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ग्राम यात्रा की दखल के बाद बड़ी कार्रवाई : अब जांच में खुलेगा कोरबा शिक्षा विभाग का राज, कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों की टीम बनाई, प्रभारी डीईओ तामेश्वर उपाध्याय के आदेशों की होगी गहन पड़ताल

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कोरबा। जिन फैसलों पर पिछले कई हफ्तों से सवाल उठ रहे थे और जिन आदेशों को लेकर शिक्षा विभाग में हलचल थी, अब वे सीधे प्रशासनिक जांच के दायरे में आ चुके हैं। ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ द्वारा लगातार उठाए गए मुद्दों के बाद कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी तामेश्वर उपाध्याय के विरुद्ध तीन सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया है।

जांच दल को 15 दिवस के भीतर अभिमत सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासनिक हलकों में इसे गंभीर कदम माना जा रहा है।

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इन तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई जांच

जांच की जिम्मेदारी श्रीकांत कसेर (सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, जिला कोरबा),
मिथलेश किसान (पंचायत विभाग, जिला कोरबा) तथा
बसंत मिंज (उपसंचालक, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी, कोरबा) को सौंपी गई है।

तीनों अधिकारी अलग-अलग विभागों से हैं, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जांच को बहु-आयामी और स्वतंत्र तरीके से किया जाएगा।


किस वजह से जांच तक पहुंचा मामला ?

पहला मामला 11 वर्षों से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित भृत्य की ज्वाइनिंग से जुड़ा है, जिसका निराकरण सेवा नियमों के अनुसार राज्यपाल स्तर से अपेक्षित माना जाता है। इसके बावजूद जिला स्तर से ज्वाइनिंग आदेश जारी होने पर सवाल खड़े हुए।

दूसरा मामला युक्तियुक्तकरण के बाद निलंबन और मात्र 42 दिनों में बहाली के साथ सुविधाजनक पदस्थापना का है, जिसने विभाग के भीतर चर्चाएं तेज कर दीं।

तीसरा मामला राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित संलग्नीकरण (अटैचमेंट) आदेश से जुड़ा है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र से शिक्षिका को शहर में अटैच किए जाने का आदेश जारी हुआ।


अब 15 दिन निर्णायक

जांच दल द्वारा फाइलों, आदेशों, नोटशीट और संबंधित पक्षों के कथनों की समीक्षा की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ ने जिन मामलों को उजागर किया, वे अब आधिकारिक जांच की मेज पर हैं। आने वाले 15 दिन कोरबा शिक्षा विभाग की दिशा तय कर सकते हैं।

अब निगाहें जांच प्रतिवेदन पर हैं — डीईओ की मनमानी पर क्या कार्रवाई का प्रहार होगा ?

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