ओडिशा में VEDANTA–FACOR पर NGT की संयुक्त जांच… तो कोरबा में सवालों पर वैसी सख्ती कब?

वहां ‘क्लीन चिट’ के बाद भी जमीन पर सच जांचने निकलेगी Joint Committee—इधर BALCO के गढ़ कोरबा में वर्षों से प्रदूषण, फ्लाई ऐश और पर्यावरणीय शिकायतों की लंबी कहानी
सवाल तीखा है—क्या कानून और पर्यावरणीय जवाबदेही की कसौटी हर औद्योगिक क्षेत्र में समान कठोरता से लागू हो रही है?
कोरबा/जाजपुर। ओडिशा के Sukinda में Vedanta Group द्वारा संचालित FACOR Ostapal Chromite Mines से कथित toxic effluent discharge की शिकायत पर National Green Tribunal का 4 अगस्त 2026 का आदेश अब कोरबा के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। FACOR मामले में आरोप है कि खदान से करीब 15 लाख cubic metres toxic water/effluent Damsala nullah में छोड़ा गया। यह शिकायत में दर्ज आरोप है, अभी सिद्ध तथ्य नहीं।Odisha Pollution Control Board की पूर्व जांच में आरोपों को नकारा गया था, लेकिन शिकायतकर्ता की आपत्तियों के बाद मामला खत्म नहीं हुआ। NGT ने मामले में substantial environmental questions पाते हुए वास्तविक स्थिति की जांच के लिए MoEF&CC, Odisha Pollution Control Board और District Magistrate, Jajpur की Joint Committee बना दी। समिति को मौके पर जाकर तथ्य सत्यापित करने और remedial action सुझाने का निर्देश है।
लेकिन यही आदेश कोरबा से एक असहज सवाल पूछता है
जब ओडिशा में Vedanta Group से जुड़ी खदान की शिकायत पर ‘क्लीन चिट’ के बावजूद दोबारा जमीन पर तथ्य जांचे जा सकते हैं, तो औद्योगिक नगरी कोरबा में BALCO से जुड़ी पर्यावरणीय शिकायतों पर निरंतर और पारदर्शी जवाबदेही की कसौटी कितनी मजबूत है?
यह सवाल हवा में नहीं है।
कोरबा में BALCO को लेकर पूर्व में fly ash disposal, red mud, air-water pollution और पर्यावरणीय अनुपालन जैसे विषय NGT तक पहुंच चुके हैं। इन मामलों में भी संयुक्त समितियां बनीं और मौके पर जांच हुई। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि कोरबा में कभी कार्रवाई ही नहीं हुई। असल सवाल कार्रवाई की निरंतरता, पारदर्शिता और शिकायतों के अंतिम परिणाम का है। “दूसरे राज्य में कानून सख्त… तो कोरबा में किसका राज?”
यही वह सवाल है जिसे अब जनता पूछ सकती है—
क्या कोरबा में पर्यावरणीय शिकायत दर्ज होने से लेकर जांच, रिपोर्ट, जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई तक की पूरी श्रृंखला आम नागरिक के सामने उतनी ही पारदर्शी है?
क्या BALCO से संबंधित प्रत्येक गंभीर पर्यावरणीय शिकायत की Action Taken Report सार्वजनिक रूप से आसानी से उपलब्ध है?
यदि कहीं उल्लंघन मिला तो जिम्मेदार कौन था और कार्रवाई क्या हुई?
और यदि शिकायत गलत निकली तो उसके समर्थन में वैज्ञानिक जांच और परीक्षण रिपोर्ट जनता के सामने कितनी स्पष्टता से रखी गई?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला किसी कंपनी के पक्ष या विपक्ष का नहीं है। मामला है कोरबा की हवा, पानी, जमीन और लाखों नागरिकों के पर्यावरणीय अधिकार का। FACOR का आदेश कोरबा के लिए आईना NGT ने FACOR मामले में यह नहीं कहा कि Vedanta दोषी है। उसने इससे अधिक महत्वपूर्ण काम किया—विवादित आरोपों की वास्तविक स्थिति को Joint Committee से स्वतंत्र रूप से verify कराने का रास्ता चुना।
अब यही कसौटी कोरबा के सामने रखकर पूछा जाना चाहिए—
“ओडिशा में क्लीन चिट के बाद भी संयुक्त जांच, तो कोरबा में हर गंभीर शिकायत का पूरा सच सार्वजनिक क्यों न हो?”
और इससे भी बड़ा सवाल—
“क्या कोरबा में कानून का राज है… या बड़े औद्योगिक प्रभाव के सामने व्यवस्था कमजोर दिखाई देती है?”
इस सवाल का जवाब आरोपों से नहीं, बल्कि inspection reports, laboratory results, environmental compliance records और Action Taken Reports सार्वजनिक करने से मिलेगा। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का उद्देश्य किसी संस्था को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यही पूछना है कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में कानून की कसौटी हर राज्य और हर कॉरपोरेट के लिए समान क्यों न हो?
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