नगर निगम कोरबा में “GeM का जहरीला गेम”—100 वॉट की बोली में 105 वॉट का सुराख!

721 स्ट्रीट लाइटों की खरीदी में तकनीकी शर्तों का ऐसा कबाड़—Voltage को Frequency, 50Hz को Resistance और IK-10 को बना दिया Power!
294×158×55 mm का ‘नाप’ आखिर किस चहेते मॉडल की देह से उतारा गया? निगम बताए—यह कलम की गलती, तकनीकी अयोग्यता या प्रतिस्पर्धा का गला घोंटने वाला सुनियोजित फिल्टर?
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर निगम कोरबा की GeM खरीदी में एक बार फिर ऐसा तकनीकी तमाशा सामने आया है, जिसे पढ़कर बिजली का खंभा भी शर्म से झुक जाए!जिस LED Street Light को GeM की मूल Category Specification में 100 वॉट बताया गया, Buyer की अतिरिक्त शर्तों में वही लाइट रहस्यमय तरीके से 105 वॉट बन गई। यानी निविदा का चेहरा 100 वॉट का, भीतर की चाल 105 वॉट की!
अब प्रश्न यह नहीं कि पांच वॉट कहां से आए। असली प्रश्न यह है कि ये पांच वॉट किसके लिए आए?
क्या किसी खास कंपनी का तैयार मॉडल 105 वॉट का था?
क्या उसी मॉडल को तकनीकी दरवाजे से अंदर पहुंचाने के लिए 100 वॉट की निविदा में 105 वॉट की चाबी लगाई गई?
या निगम की तकनीकी शाखा ने सार्वजनिक धन की खरीदी को कट-पेस्ट का प्रयोगशाला बना दिया?
गलती कोई भी हो—उसका जहर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, बिजली खर्च और नगर निगम के खजाने में उतर सकता है?
ऊपर 100 वॉट, भीतर 105 वॉट—बोलीदाता किस आदेश को सच माने?
Bid Number GEM/2026/B/7871510, Tender ID 9703490, नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा 5 अगस्त 2026 को जारी की गई। इसमें IS 10322 Part 5/Section 3 के अनुरूप कुल 721 LED Street Lights खरीदी जानी हैं।
मुख्य GeM Specification कहती है: «System Wattage—100W»
लेकिन Buyer Added Specification आदेश देती है: «105 watt»
अब 100W की लाइट देने वाला मूल specification में सफल और अतिरिक्त शर्त में असफल हो सकता है। दूसरी ओर 105W की लाइट देने वाला Buyer की शर्त पूरी करेगा, लेकिन घोषित category से अलग product पेश करेगा।
क्या यही वह तकनीकी फंदा है जिसमें अनचाहे bidders को फंसाकर बाहर और मनचाहे product को भीतर किया जा सकता है?
नगर निगम बताए—तकनीकी मूल्यांकन 100W पर हुआ या 105W पर?
यदि 105W चाहिए था तो 100W category क्यों चुनी गई?
यदि 100W चाहिए था तो 105W किसने जोड़ा?
और यदि यह केवल टंकण त्रुटि थी तो corrigendum कहां है?
तकनीकी Specification या मदारी का पिटारा?
Buyer Added Specification में parameters और values को ऐसी जहरीली खिचड़ी में मिलाया गया है कि बिजली इंजीनियर भी माथा पकड़ ले। दस्तावेज में parameters हैं: «Watt, Frequency, Resistant, Power, Harmonic Distortion, IP, Starting Time, Lumens Efficacy…» और सामने values की माला है: «105 watt, 240 VAC, 50Hz, IK-10, >.95, >10, IP-66, Rapid <0>135+ lm/W…»
दर्ज क्रम के अनुसार:
– Frequency के सामने 240 VAC;
– Resistant के सामने 50Hz;
– Power के सामने IK-10;
– Harmonic Distortion के आसपास “>.95” और “>10”;
– Starting Time के सामने “Rapid <0>” पहुंच गया।
240 VAC कब से Frequency हो गया?
50Hz कब से Resistance बन गया?
IK-10 कब से Power की इकाई हो गई?
