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होली में टीवी पर चला फिल्मी गाना..माई नेम इज लखन..और फिर बौराए पूर्व मंत्री जयसिंह ने भांग पीकर गुनगुनाया…वो दिन याद करो, इधर नगाड़ा छोड़ सरोज वादन पर मैडम की ताता थैया चालू

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कोरबा। होली रंगों और हसगुल्लों का त्योहार है। सियासी होली में लफंगी रंग, हुड़दंगी रंग, चेला-चपाटी रंग, जुमलेबाजी रंग, घोटालेबाजी रंग, मन की बात का रंग भी खूब लगाया जाता है, क्योंकि ‘बुरा न मानो होली है’। इसके अलावा कोई बुरा भी मान जाए तो दूसरा कर भी क्या सकता है? ग्राम यात्रा न्यूज नेटवर्क के साथ आप भी पढ़िए और आनंद लीजिए…

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छत्तीसगढ़ में कमल खिलते ही मानों पंजा वालों की होली बेरंग हो चली है। पर रंगों का त्योहार होली हो और मन बौराए न तो चंचल मन किसका काम का..लो हम भी थोड़ा सा बौरा जाते हैं। तो चलिए सबसे पहले पंजा वाली पार्टी में चलते हैं। जहां रंग में भंग डालने के लिए मशहूर रहे कई भंग बाजों का दिल होली के रंगों से ज्यादा बौराया हुआ है। अब उनके वो जमाने चले गए, जब खत या वाट्स एप पर एक संदेश भेजकर कह दे फूल तुम्हे भेजा है खत में फूल नहीं मेरा फरमान है.. पर अब पंजा वाले रंगीले मायूस हैं। दूसरी ओर फूल की बात आते ही मानों पंजा वालों को अप्रैल फूल की याद आ जाती है, जो उन्हें कोरबा की जनता ने दिसंबर की सर्दियों में गिफ्ट किया था।

सेठानी ने बेलन दिखा ताऊ से बोली.. इब सुधर जाओ.. ना मैं उदय किरण बुला लूंगी

सबसे पहले रेल पटरी की जमीन पर कब्जा कर बसे बंगले की पास वाली गली में चलते हैं। हर साल की तरह बंगले के आंगन में रंग से भरे तब तो सज गए हैं पर कोई यहां होली खेलने पहुंचेगा या नहीं, इसी डर में गुजिया का ऑर्डर फाइनल नहीं किया गया है। विधानसभा चुनाव में पहले ही काफी रोकड़ा डूब चुका है और डामर का धंधा भी मंदा पड़ा है। ऐसे में पूर्व मेयर रहीं पूर्व मंत्री की सेठानी ने बेलन दिखाते हुए साफ कह दिया है कि ताऊ सुधर जा, नहीं तो होली के दिन उदय किरण को बुलवा लूंगी, सारी नेता गिरी भूल जाओगे। कान लगाए हम इतना सुनते ही जोश में आ गए और चिल्लाकर निकल लिए कि ताऊ.. बुरा न मानो होली है


चरण को ढूंढ रहा “सारा गांव” और नगाड़े छोड़ सरोज वादन पर थिरक रही मैडम

चरण भैया से लेकर सांसद मैडम तक आधे दशक तक हाइड एंड सीक में काफी माहिर हैं। नेताजी फिर भी दरियादिली के लिए फेमस कहे जाते हैं। उधर दिल दरिया और क्या क्या समुंदर है, ये तो “सारा गांव” जानता है। फिर भी होली हो या दिवाली, कोरबा से लेकर “सारा गांव” बस इन्हे ढूंढने में ही जुटा रहता है। एक बार फिर होली आ गई और चरण भैया को रंग लगाने तैयार बैठी जनता असमंजस में है कि अब वो कोरबा जाए या सक्ति। इधर सांसद मैडम को देखिए जो होली की फाग गीत और नगाड़े छोड़ पिछले 22 दिनों सिर्फ इसलिए सरोज वादन की ट्रेनिंग कर रही हैं , ताकि होली पर रिहर्सल कर फाइनल की तैयारी कर सके।

सक्ति छोड़ पत्नी का पल्लू थामे होली में किधर घूम रहे चरण भैया

कहते हैं इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते। कुछ ऐसी ही इश्केदारी चरण भैया और मैडम की भी काफी फेमस रही है, जो वैसे तो दशकों पुरानी है लेकिन लोग कसमें आज भी खाते हैं। दिक्कत तब है जब राजनीतिक लोग इश्क के लिए ईमान धरम त्याग कर जनता को असहाय छोड़ दिया करते हैं। कुछ ऐसी ही दशा सक्ति और कोरबा की जनता की भी है, जहां की जनता होली के रंग में मस्त मैडम और उनके सर को बस ढूंढती रह जाती है।

इधर बालको की होली में सिर्फ दो रंग, हवा में काला और सड़क पर लाल

भले ही सारा शहर साल में एक दिन होली मनाता है पर वेदांता समूह की कंपनी बालको की होली पूरे वर्ष खेली जाती है। वह भी केवल दो रंगों से। पहला काला रंग है जो हवा में उड़ते राखड़ से चौबीस घंटे बरसता है और आते जाते लोगों को बिना पूछे ही रंग लगा जाता है। पर दूसरा रंग लाल है, जिसकी रंगत बालको की सड़कों पर आए दिन नजर आ जाती है और वह तब, जब बालको कंपनी के बेलगाम ट्रक के पहिए किसी राहगीर के खून से होली खेल जाते हैं।

कैबिनेट मंत्री बोले…डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दो और माई नेम इज लखन में खूब झूमे भाजपाई

इस बार होली की पार्टी के लिए भाजपाइयों ने साढ़े तीन महीने तैयारी की। सबसे विशेष बात, इस दिन के लिए खास बादशाह से बड़ा वाला डीजे मंगवाया गया था, जिसमें सिर्फ एक ही गाना पूरे दो दिन गूंजता रहा। वह गाना है माई नेम इज लखन,, माई नेम इज लखन..हद तो तब हो गई जब पुरानी बस्ती से पार्टी में पहुंचे भाजपाइयों ने बताया कि यहां कोहड़िया में गूंज रहे इस गाने का शोर वहां दुरपा रोड की रेल पटरी की पास वाली गली तक सुनाई दे रहा है और वहां रहने वाले भी इसी धुन पर डांस कर रहे हैं। यह सुनकर कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन से भी रहा न गया और कहा, डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दो..डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दो,,
बुरा ना मानो होली है,,,

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