जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जैन के जाति प्रमाण-पत्र मामले में उच्च स्तरीय छानबीन समिति के समक्ष सुनवाई

शिकायतकर्ता पक्ष ने बड़ी संख्या में ग्रामीणों और शपथ-पत्रों के साथ दर्ज कराया विरोध, अब अंतिम निर्णय का इंतजार
नवा रायपुर/मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। जिला पंचायत अध्यक्ष नम्रता सिंह जैन के अनुसूचित जनजाति (गोंड) जाति प्रमाण-पत्र की वैधता से जुड़े बहुचर्चित मामले में शुक्रवार को उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के समक्ष सुनवाई हुई। उपलब्ध दस्तावेज़ों के अनुसार समिति ने संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने तथा आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का अवसर दिया।
बड़ी संख्या में पहुंचे शिकायतकर्ता पक्ष के समर्थक
शिकायतकर्ता विवेक सिंह के अनुसार सुनवाई के दौरान 100 से अधिक ग्रामीण, सामाजिक प्रतिनिधि एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित हुए। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि उन्होंने समिति के समक्ष 50 से अधिक नोटरीकृत शपथ-पत्र (Affidavits) तथा अन्य दस्तावेज़ प्रस्तुत कर अपने विरोध को दर्ज कराया।

दस्तावेज़ों और न्यायिक निर्णयों का दिया गया हवाला
शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि उन्होंने सुनवाई के दौरान विस्तृत दस्तावेज़ों के साथ अपना पक्ष रखा तथा संबंधित अभिलेखों, ग्रामसभा के रिकॉर्ड और न्यायालय के कुछ निर्णयों का उल्लेख करते हुए जाति प्रमाण-पत्र की वैधता पर प्रश्न उठाए।
दूसरी ओर, उपलब्ध दस्तावेज़ों से यह भी स्पष्ट है कि संबंधित पक्ष को भी अपना पक्ष और दस्तावेज़ प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया गया।
अब समिति के अंतिम निर्णय पर टिकी नजर
सुनवाई पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के अंतिम निर्णय पर हैं। समिति द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद ही अंतिम आदेश जारी किया जाएगा।

अंतिम निर्णय के बाद क्या हो सकता है?
यदि जांच के बाद समिति यह निष्कर्ष निकालती है कि जाति प्रमाण-पत्र विधिसम्मत है, तो मामला वहीं समाप्त हो सकता है।
यदि समिति जांच के बाद जाति प्रमाण-पत्र को अवैध या नियमों के विपरीत पाती है, तो उसके बाद संबंधित कानूनों के अनुसार आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। ऐसी कार्रवाई का स्वरूप सक्षम प्राधिकारी और लागू कानूनों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल क्या स्पष्ट है?
उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति के समक्ष सुनवाई हो चुकी है।
दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
शिकायतकर्ता पक्ष ने बड़ी संख्या में दस्तावेज़ और शपथ-पत्र प्रस्तुत करने का दावा किया है।
अंतिम निर्णय अभी समिति द्वारा जारी किया जाना शेष है।
अब पूरे प्रदेश की नजर समिति के अंतिम आदेश पर है, क्योंकि वही तय करेगा कि इस बहुचर्चित मामले का कानूनी निष्कर्ष क्या होगा।
नोट: यह समाचार उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों तथा शिकायतकर्ता पक्ष द्वारा किए गए दावों के आधार पर तैयार किया गया है। अंतिम निर्णय उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति द्वारा जारी आदेश पर निर्भर करेगा। किसी भी संभावित परिणाम को अंतिम तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
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