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कोरबा गौठान में भूख से गायों की मौत, मुस्लिम युवक ने फेसबुक में वीडियो के जरिये किया खुलासा, सभापति ने कहा- ‘यह सीधी गौ क्रूरता’

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कोरबा। नगर निगम के गौठान में भूख और प्यास से गायों की मौत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नगर निगम में हड़कंप मच गया। यह वीडियो समाजसेवी अब्दुल नफीस ने बनाया था, जिसमें एक बछड़े का शव कुत्ते नोचते नजर आ रहा है, जबकि तीन-चार गायें मरणासन्न स्थिति में पड़ी हुई थीं। वीडियो वायरल होते ही नगर निगम के सभापति नूतन सिंह राजपूत ने तत्काल संज्ञान लिया और मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंचे।

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निरीक्षण में मिली बदइंतजामी

सभापति राजपूत के साथ अपर आयुक्त और निगम अधिकारी भी गौठान पहुंचे, जहां का नजारा बेहद चिंताजनक था। कई गायें भूख-प्यास से कमजोर होकर जमीन पर पड़ी थीं। एक बछड़े की मौत हो चुकी थी, जिसे कुत्ते नोच रहे थे। निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि गौठान में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा और पानी की व्यवस्था नहीं थी।

मौके पर कोई जिम्मेदार कर्मचारी मौजूद नहीं था और न ही पशुओं की देखभाल करने वाला व्यक्ति नजर आया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वहां कोई रजिस्टर या रिकॉर्ड बुक नहीं मिली, जिसमें यह दर्ज हो कि गौठान में कितने पशु हैं, उन्हें कितना दाना-पानी दिया जा रहा है या उनकी स्वास्थ्य जांच कब हुई है।

सभापति ने जताया आक्रोश

सभापति नूतन सिंह राजपूत ने इस स्थिति को गंभीर लापरवाही करार दिया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि पशु क्रूरता है। भूख-प्यास से गायों की मौत होना सामान्य नहीं है। इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति चाहे निगम का अधिकारी हो, कर्मचारी हो, ठेकेदार हो या लेबर सप्लायर — सभी पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।”

उन्होंने इस मामले को ‘गौ हत्या’ की श्रेणी में बताते हुए कहा कि दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए वे हर स्तर पर प्रयास करेंगे। सभापति के निर्देश पर निगम अधिकारियों और गौ सेवकों ने मौके से ही पुलिस को सूचना दी।

पुलिस में शिकायत दर्ज

निरीक्षण के बाद सभापति राजपूत, अपर आयुक्त, अन्य अधिकारी और गौ रक्षक सीधे रामपुर सिविल लाइन थाने पहुंचे। यहां उन्होंने पुलिस को पूरी घटना से अवगत कराया और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच शुरू करने की बात कही है।

निगम में मचा हड़कंप

घटना की जानकारी मिलते ही नगर निगम के अमले में हड़कंप मच गया। कुछ अधिकारी थाने पहुंचे और खुद की जांच कराने का आवेदन दिया। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने पर जिम्मेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निगम ने दावा किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

पोस्टमार्टम और आगे की कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, मृत बछड़े का पोस्टमार्टम कराया जाएगा ताकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सके। यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भूख-प्यास से मौत की पुष्टि होती है, तो यह मामला और गंभीर हो जाएगा। सभापति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

समाजसेवियों की नाराजगी

इस घटना के बाद शहर के कई समाजसेवी और गौ रक्षक संगठनों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गौठानों की स्थिति बदहाल है। पशुओं के लिए बनाए गए इन स्थलों पर चारा, पानी और चिकित्सा सुविधा का उचित इंतजाम न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।

जनता की नजर आगे की कार्रवाई पर

फिलहाल, यह देखना बाकी है कि निगम और पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही यह तय हो पाएगा कि दोषी कौन है और क्या वास्तव में गायों की मौत भूख-प्यास से हुई या किसी अन्य कारण से।

सभापति राजपूत का कहना है कि वे इस मुद्दे को लेकर गंभीर हैं और किसी भी कीमत पर दोषियों को बचने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि गाय हमारी संस्कृति और आस्था का प्रतीक हैं, और उनके साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है।

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