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ओपी चौधरी की राह पर एक और पूर्व कलेक्टर? जल्द थाम सकते हैं भाजपा का दामन

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सरिया।   छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर पूर्व नौकरशाह की एंट्री को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी के बाद अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के पूर्व कलेक्टर केएल चौहान का नाम राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, केएल चौहान जल्द ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में सारंगढ़ या सरायपाली विधानसभा सीट से मैदान में उतारे जाने की भी चर्चा है। हालांकि भाजपा और केएल चौहान, दोनों की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

 

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद केएल चौहान ने अपनी सक्रियता का केंद्र सामाजिक कार्यों को बनाया है। पिछले कुछ महीनों में उनकी सरिया, सारंगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में मौजूदगी लगातार बढ़ी है। वे विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ अलग-अलग समाजों और युवाओं से संवाद कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी यह सक्रियता केवल सामाजिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। हाल ही में सरिया में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम के दौरान हमारे संवाददाता वीरेंद्र सोनी से विशेष बातचीत में जब उनसे चुनाव लड़ने और राजनीति में आने की संभावनाओं पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “यह भविष्य की बात है। अभी इस विषय पर कुछ कहना उचित नहीं होगा।

 

 

उनका यह संक्षिप्त जवाब भले ही स्पष्ट संकेत नहीं देता, लेकिन क्षेत्र में चल रही चर्चाओं को जरूर बल देता है। सूत्रों का कहना है कि केएल चौहान पिछले कुछ समय से लगातार लोगों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी बढ़ी है और वे अलग-अलग वर्गों के लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं। यही वजह है कि उनके भाजपा में शामिल होने और विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं।

 

प्रशासनिक अनुभव को बताया सबसे बड़ी ताकत

बातचीत के दौरान केएल चौहान ने कहा कि आज के दौर में प्रशासनिक जिम्मेदारियां पहले की अपेक्षा अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई हैं। हर स्तर पर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन जनता से सीधा जुड़ाव और विश्वास प्रशासनिक कार्यों को आसान बना देता है। उन्होंने बताया कि अपने प्रशासनिक जीवन का सबसे लंबा कार्यकाल बस्तर में रहा, जहां उन्हें जनता का भरपूर सहयोग मिला।

 

 

सारंगढ़ को बताया संभावनाओं वाला जिला

पूर्व कलेक्टर ने कहा कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ विकास की दृष्टि से बेहद संभावनाशील जिला है। ओडिशा की सीमा से लगे होने के कारण यहां दोनों राज्यों की संस्कृति का अनूठा संगम दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि अपने कार्यकाल में जिले के सभी विकासखंडों के लिए अलग-अलग विकास योजनाएं तैयार कर शासन को भेजा गया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में सारंगढ़ रेल परियोजना भी आगे बढ़ेगी, जिससे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।

 

समाज सेवा को बताया अगली प्राथमिकता

केएल चौहान ने कहा कि प्रशासनिक सेवा के बाद अब उनका लक्ष्य समाज सेवा के माध्यम से लोगों के बीच काम करना है। वे समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर एक मजबूत सामाजिक संगठन तैयार करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान में उजागर नंद, राजेंद्र गुरु सहित बड़ी संख्या में युवा सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सेवा से राजनीति में आने वाले अधिकारियों का सफल रिकॉर्ड रहा है। ओपी चौधरी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जिन्होंने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद भाजपा का दामन थामा और आज प्रदेश सरकार में वित्त मंत्री हैं।

 

 

 

ऐसे में यदि केएल चौहान भी सक्रिय राजनीति में कदम रखते हैं तो सारंगढ़ और सरायपाली की राजनीति में नए समीकरण बनना तय माना जा रहा है। फिलहाल सबकी नजर उनके अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है। चर्चा के दौरान भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष संजय चौहान, भाजपा महिला मोर्चा सरिया मंडल अध्यक्ष रजनी चौहान तथा भाजपा जिला महिला मोर्चा सदस्य मीना चौहान भी मौजूद रहे।

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