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विशेष दस्तावेज़ आधारित रिपोर्ट BALCO की 1200 मेगावाट परियोजना का बदला था पूरा ढांचा: एक की जगह दो 275 मीटर चिमनियां, अब अनुपालन पर बड़े सवाल 2011 के केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आदेश ने खोली पुरानी फाइल—ऑनलाइन प्रदूषण निगरानी, पारा उत्सर्जन और सार्वजनिक आंकड़ों का रिकॉर्ड कहां है?

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विशेष दस्तावेज़ आधारित रिपोर्ट

BALCO की 1200 मेगावाट परियोजना का बदला था पूरा ढांचा: एक की जगह दो 275 मीटर चिमनियां, अब अनुपालन पर बड़े सवाल

2011 के केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के आदेश ने खोली पुरानी फाइल—ऑनलाइन प्रदूषण निगरानी, पारा उत्सर्जन और सार्वजनिक आंकड़ों का रिकॉर्ड कहां है?

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

कोरबा | नई दिल्ली

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कोरबा/नई दिल्ली। BALCO की ग्राम रिसदा स्थित 1200 मेगावाट कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजना से जुड़ा केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का 27 अप्रैल 2011 का आदेश कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक प्रश्न सामने लाता है।

उपलब्ध सरकारी दस्तावेज़ के अनुसार, परियोजना का मूल स्वरूप 2×600 मेगावाट से बदलकर 4×300 मेगावाट किया गया। इसी संशोधन के साथ पहले स्वीकृत एक 275 मीटर ऊंचे बाई-फ्लू स्टैक के स्थान पर दो अलग-अलग 275 मीटर ऊंचे बाई-फ्लू स्टैक स्थापित करने की शर्त भी जोड़ी गई।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है—

क्या इस बदलाव के बाद मंत्रालय द्वारा निर्धारित सभी पर्यावरणीय एवं तकनीकी शर्तों का पूर्ण अनुपालन किया गया?


2007 की मंजूरी, 2011 में बड़ा बदलाव

परियोजना को 14 अगस्त 2007 को मूल पर्यावरणीय स्वीकृति मिली थी। उस समय इसका कॉन्फिगरेशन 2×600 मेगावाट था।

दस्तावेज़ों के अनुसार BALCO ने 12 नवंबर 2010 को परियोजना संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसके बाद 27 अप्रैल 2011 को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने संशोधित कॉन्फिगरेशन 4×300 मेगावाट को स्वीकृति प्रदान की।

 

कुल उत्पादन क्षमता 1200 मेगावाट ही रही, लेकिन इकाइयों, फ्लू गैस निकासी व्यवस्था, स्टैक संरचना तथा प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन दर्ज किए गए।


एक नहीं, दो विशाल चिमनियां

संशोधित आदेश के अनुसार परियोजना में दो 275 मीटर ऊंचे बाई-फ्लू स्टैक स्थापित किए जाने थे।

 

इसी आदेश में दोनों स्टैक पर निरंतर ऑनलाइन प्रदूषण निगरानी प्रणाली (Continuous Online Monitoring System) स्थापित करने का भी उल्लेख किया गया।

अब जनहित में निम्न प्रश्न उठते हैं—

  • दोनों स्टैक कब और किस स्वीकृत डिजाइन के अनुसार निर्मित किए गए?
  • उनकी संरचनात्मक सुरक्षा का प्रमाणन किस एजेंसी ने किया?
  • क्या निर्माण के दौरान डिजाइन, तकनीक या ठेकेदार में कोई परिवर्तन हुआ?
  • क्या दोनों चिमनियों की स्वतंत्र सुरक्षा जांच कराई गई?

प्रदूषण का लाइव रिकॉर्ड सार्वजनिक होना था

आदेश में SO₂, NOₓ, PM2.5 तथा PM10 की नियमित निगरानी का प्रावधान दर्ज है।

दस्तावेज़ के अनुसार इन आंकड़ों को केवल विभागीय रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रखा जाना था, बल्कि—

  • BALCO की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाना था।
  • संयंत्र के मुख्य प्रवेश द्वार पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाना था।

जनहित का प्रश्न:

क्या इन प्रदूषण संबंधी आंकड़ों का वर्षवार सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध है? यदि उपलब्ध है, तो उसे सार्वजनिक डोमेन में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।


22 मीटर प्रति सेकंड से कम नहीं होनी थी गैस की गति

मंत्रालय के आदेश में यह भी उल्लेख है कि चिमनी से निकलने वाली फ्लू गैस की गति 22 मीटर प्रति सेकंड से कम नहीं होनी चाहिए।

इस संबंध में भी कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठते हैं—

  • यह परीक्षण कब-कब किया गया?
  • किस संस्था ने इसका परीक्षण किया?
  • चारों इकाइयों के संचालन के दौरान वास्तविक गति कितनी दर्ज हुई?
  • परीक्षण रिपोर्ट किस विभाग के अभिलेख में उपलब्ध है?

पारा (Mercury) उत्सर्जन की निगरानी

आदेश में मरकरी (Mercury) उत्सर्जन की समय-समय पर निगरानी का भी उल्लेख है।

उपलब्ध दस्तावेज़ों के आधार पर यह स्पष्ट नहीं होता कि—

  • मरकरी परीक्षण कितनी बार किया गया?
  • किस प्रयोगशाला द्वारा किया गया?
  • परिणाम क्या रहे?
  • क्या इन परिणामों को सार्वजनिक किया गया?

यह विषय जनस्वास्थ्य, पर्यावरण तथा आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण सार्वजनिक महत्व रखता है।


जवाब केवल कंपनी से नहीं, निगरानी एजेंसियों से भी अपेक्षित

उपलब्ध आदेश की प्रतिलिपि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CGPCB), राज्य पर्यावरण विभाग तथा जिला कलेक्टर, कोरबा को भी प्रेषित की गई थी।

ऐसे में निम्न प्रश्न संबंधित निगरानी एजेंसियों से भी जुड़े हैं—

  • कितने स्थल निरीक्षण किए गए?
  • क्या दोनों स्टैक का भौतिक सत्यापन हुआ?
  • ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम का परीक्षण कब किया गया?
  • क्या किसी प्रकार की आपत्ति या नोटिस जारी किए गए?
  • यदि कोई अनियमितता पाई गई, तो उस पर क्या कार्रवाई हुई?

सरकारी आदेश स्पष्ट था, अब अनुपालन का रिकॉर्ड भी स्पष्ट होना चाहिए

27 अप्रैल 2011 के आदेश में जिन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख है, उनमें शामिल हैं—

  • दो 275 मीटर ऊंचे स्टैक।
  • निरंतर ऑनलाइन प्रदूषण निगरानी।
  • न्यूनतम फ्लू गैस गति।
  • मरकरी उत्सर्जन की निगरानी।
  • वेबसाइट और मुख्य प्रवेश द्वार पर प्रदूषण संबंधी आंकड़ों का सार्वजनिक प्रदर्शन।

अब जनहित का मूल प्रश्न यही है—क्या इन शर्तों के अनुपालन का रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है?


प्रबंधन का पक्ष

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर ये प्रश्न उठा रहा है। BALCO प्रबंधन तथा संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

संपादकीय टिप्पणी:

यह रिपोर्ट उपलब्ध सरकारी आदेशों एवं सार्वजनिक अभिलेखों के अध्ययन पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों के अनुपालन से जुड़े तथ्यों पर पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपेक्षा व्यक्त करना है।

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