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BALCO पर ₹122 करोड़ की RRC—तीन साल से सरकारी फाइलों में “बेहोश” पड़ी वसूली!

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2023 में कलेक्टर ने कहा—रकम वसूलो; 2026 में पुराने मामले को नया नंबर पहनाकर फिर पोर्टल पर चढ़ाया, लेकिन न आदेश निकला, न पेशी लगी—क्या रसूख की चौखट पर राजस्व कानून की धार कुंद हो गई?

 

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वनमंडलाधिकारी आवेदक, BALCO अनावेदक; सरकारी खजाने की ₹1,22,14,27,395 की मांग पर प्रशासन का रहस्यमय मौन—वसूली हुई तो चालान दिखाओ, रोक लगी तो आदेश बताओ, वरना तीन साल की खामोशी का हिसाब दो!

 

कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क गरीब किसान से राजस्व का छोटा-सा बकाया वसूलना हो तो सरकारी मशीनरी नोटिस, तामिली और कुर्की का डंडा लेकर दरवाजे पर खड़ी हो जाती है। लेकिन सामने BALCO जैसा औद्योगिक दिग्गज हो और रकम पूरे ₹1,22,14,27,395 हो, तो वही मशीनरी तीन वर्षों तक फाइल के पन्ने पलटती हुई क्यों दिखाई देती है?

सरकारी आदेश-पत्र के पेट से निकला यह मामला साधारण बकाया नहीं, बल्कि ₹122.14 करोड़ की RRC वसूली का है। अप्रैल 2023 में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, कोरबा के माध्यम से यह प्रकरण तहसीलदार न्यायालय पहुंचा। निर्देश हुआ—प्रकरण दर्ज करो, BALCO को दावा-पत्र जारी करो।  लेकिन उसके बाद जैसे वसूली की फाइल पर किसी ने सरकारी नींद की मोटी चादर डाल दी!

तीन साल बाद अगस्त 2026 में वही पुराना मामला नए क्रमांक के साथ ऑनलाइन पोर्टल पर फिर प्रकट हुआ। स्थिति लिखी है—“कार्यवाही प्रक्रियाधीन”। मगर न अगली सुनवाई, न आदेश-पत्र, न जांच और न यह हिसाब कि ₹122 करोड़ की रकम वसूली गई या केवल कागजों में घुमाई गई।

सवाल जहरीला है, लेकिन सरकारी दस्तावेज से पैदा हुआ है—

क्या राजस्व कानून की तलवार केवल कमजोरों के लिए तेज है और औद्योगिक रसूख के सामने उसकी धार अपने आप भोथरी हो जाती है?

पहले समझिए दस्तावेज का असली विस्फोट—रकम मिली नहीं, वसूली के लिए भेजा गया था प्रकरण आदेश-पत्र की भाषा को सरसरी नजर से पढ़ने पर भ्रम हो सकता है कि ₹122.14 करोड़ की राशि सरकार को प्राप्त हो चुकी थी।

लेकिन दस्तावेज की नस पकड़ने पर तस्वीर उलट जाती है।

आदेश-पत्र में लिखा है कि अनावेदक भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड, बालको नगर, कोरबा से ₹1,22,14,27,395 की वसूली RRC के माध्यम से किए जाने हेतु प्रकरण कलेक्टर कोरबा के माध्यम से प्राप्त हुआ।  यानी सरकार की झोली में ₹122 करोड़ आने का प्रमाण नहीं मिला। प्रमाण मिला है—BALCO से ₹122 करोड़ वसूलने की कार्रवाई शुरू करने का।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जिस रकम को अप्रैल 2023 में वसूलने के लिए राजस्व न्यायालय भेजा गया, उसकी सितंबर 2026 तक वास्तविक स्थिति क्या है?
रकम वसूल हुई?
BALCO ने चुनौती दी?
किसी अदालत ने रोक लगाई?
मांग वापस ली गई?
या फिर प्रभावशाली फाइलों के कब्रिस्तान में ₹122 करोड़ की RRC को जिंदा दफना दिया गया?

