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VIDEO : डॉक्टर गोपाल कंवर की मनमानी! ठेकेदार से कटवा दिया हरा-भरा पेड़, अनुमति की जरूरत भी नहीं समझी

डॉक्टर गोपाल कंवर की मनमानी! ठेकेदार से कटवा दिया हरा-भरा पेड़, अनुमति की जरूरत भी नहीं समझी

कोरबा। जिला अस्पताल परिसर एक बार फिर विवादों के घेरे में है। मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. गोपाल कंवर के कार्यकाल में अस्पताल परिसर में खड़े हरे-भरे पेड़ों पर आरी चलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। ताजा मामला ब्लड बैंक की नवीन बिल्डिंग निर्माण से जुड़ा है, जहां दिनदहाड़े एक घने, हरे पत्तों से लदे पेड़ को ठेकेदार कल्लू सिंह द्वारा कटर मशीन से काट दिया गया।

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चौंकाने वाली बात यह है कि इस पेड़ कटाई के लिए किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति ली गई या नहीं, इसका स्पष्ट जवाब मौके पर मौजूद लोगों को नहीं दिया गया। जब अनुमति के संबंध में सवाल पूछा गया तो ठेकेदार कल्लू सिंह कथित रूप से वहां से निकलने की कोशिश करता नजर आया।

पहले ली थी अनुमति, अब क्यों नहीं?

सूत्र बताते हैं कि पूर्व में आपातकालीन विभाग के निर्माण के दौरान दर्जनों पेड़ और सैकड़ों पौधों को हटाया गया था। उस समय संख्या अधिक होने के कारण विधिवत अनुमति ली गई थी। लेकिन इस बार एक पेड़ होने का हवाला देकर नियमों को दरकिनार कर दिया गया — ऐसा आरोप लगाया जा रहा है।

बसंत में उजाड़ी हरियाली

बसंत के मौसम में जब पेड़ों पर नई कोपलें फूटती हैं, उसी समय हरे-भरे पेड़ को काटा जाना पर्यावरण प्रेमियों को अखर रहा है। जिला अस्पताल परिसर, जो कभी प्राकृतिक हरियाली के लिए जाना जाता था, धीरे-धीरे कंक्रीट के जंगल में तब्दील होता दिख रहा है।

कमीशन के फेर में फैसले?

अस्पताल परिसर में निर्माण कार्यों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। उधार की बिल्डिंग, नए निर्माण और जल्दबाजी में लिए जा रहे फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये सब प्रशासनिक आवश्यकता है या फिर किसी और वजह से हो रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल की नई बिल्डिंग तैयार होते ही जिला अस्पताल की मौजूदा इमारत उपेक्षित होकर खंडहर में तब्दील हो सकती है, ऐसे में हरियाली उजाड़ने का औचित्य क्या है?

जवाब कौन देगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या पेड़ कटाई के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली गई? यदि नहीं, तो जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?

अब निगाहें जिला प्रशासन और वन विभाग पर टिकी हैं कि वे इस मामले में जांच कर स्पष्टता लाते हैं या नहीं।

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