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दिल्ली: कांग्रेस के ये 5 नेता लोकसभा चुनाव में ढूंढेंगे हार की वजह

कांग्रेस ने दिल्ली में लोकसभा की सातों सीट पर हार के कारणों की समीक्षा शुरू कर दी है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने सोमवार को इस बाबत पांच सदस्यीय समिति की घोषणा की, जो दस दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। समिति में दिल्ली व केन्द्र के नेताओं को शामिल किया गया है। इसमें पूर्व सांसद परवेज हाशमी, दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री डॉ. एके वालिया, डॉ. योगानंद शास्त्री, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा और पूर्व विधायक जयकिशन शामिल हैं।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सबसे अनुभवी और दमखम वाले प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था। खुद दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित भी उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से मैदान में थीं। बावजूद इसके कांग्रेस को चुनावी सफलता नहीं मिली। हालांकि, साल 2013 के बाद यह पहला मौका है, जब कांग्रेस का वोट आम आदमी पार्टी के वोट से बढ़ा है। साल 2013, 2015 के विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव में ‘आप’ का मत प्रतिशत जिस हिसाब से बढ़ा, उसी हिसाब से कांग्रेस का मत प्रतिशत कम हुआ। हालांकि, 2015 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का मत प्रतिशत लगातार बढ़ता रहा है, लेकिन इस बार 2019 के चुनाव में पहली बार वह आम आदमी पार्टी से ज्यादा हुआ है।
दिल्ली की सात में से पांच लोकसभा सीटों पर कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही है, जबकि दो सीट पर उसे तीसरे स्थान पर रहना पड़ा। लोकसभा चुनाव के हिसाब से देखें तो पार्टी कहीं भी भाजपा का मुकाबला करते नहीं दिखी। उसे सभी जगहों पर लंबे अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
दिल्ली में हार की जिम्मेदारी लेते हुए पांच अन्य राज्यों के अध्यक्षों के साथ ही दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ने भी इस्तीफे की पेशकश की है। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से पहले ही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के समक्ष यह पेशकश की गई थी। हालांकि, पार्टी ने सभी अध्यक्षों को पद पर बने रहने को कहा है।

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