19 अप्रैल को कलेक्टर का पत्र—25 अप्रैल को फाइल खुली पुराने राजस्व आदेश-पत्र में कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, कोरबा के पत्र क्रमांक 5072/रा.आ.शा./2023, दिनांक 19 अप्रैल 2023 का स्पष्ट उल्लेख है। इसके छह दिन बाद, यानी 25 अप्रैल 2023, तहसीलदार न्यायालय के आदेश-पत्र में मामला दर्ज हुआ।

हस्तलिखित निर्देश साफ संकेत देते हैं:

प्रकरण दर्ज किया जावे।”
“अनावेदक को दावा पत्र जारी किया जावे।”
इसके नीचे तहसीलदार के हस्ताक्षर के साथ संभवतः 9 मई 2023 की तारीख दिखाई देती है।
अर्थात मई 2023 तक BALCO को दावा-पत्र जारी करने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
फिर क्या हुआ?
दावा-पत्र BALCO को तामील हुआ या नहीं?
BALCO ने जवाब दिया या नहीं?
किस अधिकारी ने फाइल आगे बढ़ाई?
किसने रोककर रखी?
कंपनी ने एक रुपया जमा किया या नहीं?

इन सवालों पर उपलब्ध रिकॉर्ड ऐसा मौन है, मानो ₹122 करोड़ नहीं, किसी पुरानी फाइल का फटा हुआ पन्ना हो!  तीन साल बाद पुराने प्रकरण को नया नंबर—क्या यह कार्रवाई है या केवल डिजिटल श्रृंगार? अब छत्तीसगढ़ राजस्व न्यायालय पोर्टल पर मामला प्रकरण क्रमांक 202608050600106 के रूप में दिखाई देता है।

पोर्टल के अनुसार:

– पंजीयन दिनांक—27 अगस्त 2026
– प्रकरण शीर्ष—अ-76
– आवेदक—वनमंडलाधिकारी, कोरबा
– अनावेदक—भारत एल्युमिनियम कंपनी
– ग्राम—रिसदा
– वर्तमान स्थिति—कार्यवाही प्रक्रियाधीन

चौंकाने वाली बात यह है कि पुराने 2022–23 के आदेश-पत्र पर भी नीली स्याही से यही नया प्रकरण क्रमांक लिखा दिखाई देता है।  इससे प्रथमदृष्टया संकेत मिलता है कि अप्रैल 2023 की पुरानी फाइल को अगस्त 2026 में नया डिजिटल नंबर पहनाकर पोर्टल पर चढ़ाया गया।

लेकिन क्या केवल नया नंबर चढ़ा देना ही कार्रवाई कहलाएगा?
क्या तीन वर्षों की धूल झाड़कर फाइल को ऑनलाइन कर देने से ₹122 करोड़ की वसूली पूरी हो गई?

पुरानी नस्ती इतने समय तक किस कार्यालय, किस शाखा और किस जिम्मेदार अधिकारी की मेज पर पड़ी रही—प्रशासन को इसका दिनवार हिसाब देना चाहिए। ₹122 करोड़ की फाइल और पोर्टल पर शून्य आदेश—वाह रे व्यवस्था!  इतनी बड़ी वसूली वाले प्रकरण की पोर्टल स्थिति व्यवस्था की कार्यशैली पर करारा व्यंग्य करती दिखाई देती है।

ऑनलाइन रिकॉर्ड में:

– कुल जारी आदेश-पत्र—0
– जांच हेतु भेजने की तारीख—नहीं भेजा गया
– अगली सुनवाई—दर्ज नहीं
– सुनवाई का विषय—दर्ज नहीं
– खसरा एवं रकबा—दर्ज नहीं
– अभिलेख अद्यतन की जानकारी—दर्ज नहीं

मामला ₹122.14 करोड़ का, लेकिन ऑनलाइन कार्रवाई शून्य!