क्या तकनीकी शाखा ने specification बनाई थी या शब्दों और अंकों को आंख बंद करके एक पंक्ति में पटक दिया था? और यदि यही उलझी हुई पंक्ति technical evaluation का आधार बनी, तो किस bidder के documents को किस अर्थ में पढ़कर पास या फेल किया गया?
यह तकनीकी अराजकता मनमानी की ऐसी खिड़की खोलती है, जिससे नियम बाहर और पसंदीदा फैसला भीतर आ सकता है। Harmonic Distortion भी निगम की मर्जी से उल्टा बहेगा? Specification में “>.95” और “>10” दर्ज है। संभवतः “>0.95” Power Factor होना था और Harmonic Distortion के लिए “<10%” जैसी अधिकतम सीमा लिखी जानी थी। लेकिन दस्तावेज में संकेत >10 दिखाई देता है।
यदि यह THD की शर्त है तो क्या नगर निगम कम distortion के बजाय अधिक distortion वाला driver मांग रहा था?
तकनीकी नियमों को सिर के बल खड़ा करके किस गुणवत्ता की रक्षा की जा रही है?
यह भूल है तो संशोधन कहां?
यह जानबूझकर लिखा गया है तो technical justification कहां?
और यदि समिति ने इसे अपने मन से “<10” पढ़ लिया तो सभी bidders को समान जानकारी कैसे मिली?
“Rapid <0>”—न समय, न इकाई; फिर मूल्यांकन किस ज्योतिष से हुआ?
Starting Time के सामने लिखा है:
«Rapid <0>» न सेकंड, न millisecond, न test method और न कोई स्पष्ट सीमा! क्या bidders को तकनीकी document जमा करना था या निगम की अधूरी पहेली सुलझानी थी?
जिस शर्त को नापा ही नहीं जा सकता, उस पर किसी bidder को पास या फेल करना निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं, बल्कि विवेकाधीन चाबुक बन सकता है।
294×158×55 mm—इतना सटीक नाप आखिर आया कहां से?
Buyer ने luminaire का आकार ठीक: «294×158×55 mm» मांगा है।
न एक millimeter कम, न ज्यादा।
न कोई tolerance।
न कोई range।
न pole compatibility drawing।
न technical justification।
क्या नगर निगम सड़क रोशन करने के लिए performance-based LED खरीद रहा था या किसी पहले से चुनी हुई देह के लिए नाप का सूट सिलवा रहा था? खुले बाजार एवं उपलब्ध web records में इस exact dimension वाले 105W model का कोई स्पष्ट सामान्य catalogue match नहीं मिला। इससे अभी किसी कंपनी की मिलीभगत सिद्ध नहीं होती, लेकिन सवाल और जहरीला हो जाता है:
यह हूबहू नाप किस datasheet से उठा?
सफल bidder की Product TDS और Dimension Drawing सामने आते ही इस रहस्य की असली गांठ खुल सकती है। यदि successful product की datasheet में यही exact dimension मिला, तो निगम को बताना होगा कि Bid पहले बनी थी या product पहले चुन लिया गया था! गुणवत्ता का कवच या प्रतिस्पर्धा के गले में प्रमाणपत्रों की रस्सी?
निविदा में एक साथ मांगा गया:
– तीन वर्ष का अनुभव;
– ₹25 लाख bidder turnover;
– ₹1.50 करोड़ OEM turnover;
– 40 प्रतिशत past performance;
– ISO 9001;
– ISO 14001;
– ISO 45001;
– LM-79;
– LM-80;
– “In House, NABL LAB”;
– exact dimension;
– MSE एवं Startup को कोई relaxation नहीं।
हर शर्त का अपना औचित्य हो सकता है, लेकिन इन सभी को जोड़कर पात्र manufacturers की संख्या कितनी बची?
क्या निगम ने market availability की जांच की?
क्या GeM Availability Report तैयार हुई?
क्या specification जारी होने से पहले यह देखा गया कि कितने OEM इसे पूरा कर सकते हैं?
या पात्रता की छलनी इतनी बारीक बनाई गई कि अंत में वही product बचे जिसका नाप पहले से जेब में रखा था?
