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हवाई अड्डे को निजी हाथों में देकर कमाई करेगी सरकार

कंपनी कर में कटौती और गिरते जीएसटी संग्रह के बाद सरकार विनिवेश योजना को तेज रफ्तार देने में जुट गई है। सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये की कमाई करने के लिए हवाई अड्डे और रेलवे की संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने की रणनीति बना ली है।
सूत्रों ने बताया कि वाराणसी समेट छह नए हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर ली है। जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। छह हवाई अड्डे में वाराणसी, इंदौर, रायपुर, भुवनेश्वर, अमृतसर और तिरची शामिल हैं।
मौजूदा समय में इन हवाई अड्डों के संचालन का जिम्मा भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के पास है। सरकार की ओर से हवाई अड्डों को निजी हाथों में सौंपने का ये दूसरा चरण होगा। पहले चरण में अदानी एंटरप्राइजेज को छह हवाई अड्डों का संचालन का जिम्मा मिल चुका है।
कई कंपनियां बोली में शामिल होंगी
हवाई अड्डों को निजी हाथ में सौंपने की नई निविदा में जीएमआर, जीएमके और अदानी जैसी कंपनियां आगे आ सकती हैं। बोली की प्रक्रिया के तहत ही जो सबसे अच्छा प्रस्ताव देने वाली कंपनी का चयन किया जाएगा। सरकार की एयरपोर्ट के जरिए करीब 15 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना है। हवाई अड्डों के अलावा रेलवे क्षेत्र की संपत्तियों को बेचकर सरकार 20 हजार करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग और ऊर्जा में भी विनिवेश की तैयारी
सरकार हवाई अड्डों के साथ ही पावर सेक्टर, शिपिंग और राजष्ट्रीय राजमार्ग के कामकाज में निजी कंपनियों को सौंपकर 60-70 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। नीति आयोग की ताजा योजना के मुताबिक शिपिंग क्षेत्र में 10 से ज्यादा संपत्तियों की पहचान की गई है। वहीं अगले तीन सालों में चरणबद्ध तरीके से राजमार्गों को निजी हाथों में सौंपा जाएगारेलवे में निजी कंपनियों को यात्री गाड़ी चलाने का जिम्मा देने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
राजस्व बढ़ाने की पुख्ता तैयारी
सरकार ने देश की सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के पिछले दो महीनों में कई रियायतें दी हैं जिसके चलते सरकारी खजाने की कमाई कम हो गई है। यही वजह है कि अब सरकारी क्षेत्र के उन हिस्सों को निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने की तैयारी चल रही हैं जहां से सरकार को मुनाफा हो सके और घाटा काबू में रहे।

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