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ग्राम यात्रा की शिकायत के बाद हिली कुर्सी : 3 दिन में टूटेगी बालको की अवैध दीवार ? आयुक्त आशुतोष पाण्डेय एक्शन में, निगम का अल्टीमेटम—खुद हटाओ, नहीं तो बुलडोजर तय

कोरबा। बालको की बाउंड्रीवाल को लेकर महीनों से उठ रहे सवाल अब आखिरकार प्रशासन को एक्शन में ले आए हैं। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की लगातार खबरों और शिकायत के बाद अब जिला प्रशासन और नगर निगम दोनों सख्त नजर आ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार जिला कलेक्टर कुणाल दुदावत के स्पष्ट निर्देश के बाद नगर पालिक निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की है और बालको को 3 दिन के भीतर अवैध बाउंड्रीवाल हटाने का अल्टीमेटम जारी किया गया है।

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आयुक्त आशुतोष पाण्डेय का स्पष्ट कहना है कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा और यदि निर्धारित समय सीमा में बाउंड्रीवाल नहीं हटाई गई, तो निगम स्वयं कार्रवाई करते हुए इसे तोड़ेगा और पूरा खर्च संबंधित पक्ष से वसूला जाएगा

यह वही मामला है जिसमें पहले 02 और 03 फरवरी 2026 को नगर निगम द्वारा नोटिस जारी कर निर्माण रोकने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (WPC No. 1091/2026) तक पहुंचा, जहां से प्रशासन को कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

इसके बावजूद लंबे समय तक निर्माण कार्य जारी रहना अब प्रशासन की सख्ती का कारण बना है। आयुक्त पाण्डेय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि इस बार केवल नोटिस नहीं, बल्कि जमीन पर कार्रवाई दिखाई देगी

ग्रामयात्रा न्यूज़ के संपादक द्वारा की गई शिकायत की प्रति

3 किलोमीटर की दीवार और बढ़ता विवाद

बताया जा रहा है कि बालको द्वारा लगभग 3 किलोमीटर लंबी बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा था, वह भी बिना किसी वैध अनुमति के।

इस निर्माण से दोन्द्रो बेला और आसपास के गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही थी और उन्हें लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा था।

यानी एक तरफ अवैध निर्माण, दूसरी तरफ सीधे जनता की परेशानी—इसी वजह से मामला अब बड़ा रूप ले चुका है।

पुराना सुप्रीम कोर्ट मामला भी जुड़ा

रिकॉर्ड बताते हैं कि इसी भूमि को लेकर मामला पहले से ही माननीय सुप्रीम कोर्ट (WP (C) No. 469/2005) में लंबित रहा है।

इसी आधार पर वर्ष 03/05/2007 को नगर निगम ने बाउंड्रीवाल निर्माण की अनुमति देने से इंकार कर दिया था।

अब सवाल यही—जब पहले अनुमति नहीं मिली, तो अब निर्माण कैसे हो गया ?

अब 3 दिन की घड़ी शुरू

➡️ 3 दिन में खुद हटाओ
➡️ नहीं हटाई तो निगम तोड़ेगा
➡️ खर्च भी वसूला जाएगा

आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के इस कड़े रुख को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, वहीं कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश के बाद पूरे सिस्टम के एक्टिव होने के संकेत भी मिल रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल

➡️ नोटिस पहले भी थे
➡️ कोर्ट के आदेश भी थे
➡️ निर्माण फिर भी चलता रहा

अब देखना यह है कि इस बार प्रशासन की सख्ती दीवार तक पहुंचेगी या फिर मामला फिर फाइलों में दब जाएगा।

क्योंकि इस बार मामला सिर्फ एक बाउंड्रीवाल का नहीं… प्रशासन की साख का भी है।

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