आवेदक वनमंडलाधिकारी, सामने BALCO और बीच में राजस्व न्यायालय—फिर भी अगली पेशी तक गायब!   क्या यह सिर्फ अधूरी पोर्टल प्रविष्टि है, नस्ती के डिजिटलीकरण की लापरवाही है अथवा वास्तविक कार्रवाई की रफ्तार भी उतनी ही सुस्त है?

जवाब दस्तावेज से ही आना चाहिए

तारीख 2026 की, प्रकरण वर्ष 2025–26—रिकॉर्ड की खिचड़ी किसने पकाई?

पोर्टल पर पंजीयन की तारीख 27 अगस्त 2026 है, लेकिन प्रकरण वर्ष 2025–2026 अंकित है।

अगस्त 2026 का मामला सामान्यतः 2026–27 में दर्ज होना चाहिए। फिर इसे 2025–26 के खाते में क्यों दिखाया गया?

क्या यह तकनीकी भूल है?

पुराने प्रकरण का माइग्रेशन है?

बैकडेटेड प्रशासनिक प्रविष्टि है?

या सरकारी रिकॉर्ड को बिना मिलान के पोर्टल पर चढ़ा दिया गया?

फिलहाल इसे जानबूझकर की गई हेराफेरी कहना उचित नहीं होगा, लेकिन ₹122 करोड़ जैसे संवेदनशील मामले में ऐसी विसंगति को मामूली टाइपिंग गलती मानकर झाड़ देना भी संभव नहीं।  वनमंडलाधिकारी ने मांगी वसूली—लेकिन किस जुर्म, शुल्क या जमीन के ₹122 करोड़?  वर्तमान रिकॉर्ड में आवेदक कोई निजी व्यक्ति नहीं, बल्कि वनमंडलाधिकारी, कोरबा हैं।  इसका अर्थ है कि ₹122.14 करोड़ की मांग वन विभाग से निकली किसी शासकीय देयता से जुड़ी है।

मगर सरकार के खुले रिकॉर्ड यह नहीं बताते कि रकम:

– वनभूमि के कथित अनधिकृत उपयोग की क्षतिपूर्ति है;
– वनभूमि डायवर्जन का शुल्क है;
– नेट प्रेजेंट वैल्यू—NPV है;
– पर्यावरणीय या दंडात्मक क्षतिपूर्ति है;
– ब्याज सहित कोई पुराना बकाया है;
– अथवा किसी अन्य सरकारी देयता की वसूली है।

BALCO के वन और राजस्व भूमि से संबंधित पुराने विवाद पहले भी चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस विशेष ₹122.14 करोड़ की RRC को किसी निश्चित खसरे, रकबे अथवा कथित 1700–1800 एकड़ भूमि विवाद से जोड़ने वाला मूल आदेश अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

इसलिए वन विभाग को फाइल का मुंह खोलना होगा।

मूल मांग-पत्र दिखाइए।

राशि की गणना बताइए।

खसरा–रकबा सार्वजनिक कीजिए।

किस नियम और किस आदेश के तहत ₹122 करोड़ निकाले गए—जनता को जानने दीजिए।

छोटे बकायेदार के लिए नोटिस की बिजली, बड़े घराने के सामने फाइलों की मोमबत्ती?

यही इस मामले का सबसे कड़वा प्रश्न है।

आम नागरिक का छोटा राजस्व बकाया हो तो ब्याज, नोटिस, तामिली और वसूली की पूरी सेना सक्रिय हो जाती है। लेकिन यहां रकम ₹122 करोड़ से अधिक है और तीन वर्ष बाद भी सरकारी पोर्टल “कार्यवाही प्रक्रियाधीन” की लोरी सुना रहा है।

क्या कानून रकम देखकर नहीं, रसूख देखकर चाल बदलता है?

