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हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे पर दुर्घटनाओं और आवारा मवेशियों की समस्या पर जताई गंभीर चिंता, तुरंत ठोस कार्रवाई के निर्देश

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बिलासपुर(ग्रामयात्रा छत्तीसगढ़ )। राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं और आवारा मवेशियों की समस्या पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर मवेशियों की आवाजाही आमजन की जान के लिए बड़ा खतरा है और इस पर तुरंत ठोस कार्रवाई आवश्यक है।

 

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कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पेंड्रीडीह बायपास पर ढाबों के सामने ट्रकों की अव्यवस्थित पार्किंग से न केवल व्यवस्था बिगड़ रही है बल्कि गंदगी भी फैल रही है।

कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जिनकी यह जमीन है, वे वहीं घर बनाकर रहें तब समझ आएगा। पेंड्रीडीह बाईपास पर फैली अव्यवस्था से मेडिकल इमरजेंसी व अन्य जरूरी काम में आने-जाने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसमें जल्द से जल्द सुधार कराएं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डीबी में हुई।

सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कहा गया कि संबंधित जमीन प्राइवेट लैंड है। इस पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि अगर प्राइवेट लैंड है तो क्या उसका मनमाना इस्तेमाल किया जाएगा। जमीन किस प्रयोजन से दी गई थी और उसका व्यावसायिक उपयोग कैसे हो रहा है, इसकी जांच जरूरी है।

 

शासन की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि संबंधित व्यक्तियों को बुलाकर समझाइश दी गई है और उनसे यह जानकारी भी ली जाएगी कि प्राइवेट लैंड का उपयोग किस आधार पर व्यावसायिक रूप में किया जा रहा है। इसके लिए शासन ने 15 दिन का समय मांगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पेंड्रीडीह बायपास पर बेतरतीब गाड़ियों की पार्किंग, घटनाएं, गंदगी और लापरवाह पुलिस पेट्रोलिंग व्यवस्था को और खराब कर रही हैं। आरटीओ भी ध्यान नहीं दे रहा। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि इसकी गंभीरता को समझिए। कोई व्यक्ति मेडिकल इमरजेंसी में जा रहा हो या अन्य कार्य से, वहां की अव्यवस्था से भारी दिक्कतें आती हैं। एनएचएआइ को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए।

एनएचएआइ ने हादसों को रोकने के उनके प्रयासों के संबंध में अदालत को बताया कि अतिरिक्त रूट पेट्रोलिंग वाहन तैनात किए गए हैं और निगरानी बढ़ाई गई है। पेंड्रीडीह गांव में कैटल प्लेटफार्म बनाने का काम शुरू हो गया है, वहीं रतनपुर और बेलमुंडी में शेल्टर बनाए जाएंगे। 7.35 किलोमीटर तक बांस की बाड़ (सुरक्षा कवच) लगाने का टेंडर जारी किया गया है।

 

टोल प्लाजा पर पर्चे बांटकर और उद्घोषणा कर यात्रियों को सावधान किया जा रहा है। प्रतिबिंबित गले के पट्टे (रेफ्लेक्टिव नेक बेल्ट) मवेशियों को पहनाए जा रहे हैं ताकि रात में भी उन्हें देखा जा सके। हाईवे के संवेदनशील हिस्सों पर स्ट्रीट लाइट लगाने का काम भी शुरू हो गया है।

कलेक्टर बिलासपुर ने हलफनामा देकर बताया कि पेंड्रीडीह बायपास क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया है। सभी स्ट्रीट लाइटें चालू की गई हैं। म्युनिसिपल कार्पोरेशन और नगर पंचायत बोदरी ने नियमित रूप से मवेशी हटाने के लिए कर्मचारी तैनात किए हैं। गाय-शिकारी (कैटल कैचर) वाहन लगातार चल रहे हैं।

कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को फटकार लगाई कि सात मवेशियों की मौत वाले हादसे पर अब तक कोई व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल नहीं किया गया।

 

कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर ने संज्ञान में लाया गया है कि 16 जुलाई 2025 के न्यायालय के आदेश में राज्य के मुख्य सचिव को राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई सड़क दुर्घटना के संबंध में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जिसमें पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सात मवेशियों की जान चली गई थी। मुख्य सचिव द्वारा उपरोक्त आदेश के अनुपालन में कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है. इसके मद्देनजर, मुख्य सचिव अगली सुनवाई तक अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने आदेश दिया है।

कोर्ट ने पाया कि एनएचएआइ की कार्रवाई केवल बिलासपुर-सरगांव बायपास तक सीमित रही है, जबकि बिलासपुर-अंबिकापुर हाईवे (रतनपुर मार्ग) पर हालात बेहद खराब हैं। इस पर एनएचएआइ प्रोजेक्ट डायरेक्टर को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया। साथ ही नगर पंचायत रतनपुर को भी पक्षकार बनाकर अगली सुनवाई में जवाब तलब किया गया है। अदालत ने साफ किया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अब एक साथ होगी ताकि परस्पर विरोधी आदेश न हों। मामले की अगली सुनवाई 19 सितम्बर को होगी।

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