भारत सरकार का Procurement Manual स्पष्ट करता है कि technical specifications व्यापक, स्पष्ट, मापने योग्य और अधिकतम प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने वाली होनी चाहिए। किसी vendor अथवा vendor-group की ओर झुकी शर्तें सरकारी खरीद का पहचाना हुआ जोखिम हैं। बोलीदाता की NABL Lab चाहिए—निगम की ‘गुप्त Lab’ का नाम तक नहीं! Bid में लिखा गया है कि सामग्री Buyer’s Lab में जांची जाएगी और उसी का परिणाम acceptance का एकमात्र आधार होगा।
लेकिन Buyer’s Lab:
– कहां है?
– उसका नाम क्या है?
– क्या वह NABL accredited है?
– उसमें कौन-से परीक्षण उपलब्ध हैं?
– sample कौन चुनेगा?
– sample sealing कौन करेगा?
– असफल report पर स्वतंत्र retest होगा या नहीं?
बोलीदाता के लिए प्रमाणपत्रों का पहाड़ और Buyer की निर्णायक प्रयोगशाला के लिए जानकारी का शून्य! क्या यह गुणवत्ता परीक्षण है या भुगतान रोकने और माल स्वीकारने-अस्वीकारने की एकतरफा तलवार?
BIS Certificate किसका—100W का या 105W का?
निविदा में BIS अनिवार्य है, लेकिन जब wattage ही दोमुंहा हो गया तो BIS compliance किस model पर जांची जाएगी?
– 100W model?
– 105W model?
– किसी wattage range?
– या सफल bidder की सुविधानुसार चुने गए document पर?
नगर निगम सफल bidder का BIS licence number, manufacturing unit, brand, model और approved wattage सार्वजनिक करे। यदि order 100W category का और supply 105W की हुई, तो invoice, CRAC, inspection और भुगतान—सभी की जांच आवश्यक होगी।
GST का भी खेल—18% Tax Rate को 18% RCM किसने बनाया?
Bid में लिखा है:
– RCM Applicable—Yes;
– GST under RCM—18%;
– ITC—NA।
लेकिन वस्तु पर 18 प्रतिशत GST rate होना और transaction पर 18 प्रतिशत Reverse Charge लागू होना एक बात नहीं है। RCM के लिए स्पष्ट statutory notification, notified goods और निर्धारित supplier-recipient category आवश्यक होती है। सार्वजनिक CBIC records की खोज में सामान्य LED street-light supply को RCM में डालने वाला स्पष्ट product-specific आधार सामने नहीं आया।
तो नगर निगम बताए:
1. Section 9(3) की कौन-सी notification लागू हुई?
2. उसका serial number क्या है?
3. HSN क्या है?
4. seller को zero GST quote करना था या GST सहित?
5. निगम ने tax सरकार को स्वयं जमा किया या supplier को भुगतान किया?
6. ITC को NA रखने का आधार क्या है?
क्या यह portal की नासमझी है या कर निर्धारण में कोई नया “GeM ज्ञान” पैदा कर दिया गया? अनुमानित लागत गायब—पात्रता ऊंची, जनता से कीमत छिपी! EMD ₹1.50 लाख है। Bidder turnover ₹25 लाख और OEM turnover ₹1.50 करोड़ है। लेकिन उपलब्ध Bid और publicly indexed records में अनुमानित खरीदी मूल्य साफ दिखाई नहीं देता।
जब अनुमानित राशि ही सामने नहीं तो जनता कैसे जांचे:
– EMD किस अनुपात में रखी गई?
– स्वीकृत बजट कितना था?
– benchmark rate क्या था?
– 721 लाइटों की वास्तविक अनुमानित लागत कितनी थी?
– क्या पुराने purchase rate से तुलना हुई?
– क्या अधिकतम वित्तीय दायित्व छिपाया गया?
