पास जाकर इसकी तस्दीक की। दोनों जगह तय कीमत से ज्यादा रकम मांगी गई।
शहर के जिला पंजीयक कार्यालय में रोजाना 50 करोड़ रुपए से अधिक की रजिस्ट्री होती है। जमीन की खरीदी-बिक्री के अलावा सूचना के अधिकार, किरायानामा, पार्टनरशिप डीड, नाम में बदलाव आदि के लिए भी लोग स्टांप खरीदते हैं।
जिला कोषालय के अफसरों के अनुसार जिले में 180 स्टांप वेंडर हैं। स्टांप वेंडरों को स्टांप बेचने के लिए अलग से कमीशन भी मिलता है।
स्टॉक और रेट लिस्ट तक नहीं टांगते वेंडर केवल उसी जगह या दुकान से स्टांप बेच सकता है, जो उसके लाइसेंस में दर्ज या स्वीकृत है। दुकान के बाहर या प्रमुख स्थान पर लाइसेंस की प्रति, काम का समय और स्टांप की उपलब्धता बताने वाला सूचना बोर्ड लगाना भी जरूरी है। लेकिन यहां शुरू से ही यह समस्या है कि वेंडर अपनी जगह पर स्टॉक या रेट लिस्ट नहीं टांगते।
10 रुपए का स्टांप चाहिए तो 20 रुपए लगेंगे
दैनिक भास्कर ने पहले वेंडर से 5 रुपए की कोर्ट फीस और 10 रुपए का स्टांप पेपर मांगा।
रिपोर्टर: कोर्ट फीस है? वेंडर: कितनी चाहिए?
रिपोर्टर: एक चाहिए, कितने की है? वेंडर: पांच रुपए की।
रिपोर्टर: 10 रुपए का स्टांप पेपर भी चाहिए? वेंडर: है, लेकिन 20 रुपए लगेगा।
रिपोर्टर: यह तो तय रेट से अधिक है? वेंडर: इतना ही लगेगा, चाहिए तो बोलो।
15 रुपए का सामान, वेंडर ने मांगे 30 रुपए
दूसरे मामले में शंकर कंप्यूटर के वेंडर से 5 रुपए की कोर्ट फीस और 10 रुपए का स्टांप पेपर मांगा गया। सूचना के अधिकार के लिए इसकी जरूरत बताई गई।
रिपोर्टर: कोर्ट फीस और स्टांप पेपर चाहिए? वेंडर: कितने-कितने की चाहिए?
रिपोर्टर: पांच रुपए की कोर्ट फीस और 10 रुपए का स्टांप पेपर। वेंडर: किस चीज के लिए चाहिए?
रिपोर्टर: सूचना के अधिकार के लिए चाहिए। वेंडर: तीस रुपए लगेंगे।
पूरे स्टेट में शॉर्टेज था, अब स्टॉक आ गया है: कोर्ट फीस व नकल टिकट की बिलासपुर ही नहीं पूरे राज्य में समस्या थी जिसकी वजह से नासिक से सप्लाई नहीं होना था। चूंकि इसके लिए राज्य का नोडल ट्रेजरी रायपुर है इसलिए 29 सितंबर को आने पर हमने 30 सितंबर को ही वहां से मंगवा लिया था। अब कोई समस्या नहीं है। – बसंत गुलेरी, जिला कोषालय अधिकारी, बिलासपुर
सीधी बात – राजीव स्वर्णकार, जिला पंजीयक, बिलासपुर
जानकारी मिली तो कार्रवाई करेंगे
वेंडर नियम से स्टांप बेच रहे हैं या नहीं, इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी किसकी है? – यह जिम्मेदारी डिपार्टमेंट की है।
स्टांप वेंडरों की जांच कब-कब की है? – समय-समय पर जांच होती रहती है।
वेंडर स्टॉक और रेट लिस्ट तक नहीं टांगते? – इसकी मॉनिटरिंग करते हैं। फिर भी ऐसा है तो चेक कराएंगे।
वेंडर तय मूल्य से अधिक पर स्टांप बेच रहे हैं? – जानकारी सामने आई तो कार्रवाई करेंगे।
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