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पाली सोसायटी राशन परिवहन टेंडर में बड़ा खेल ? अपात्र वाहनों के बावजूद बजरंगबली ट्रांसपोर्ट की बीड खोलने पर गंभीर सवाल, कलेक्टर से निरस्तीकरण की मांग !

कोरबा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत सोसायटियों में राशन परिवहन के लिए जारी पाली प्रदाय केन्द्र के टेंडर में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। निविदा प्रक्रिया में शामिल एक पक्ष ने कलेक्टर कोरबा को लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि निविदा नियमों को दरकिनार करते हुए अपात्र वाहनों वाले निविदाकार की फाइनेंशियल बीड खोल दी गई। इस घटनाक्रम के बाद पूरी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए पाली प्रदाय केन्द्र से सोसायटियों तक राशन परिवहन कार्य हेतु द्वितीय ई-निविदा 08 दिसंबर 2025 से 29 दिसंबर 2025 तक आमंत्रित की गई थी। इस निविदा में केवल दो निविदादाताओं — श्रीमती कविता जैन एवं मेसर्स बजरंगबली ट्रांसपोर्ट द्वारा निविदाएं प्रस्तुत की गई थीं। नियमानुसार दोनों निविदादाताओं के दस्तावेजों की तकनीकी जांच में पात्र पाए जाने के बाद ही फाइनेंशियल बीड खोली जानी थी।

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शिकायतकर्ता हर्षित तिवारी ने कलेक्टर को सौंपे आवेदन में आरोप लगाया है कि मेसर्स बजरंगबली ट्रांसपोर्ट द्वारा प्रस्तुत वाहनों के दस्तावेज निविदा की अनिवार्य शर्तों के अनुरूप नहीं थे। निविदा फार्म के पेज क्रमांक 04 की कंडिका 4.2 में स्पष्ट रूप से भारी मालवाहक वाहनों का होना अनिवार्य बताया गया है। इसके बावजूद संबंधित निविदाकार द्वारा प्रस्तुत वाहन क्रमांक CG-12-AV-1018 एवं CG-12-BH-3682 भारी मालवाहक श्रेणी में नहीं आते हैं।

आरोप है कि इस स्पष्ट त्रुटि के बावजूद जिला निविदा समिति द्वारा संबंधित निविदाकार को अपात्र घोषित करने के बजाय उसकी फाइनेंशियल बीड खोलने का निर्णय लिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह निर्णय निविदा नियमों का खुला उल्लंघन है और इससे पूरी निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि तकनीकी बीड पर आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए 27 जनवरी 2026 की तिथि निर्धारित की गई थी। लेकिन केवल प्रतिद्वंद्वी निविदाकार द्वारा आपत्ति प्रस्तुत नहीं किए जाने के आधार पर अपात्र दस्तावेजों को नजरअंदाज कर फाइनेंशियल बीड खोलना नियमों के विपरीत है। नियमानुसार दस्तावेजों में त्रुटि पाए जाने पर संबंधित निविदाकार को स्वतः अपात्र घोषित किया जाना चाहिए था।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत राशन परिवहन कार्य अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से हजारों हितग्राहियों तक खाद्यान्न पहुंचाया जाता है। ऐसे में यदि अपात्र वाहनों या अपूर्ण दस्तावेजों वाले निविदाकार को लाभ दिया जाता है, तो इससे शासन की मंशा और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि मेसर्स बजरंगबली ट्रांसपोर्ट द्वारा प्रस्तुत वाहनों के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि वाहन भारी मालवाहक श्रेणी में नहीं पाए जाते हैं, तो उक्त निविदा को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही इस प्रक्रिया में शामिल जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

इस मामले के सामने आने के बाद जिला खाद्य विभाग एवं निविदा प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो पूरी निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर पुनः निविदा जारी करना पड़ सकता है।

इस संबंध में जिला प्रशासन, खाद्य विभाग तथा संबंधित निविदाकार से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक जवाब प्राप्त नहीं हो सका। जवाब प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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