सार्वजनिक धन की खरीद में कीमत धुंधली और पात्रता की दीवार चमकदार—यह पारदर्शिता का कौन-सा मॉडल है? पांच वॉट का छोटा छेद, दस वर्षों में लाखों का रिसाव! 721 लाइटों में प्रति लाइट पांच वॉट अतिरिक्त होने पर कुल अतिरिक्त connected load: 3.605 किलोवॉट 12 घंटे प्रतिदिन संचालन पर संभावित अतिरिक्त खपत: लगभग 15,790 यूनिट प्रतिवर्ष ₹8 प्रति यूनिट की उदाहरणात्मक दर पर:करीब ₹1.26 लाख प्रतिवर्ष और दस वर्ष में tariff वृद्धि छोड़कर: लगभग ₹12.63 लाख अर्थात पांच वॉट की कलम दस वर्षों तक निगम के बिजली बिल में जहर टपका सकती है। Bid बंद—लेकिन विजेता, कीमत और मूल्यांकन पर पर्दा!
Bid 27 अगस्त 2026 को बंद हो चुकी है। फिर भी सार्वजनिक web records में स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं मिले:
– कुल participating bidders;
– technically qualified bidders;
– disqualified bidders और कारण;
– L1, L2 और L3 rates;
– successful bidder;
– OEM और model;
– final contract value;
– corrigendum;
– GeM Contract Order;
– inspection अथवा CRAC।
यदि contract जारी हो चुका है तो comparative statement और award सार्वजनिक क्यों नहीं?
यदि Bid निरस्त हुई तो cancellation order कहां है?
और यदि technical evaluation जारी है तो 100W–105W के टकराव को सुधारे बिना किस आधार पर आगे बढ़ा जा रहा है?
ग्राम यात्रा का सीधा प्रहार—निगम जवाब दे!
1. 100W की category में 105W किसने घुसाया?
2. क्या competent authority ने लिखित अनुमति दी?
3. corrigendum क्यों नहीं निकाला गया?
4. 294×158×55 mm किस product की datasheet से लिया गया?
5. सफल bidder का model इसी exact dimension का है क्या?
6. कितने OEM इस तकनीकी छलनी को पार कर सकते थे?
7. कितनी bids आईं और कितनी बाहर हुईं?
8. प्रत्येक technical rejection का कारण क्या था?
9. L1–L2–L3 का मूल्य अंतर कितना था?
10. final contract किसे और कितनी राशि में मिला?
11. खरीदी 100W की हुई या 105W की?
12. Buyer’s Lab का नाम और accreditation क्या है?
13. RCM की अधिसूचना एवं serial number क्या है?
14. Estimate, Rate Analysis और Administrative Approval कहां हैं?
15. Specification तैयार करने वाले अधिकारी कौन हैं?
यह गलती नहीं—जांच की घंटी है! नगर निगम इसे “टंकण त्रुटि” कहकर फाइल की कब्र में दफन नहीं कर सकता।
क्योंकि यदि गलती थी तो उसे सुधारा क्यों नहीं गया?
यदि तकनीकी निर्णय था तो उसका कारण दर्ज क्यों नहीं है?
यदि किसी bidder ने आपत्ति की तो जवाब क्या दिया गया?
और यदि इन्हीं दोमुंही शर्तों पर contract दिया गया तो मूल्यांकन को निष्पक्ष कैसे माना जाए?
अभी उपलब्ध दस्तावेज भ्रष्टाचार को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं करते, लेकिन खरीदी प्रक्रिया की तकनीकी विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न अवश्य खड़े करते हैं। यहां 100W और 105W के बीच सिर्फ पांच वॉट का अंतर नहीं—इन पांच वॉट के बीच छिपा हो सकता है पात्रता का पूरा खेल, किसी मॉडल का गुप्त नाप और जनता के पैसे पर टिकाया गया महंगा सौदा! ऊपर 100 वॉट का बोर्ड, भीतर 105 वॉट का बंदोबस्त—वाह रे नगर निगम कोरबा, तेरे “GeM के गेम” में नियम भी करंट खाकर गिर पड़े! ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस खरीदी की अगली परत—सफल bidder, OEM, exact model, BIS licence, comparative rates, RCM और भुगतान रिकॉर्ड—दस्तावेजों के साथ सामने लाएगा।
जल्द खुलेगा राज—294×158×55 mm के रहस्यमय नाप में किस कंपनी का चेहरा छिपा है?
संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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