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पहाड़ी कोरवा ने एसपी को लिखा- आरोपियों को संरक्षण दे रही सिविल लाइन पुलिस, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में कार्यवाही की मांग

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कोरबा। पिछले एक अरसे से अपने हक की लड़ाई लड़ने के साथ खुद आरोपियों के अत्याचार का शिकार बन रहे फिरतराम पहाड़ी कोरवा ने एक और पत्र जिले के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी को लिखा है। इसमें लाचार कोरवा आदिवासी ने आरोपीगणों रंजना सिंह ठाकुर एवं चेतन चौधरी के विरूद्ध दर्ज मामले में अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही किए जाने की मांग की है। कोरवा के खिलाफ विभिन्न घटनाओं के आरोपियों के विरूद्ध तीन मामले दर्ज होने के बाद भी सिविल लाइन पुलिस उन्हें संरक्षण दे रही है, जबकि पीड़ित होने के बाद भी उसे न्याय के लिए अपनी ही संपत्तियों से बेदखल होकर दर-दर भटकना पड़ रहा है।

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फिरतराम पहाड़ी कोरवा ने बताया कि कोरबा निवासी रंजना सिंह ठाकुर व चेतन चौधरी मेरे साथ 30 नवंबर 2023 को कारित अपराध के तहत पुलिस ने इनके विरूद्ध धारा 447, 294, 506, 34 भादवि, 12 मार्च 2024 को कारित अपराध के लिए धारा 451,295 ए, 34 भादवि के तहत व 15 मार्च 2024 को कारित घटना पर किए गए अपराध में धारा 294, 506, 323, 34, भादवि के तहत मामला सिविल लाईन थाना रामपुर में दर्ज है। इन मामलों में सिविल लाईन रामपुर पुलिस द्वारा आरोपियों के प्रभाव में आकर उन्हें सरंक्षण प्रदान किया जाता रहा है। इस आशय से केवल वे जमानतीय मामलों में अपराध दर्ज कर उन्हें थाने से ही जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया गया। पीड़ित कोरवा ने बताया कि इन आरोपियों ने उसके अधिपत्य व स्वामित्व की भूमि पर धर्मान्तरण कराने का प्रयास किया। उसके मकान में जबरन घुसकर मकान का ताला तोड़कर सामान पर जबरन कब्जा करने और मुझे बेदखल कर दिया है और वर्तमान में अपने मकान से पूरी तरह वंचित हो गया हूँ। उसके बाद भी सिविल लाईन थाना के द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से आरोपियों को ही संरक्षण दिया जा रहा है। फिरतराम ने बताया कि रंजना सिंह व उसके सहयोगी चेतन चौधरी के द्वारा जिस जाति प्रमाण पत्र के आधार पर मेरे सम्पति पर कब्जा किया गया है। उसकी जाति प्रमाण पत्र को जिला प्रशासन द्वारा 18 मार्च 2024 को फर्जी व कूटरचित पाते हुए निलंबित कर दिया है। जिसके कारण उक्त महिला अब अनुसूचित जाति की महिला नहीं रही है और मैं अनुसूचित जनजाति का सदस्य रहा हूँ। इस मामले में जिस प्रकार से उक्त आरोपियों के द्वारा मेरे साथ घटना कारित किया गया है वह मेरे अनुसूचित जन जाति (पहाड़ी कोरवा) के सदस्य होने की जानकारी के बाद भी उक्त व्यक्तियों के द्वारा मेरे साथ उपरोक्त उल्लेखित अपराध कारित किया गया है। फिरतराम का कहना है कि चूंकि भारत सरकार के द्वारा अनुसूचित जनजाति के सदस्यांे के ऊपर हो रहे अत्याचार से निजात दिलाने के उद्देश्य से ही उक्त अधिनियम बनाया गया है, लिहाजा इन सभी मामलों में आरोपियों के विरूद्ध अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (1) (10), 3 (2) (5) एसटी एससी एक्ट के तहत् मे कार्यवाही किया जाना नितांत आवश्यक है।

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अपराधिक प्रकृति के व्यक्तियों को भी अर्नेश कुमार के निर्णय का लाभ

फिरतराम कोरवा का यह भी कहना है कि घटना में आरोपियों के विरूद्ध तीन मामले दर्ज होने के बाद भी पुलिस के द्वारा अर्नेश कुमार के निर्णय का हवाला देकर जमानत मुचलके पर रिहा किया जाना अति निंदनीय है। उसका कहना है कि अर्नेश कुमार का निर्णय का लाभ अपराधिक प्रकृति के व्यक्तियों को नहीं दिया जा सकता है। उसके बावजूद उक्त मामले के आरोपियों को उसका जबरन लाभ दिया गया है। फिरतराम ने बताया कि रंजना सिंह ठाकुर व उसके सहयोगी चेतन चौधरी का मनोबल बहुत ही बढ़ा हुआ है। उसके द्वारा उक्त मामले मुझे मेरे ही मकान व जमीन से बेदखल कर दिया गया है और मुझे जान से मरवा देने की लगातार अपने गुगों के माध्यम से धमकी मेरे पास में पहुँचाई जा रही है। जिससे मैं बहुत ही घबराया हुआ हूँ। उक्त महिला एक अपराधिक महिला रही है। जिसके द्वारा कभी भी मेरे साथ मे अप्रिय घटना कारित किया जा सकता है।

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आरोपी का फर्जी जाति प्रमाण पत्र भी निलंबित, जिसके आधार पर मेरे हक पर कब्जा

फिरतराम ने बताया कि रंजना सिंह व उसके सहयोगी चेतन चौधरी के द्वारा जिस जाति प्रमाण पत्र के आधार पर मेरे सम्पति पर कब्जा किया गया है, उसे जिला प्रशासन 18 मार्च 2024 को फर्जी व कूटरचित पाते हुए निलंबित कर चुकी है। वह महिला अब अनुसूचित जाति वर्ग से नहीं है और मैं अनुसूचित जनजाति का सदस्य हूँ। फिरतराम ने एसपी से आग्रह किया है कि इन सभी आरापियों के विरूद्ध मे दर्ज कराए गए सभी मामलो मे अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3 (1) (10) के तहत् मे धारा जोडे़ जाने का निर्देश सिविल लाईन थाना रामपुर कोरबा को दिए जाने का कष्ट करें।


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