क्या सरकारी वसूली की रफ्तार सामने वाले की ताकत से तय होती है?

क्या कोई वैध स्थगन आदेश है जिसे पोर्टल पर दर्ज नहीं किया गया?

यदि है, तो उसे सार्वजनिक करने में डर कैसा?

यदि नहीं है, तो वसूली रुकी क्यों?

प्रशासन और BALCO से दस सीधे सवाल

1. ₹122.14 करोड़ की मूल मांग किस आदेश से निर्धारित हुई?
2. राशि की गणना किन खसरों और कितने रकबे के आधार पर हुई?
3. BALCO को दावा-पत्र किस तारीख को तामील हुआ?
4. कंपनी ने दावा-पत्र का क्या उत्तर दिया?
5. क्या BALCO ने मांग को किसी न्यायालय या उच्च अधिकारी के सामने चुनौती दी?
6. क्या वसूली पर कोई अंतरिम अथवा अंतिम रोक है?
7. अब तक कितनी रकम सरकारी खाते में जमा हुई?
8. कोई भुगतान हुआ तो चालान और कोषालय रिकॉर्ड कहां है?
9. अप्रैल 2023 से अगस्त 2026 तक प्रकरण किस अधिकारी के पास लंबित रहा?
10. पुराने मामले को नए क्रमांक से दर्ज करने का लिखित आदेश कहां है?

रकम आई है तो चालान दिखाओ, रोक लगी है तो आदेश दिखाओ!

अब गोलमोल बयान से काम नहीं चलेगा।  कलेक्टर कोरबा पत्र क्रमांक 5072/रा.आ.शा./2023 और उसके बाद की कार्रवाई सार्वजनिक करें।  वनमंडलाधिकारी कोरबा मूल RRC, मांग-आदेश और ₹122.14 करोड़ की गणना सामने रखें।  तहसीलदार कोरबा दावा-पत्र, तामिली रिपोर्ट, BALCO का जवाब, वसूली रजिस्टर और पूरी आदेश-पत्रिका जारी करें।  BALCO प्रबंधन बताए कि मांग स्वीकार की, भुगतान किया अथवा चुनौती दी। यदि कोई स्थगन है तो केस नंबर और आदेश की प्रमाणित प्रति सार्वजनिक करे।

₹122 करोड़ की फाइल पर किसका अदृश्य ताला?

उपलब्ध दस्तावेज BALCO को किसी अपराध का दोषी घोषित नहीं करते। मूल मांग-आदेश और कंपनी का पक्ष सामने आए बिना वसूली को अंतिम एवं निर्विवाद देनदारी भी नहीं कहा जा सकता।

लेकिन सरकारी दस्तावेज यह जरूर चीख-चीखकर बताते हैं कि:

– अप्रैल 2023 में BALCO से ₹122.14 करोड़ की RRC वसूली का प्रकरण पहुंचा;
– कंपनी को दावा-पत्र जारी करने का निर्देश हुआ;
– तीन वर्ष बाद पुराने मामले को नया क्रमांक मिला;
– फिर भी पोर्टल पर न अगली सुनवाई है, न आदेश-पत्र और न वसूली का हिसाब।

अब प्रशासन बताए

₹122.14 करोड़ की वसूली हुई, कानूनी रूप से रुकी या सरकारी फाइलों में सुला दी गई?

क्योंकि यदि कोई वैध रोक नहीं और रकम भी नहीं आई, तो यह केवल एक लंबित प्रकरण नहीं—सरकारी राजस्व व्यवस्था की रीढ़ पर खड़ा ₹122 करोड़ का सवालिया निशान है।  ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस मामले की दस्तावेजी परतें लगातार खोलेगा। मूल मांग-पत्र, BALCO का जवाब, भुगतान रिकॉर्ड और संभावित स्थगन आदेश सामने आते ही अगली कड़ी प्रकाशित की जाएगी।

संपादक – अब्दुल सुल्तान

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