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कलेक्टर साहब देखिए ! बालको G-9 में हरियाली का सफाया,कागजों में ट्रांसप्लांट, जमीन पर विनाश, पहले भी प्लांटेशन भूमि में बना लिया है राखड़ बांध, पढ़िए बालको के अवैध मनसूबों की पूरी दास्तान…

हरियाली का दुश्मन और बेजाकब्जा के लिए पहले से ही चर्चित BALCO का एक और बड़ा खेल सामने आया है ! इस बार मामला उसके निर्माणाधीन आवासीय परिसर G-9 से जुड़ा हुआ है, जहां सैकड़ों हरे-भरे पेड़ों की कटाई और नियमों की खुलेआम अनदेखी के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं ।

जानकारी के अनुसार, जिस क्षेत्र में G-9 का निर्माण किया जा रहा है, वहां पहले लगभग 440 औषधीय, वर्षों पुराने और विशालकाय पेड़ मौजूद थे । इनमें से करीब 270 पेड़ों को स्थानांतरित करने के लिए SDM को आवेदन प्रस्तुत किया गया था । प्रारंभिक स्तर पर इस आवेदन को अनुमति भी प्रदान की गई थी, जिससे यह उम्मीद बनी थी कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जाएगा ।

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लेकिन यहीं से पूरा मामला संदिग्ध मोड़ लेता है । बाद में उक्त भूमि को विवादित बताते हुए पहले दी गई अनुमति को निरस्त कर दिया गया । इसके बाद BALCO प्रबंधन द्वारा दोबारा नया आवेदन प्रस्तुत किया गया और पुनः पेड़ों को स्थानांतरित करने की अनुमति प्राप्त कर ली गई ।

कागजों में यह प्रक्रिया जितनी व्यवस्थित दिखाई देती है, जमीन पर स्थिति उतनी ही भयावह नजर आती है । स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरें, कटे हुए पेड़ों के ढेर और उखाड़ी गई जड़ों के दृश्य यह साफ संकेत दे रहे हैं कि पेड़ों की शिफ्टिंग नहीं बल्कि उनकी सीधी कटाई की जा रही है ।

इस पूरे मामले को और गंभीर बनाता है कार्यालय उपवनमंडलाधिकारी, उत्तर कोरबा का पत्र क्रमांक/उ.को./1453 दिनांक 01.10.2024 । इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि BALCO प्रबंधन की ठेका कंपनी द्वारा बिना अनुमति के निर्माणाधीन हॉस्टल  में वृक्षों की कटाई कर निर्माण कार्य किया जा रहा है, जो कि भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है ।

पत्र में यह भी निर्देशित किया गया था कि जब तक पूरा विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और बिना अनुमति किसी भी प्रकार की वृक्ष कटाई न की जाए । यह आदेश सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि स्पष्ट चेतावनी थी ।

इसके बावजूद, वर्तमान हालात यह दर्शाते हैं कि न तो उस आदेश का पालन हुआ और न ही उससे कोई सबक लिया गया । उल्टा, G-9 प्रोजेक्ट के नाम पर वही गतिविधियां फिर से दोहराई जा रही हैं, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि कहीं न कहीं नियमों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है ।

इतना ही नहीं, वन विभाग के दूसरे पत्र (क्रमांक 512 दिनांक 30.04.2025) में भी यह सामने आया कि BALCO प्रबंधन को जिस भूमि पर पौधारोपण की अनुमति दी गई थी, वहां नियमों के विपरीत राखड़ बांध का निर्माण किया गया । यानी अनुमति कुछ और, काम कुछ और — यह पैटर्न बार-बार सामने आ रहा है ।

अब यदि इन दोनों सरकारी पत्रों और वर्तमान G-9 प्रोजेक्ट की स्थिति को जोड़कर देखा जाए, तो यह साफ दिखाई देता है कि BALCO की कार्यशैली में एक निरंतरता है — पहले अनुमति लेना, फिर नियमों को दरकिनार कर अलग कार्य करना ।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि BALCO के खिलाफ वन भूमि पर कब्जा और अवैध पेड़ कटाई का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है । सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच के लिए दो सदस्यीय टीम मौके का निरीक्षण कर चुकी है और कब्जे की पुष्टि होने की बात सामने आ चुकी है । ऐसे में यह उम्मीद थी कि कंपनी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करेगी, लेकिन हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं ।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, G-9 निर्माण स्थल पर रोजाना पेड़ों की कटाई जारी है । भारी मशीनों के माध्यम से पेड़ों को उखाड़ा जा रहा है और मौके पर कटे हुए तनों का ढेर देखा जा सकता है । यह सब उस स्थिति में हो रहा है जब कागजों में पेड़ों को स्थानांतरित करने की अनुमति ली गई थी ।

सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप सामने आ रहा है कि पूरे मामले में उच्च स्तर से दबाव बनाया जा रहा है और विभागीय कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है । हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटनाक्रम और दस्तावेज कई गंभीर सवाल जरूर खड़े करते हैं ।

यह मामला अब केवल पेड़ों की कटाई तक सीमित नहीं रह गया है । यह प्रशासनिक व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और कानून के अनुपालन की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहा है ।

सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या बड़े औद्योगिक संस्थानों के लिए नियम अलग हैं ? क्या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए ही लागू होते हैं ?

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है और लगातार दस्तावेजों के आधार पर सच्चाई को सामने ला रहा है । आने वाले समय में इस प्रकरण से जुड़े और भी अहम दस्तावेज, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और संभावित मिलीभगत का खुलासा किया जाएगा ।

अब नजर प्रशासन पर है ! क्या इस बार सख्त कार्रवाई होगी या फिर हरियाली की यह बलि यूं ही जारी रहेगी ?

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