अपराधराजनीतीराज्य समाचाररोचक तथ्य

बालको बाउंड्रीवाल पर बड़ा खुलासा : ग्राम यात्रा की खबरों के बाद प्रशासन मैदान में, WPC No. 1091/2026 के निर्देश पर संयुक्त निरीक्षण, बड़ी कार्रवाई के संकेत…

2007 में ही सुप्रीम कोर्ट केस (WP (C) No. 469/2005) का हवाला देकर अनुमति हुई थी निरस्त… अब फिर उसी जमीन पर निर्माण ?

कोरबा। लंबे समय से विवादों में घिरी बालको की बाउंड्रीवाल को लेकर अब प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क द्वारा लगातार प्रकाशित खबरों, दस्तावेजों के खुलासे और औपचारिक शिकायत के बाद आखिरकार नगर पालिक निगम कोरबा और जिला प्रशासन हरकत में आया है। हाईकोर्ट (WPC No. 1091/2026) के निर्देशों के बाद अब एक संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर विवादित बाउंड्रीवाल का निरीक्षण किया है, जिससे आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं।

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर गठित टीम में निगम अधिकारियों के साथ जिला प्रशासन के अधिकारी भी शामिल रहे। टीम ने बेलाकछार नदी किनारे एवं नेहरू नगर क्षेत्र में बन रही बाउंड्रीवाल का बारीकी से निरीक्षण किया और यह देखा कि निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है, क्या वैध अनुमति ली गई है और क्या यह निर्माण शासकीय, वन या विवादित भूमि पर किया जा रहा है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

ग्राम यात्रा की खबरों और शिकायत के बाद टूटी प्रशासनिक चुप्पी

इस पूरे मामले में सबसे अहम भूमिका ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की खबरों की रही, जिसमें लगातार यह उजागर किया गया कि बिना अनुमति बाउंड्रीवाल निर्माण किया जा रहा है और इसमें शासकीय एवं वन भूमि पर अतिक्रमण की आशंका है। इसके साथ ही औपचारिक शिकायत दर्ज होने के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ा और अंततः संयुक्त निरीक्षण की कार्रवाई की गई। हालांकि निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था अवैध निर्माण किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

2007 में ही निरस्त हो चुका था आवेदन, सुप्रीम कोर्ट केस का हवाला

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि वर्ष 03/05/2007 को नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा जारी पत्र में बाउंड्रीवाल निर्माण की अनुमति देने से साफ इंकार कर दिया गया था। उस पत्र में स्पष्ट उल्लेख था कि संबंधित भूमि का मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में रिट पिटिशन (सिविल) क्रमांक 469/2005 – सार्थक एवं अन्य बनाम भारत सरकार एवं अन्य में विचाराधीन एवं लंबित है।

Oplus_16908288

यानी 2007 में ही यह स्पष्ट कर दिया गया था कि जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तब तक बाउंड्रीवाल निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे में अब उसी क्षेत्र में निर्माण कार्य किया जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

2026 में दो-दो नोटिस… फिर भी नहीं रुका निर्माण

नगर पालिक निगम कोरबा ने 02 फरवरी 2026 और 03 फरवरी 2026 को नोटिस जारी कर स्पष्ट निर्देश दिया था कि बिना अनुमति निर्माण तत्काल रोका जाए। नोटिस में छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की संबंधित धाराओं का हवाला देते हुए कार्रवाई और निर्माण को तोड़ने तक की चेतावनी दी गई थी।

लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य रुकने के बजाय जारी रहा, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया और अंततः हाईकोर्ट तक पहुंचा।

हाईकोर्ट का दखल : WPC No. 1091/2026

मामले की गंभीरता को देखते हुए यह प्रकरण छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर में WPC No. 1091/2026 के रूप में प्रस्तुत हुआ। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि नगर निगम द्वारा जारी नोटिसों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और मामले को लंबित न रखा जाए।

यानी कोर्ट ने साफ कहा—नोटिस दिए हैं तो कार्रवाई भी करो।

इसके बावजूद यदि निर्माण कार्य जारी रहा, तो यह सीधे-सीधे प्रशासनिक निष्क्रियता या लापरवाही का मामला बनता है।

अब संयुक्त निरीक्षण : कार्रवाई के संकेत

हाईकोर्ट के निर्देश और लगातार बढ़ते दबाव के बाद अब नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची है। निरीक्षण के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया—

➡️ क्या निर्माण कार्य के लिए वैध अनुमति ली गई है
➡️ भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है (राजस्व, नजूल, वन या निजी)
➡️ क्या पूर्व में जारी नोटिसों का पालन किया गया है
➡️ क्या निर्माण विवादित या बिना मुआवजा भूमि पर किया गया है

सूत्रों के अनुसार निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है

जमीन का पूरा गणित भी जांच के दायरे में

दस्तावेजों के अनुसार बालको के पास कुल लगभग 2718 एकड़ भूमि है, जिसमें से 1804 एकड़ लीज होल्ड है। इसी लीज भूमि में बड़ी मात्रा में रेवेन्यू फॉरेस्ट (लगभग 1751 एकड़) शामिल बताई जाती है।

इसके अलावा लगभग 803 एकड़ भूमि का मुआवजा लंबित है और इसी में से 86.42 एकड़ भूमि विशेष रूप से चिन्हित है। ऐसे में यह आशंका और मजबूत होती है कि विवादित और बिना मुआवजा भूमि पर ही निर्माण किया जा रहा है।

रिकॉर्ड में 209 एकड़ का अंतर

➡️ 2014 रिकॉर्ड : 1751 एकड़ रेवेन्यू फॉरेस्ट
➡️ 2017 रिकॉर्ड : 1542 एकड़

➡️ 209 एकड़ का अंतर

यह अंतर भी जांच का बड़ा विषय बन चुका है और संभावना है कि प्रशासन इस पहलू को भी जांच में शामिल करेगा।

अब सबसे बड़ा सवाल

➡️ 2007 में सुप्रीम कोर्ट केस के कारण अनुमति निरस्त
➡️ 2026 में निगम के दो नोटिस
➡️ हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश
➡️ ग्राम यात्रा की शिकायत और खुलासा

फिर भी निर्माण जारी रहा… आखिर किसके भरोसे ?

फिलहाल संयुक्त निरीक्षण के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि प्रशासन इस बार ठोस कार्रवाई करेगा। यदि ऐसा होता है, तो यह मामला कोरबा के सबसे बड़े भूमि और अवैध निर्माण विवादों में से एक बन सकता है।

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button